
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय निवासियों पर वहां की सेना और सुरक्षाबलों का भयानक अत्याचार चरम पर पहुंच गया है. अपनी बुनियादी जरूरतों, आटे-बिजली की किल्लत, भारी-भरकम बिलों और आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठा रही निहत्थी अवाम पर गोलियां बरसाकर पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी हमदर्दी का उसका दावा केवल एक ढोंग है.
125 से अधिक निर्दोषों की मौत और महिलाओं पर बर्बरता
शुरुआती रिपोर्टों में नुकसान कम आंका जा रहा था, लेकिन स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सेना की गोलीबारी में अब तक 125 से ज्यादा बेगुनाह लोग जान गंवा चुके हैं. रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे शहरों में अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. पुलिस व सेना के लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल से 50 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं. इस दरिंदगी को छिपाने के लिए PoK में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, फिर भी सच उजागर होने पर वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.
संयुक्त राष्ट्र ने लगाई कड़ी फटकार
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने इस स्थिति पर गहरा दुख जताते हुए पाकिस्तान को सख्त कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाना, नागरिकों को अपराधी ठहराना और अत्यधिक बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का सीधा उल्लंघन है. संयुक्त राष्ट्र की इस टिप्पणी ने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की बची-कुची साख भी खत्म कर दी है.
'मुजफ्फराबाद मार्च' के साथ आंदोलन फिर शुरू
'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह जनआंदोलन पाकिस्तान की गोलियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है. समिति के नेताओं ने साफ किया कि अपने शहीदों का अंतिम संस्कार करने और घायलों के इलाज के लिए आंदोलन को कुछ समय रोका गया था, लेकिन अब 'मुजफ्फराबाद मार्च' को और अधिक मजबूती के साथ दोबारा शुरू कर दिया गया है. जनता का संकल्प है कि जब तक सैन्य तानाशाही का अंत नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा.
क्यों भड़की आक्रोश की आग और क्या है 12 सीटों का विवाद?
PoK के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा और महंगे बिजली बिलों से त्रस्त हैं. इस आर्थिक शोषण के साथ-साथ राजनीतिक अधिकारों का भी हनन किया जा रहा है. PoK विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के नाम पर 12 सीटें आरक्षित रखी गई हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का गलत इस्तेमाल करके अपनी मनपसंद कठपुतली सरकार बनाता है. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इन आरक्षित सीटों को तुरंत खत्म किया जाए ताकि PoK के मूल निवासियों को उनका वास्तविक राजनीतिक हक मिल सके.
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