
सनातन संस्कृति में सबसे पवित्र और ऊर्जावान माने जाने वाले सावन (श्रावण) महीने की आज से आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। पंचांग के अनुसार, आज सावन का पहला दिन है और चहुंओर 'हर हर महादेव' के जयकारों के साथ शिवालय गूंज उठे हैं। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह पावन मास ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से बहुत खास माना जाता है। इस पूरे महीने में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा के साथ भोलेनाथ की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं सावन के पहले दिन भगवान शिव की पूजा की पूरी विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग और इस महीने का खास महत्व।
सावन के पहले दिन बन रहे हैं खास योग और पूजा का शुभ मुहूर्त
सावन के पहले दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। आज के दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रदोष काल तक पूजा-पाठ के लिए कई बेहद शुभ संयोग बने हुए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन के पहले दिन सूर्योदय के साथ ही स्नान-ध्यान कर तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करना बेहद फलदायी होता है। पंचांग की गणना के मुताबिक, आज सुबह का समय रुद्राभिषेक और जलाभिषेक के लिए सबसे उत्तम माना गया है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भगवान शिव की पूजा की सटीक विधि और जरूरी सामग्री
शिवलिंग की पूजा अत्यंत सरल और फलदायी मानी जाती है, बशर्ते इसे पूरी निष्ठा से किया जाए। सावन के पहले दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से स्नान कराएं। भोलेनाथ को चंदन का लेप लगाकर भस्म, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी के पत्ते और जनेऊ अर्पित करें। अंत में फल, मिष्ठान, पान-सुपारी और दक्षिणा चढ़ाकर विधिवत आरती करें। ध्यान रहे कि शिव पूजा में कभी भी केतकी का फूल या हल्दी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
भोलेनाथ को लगाएं इन चीजों का भोग और करें इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप
भोलेनाथ बहुत ही भोले हैं और वे थोड़े से जल और बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के पहले दिन भगवान शिव को ठंडाई, मालपुआ, खीर या सात्विक मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। पूजा के दौरान मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र ('ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्') का निरंतर जाप करते रहना चाहिए। इन अचूक मंत्रों के जाप से मानसिक शांति मिलती है और हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।
क्यों खास है सावन का महीना और क्या है इसका पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उनकी मनोकामना पूरी की थी। इसके अलावा समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष जब भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, तब उनके शरीर के तापमान को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर जल और बेलपत्र अर्पित किए थे। तभी से सावन मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। यह महीना न केवल आध्यात्मिक उन्नति बल्कि आत्मशुद्धि का भी सबसे बड़ा अवसर माना जाता है।
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