
मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हजारों छात्र-छात्राओं के लिए 20 अगस्त का दिन बेहद निर्णायक साबित होने जा रहा है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग (DME MP) द्वारा राज्य कोटे की 85 फीसदी एमबीबीएस और बीडीएस सीटों के लिए पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट परिणाम जारी किया जाएगा। इस बार राज्य की कुल 6,020 मेडिकल सीटों पर दाखिले के लिए 17,093 योग्य अभ्यर्थियों ने दावेदारी ठोकी है, जिससे मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक हो गया है। हर एक सरकारी सीट के लिए लगभग तीन से चार दावेदार कतार में हैं, जिससे कटऑफ का ग्राफ ऊपर जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
स्टेट मेरिट लिस्ट जारी और कड़ा मुकाबला
चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक स्टेट मेरिट सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि इस साल मध्य प्रदेश के छात्रों ने नीट यूजी में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। मेरिट लिस्ट में दर्ज 17,093 अभ्यर्थियों में टॉपर्स के बीच अंकों का अंतर बेहद मामूली है। जबलपुर के आर्यमान सिंह सोलंकी ने 696 अंकों (AIR 46) के साथ स्टेट रैंक-1 हासिल की है, वहीं सार्थक साहू ने 680 अंकों के साथ दूसरा स्थान पाया है। टॉप-10 में शामिल उम्मीदवारों के अंक 655 से ऊपर हैं। उच्च अंकों की इस सघनता के कारण राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों की जनरल कैटेगरी की सीटें शुरुआती रैंकों में ही भर जाने का अनुमान है।
सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों का सीट मैट्रिक्स
मध्य प्रदेश में इस समय 20 से अधिक सरकारी और 14 से ज्यादा निजी मेडिकल कॉलेज काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हैं। राज्य के प्रमुख सरकारी संस्थानों में गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (MGM) इंदौर, गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) ग्वालियर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर और श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं। नए खुले सरकारी मेडिकल कॉलेजों—जैसे नीमच, मंदसौर, श्योपुर और सिंगरौली के जुड़ने से सीटों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को भी स्थानीय स्तर पर मेडिकल की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। प्राइवेट कॉलेजों में पीपुल्स कॉलेज भोपाल, अरबिंदो मेडिकल कॉलेज इंदौर, चिरायु और एलएन मेडिकल कॉलेज में भी स्टेट कोटे के तहत भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं।
चॉइस फिलिंग और अलॉटमेंट का गणित
मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों द्वारा 15 से 18 अगस्त के बीच कॉलेज प्राथमिकताओं की चॉइस फिलिंग और लॉकिंग की प्रक्रिया पूरी की गई। सीट आवंटन पूरी तरह से अभ्यर्थी की ऑल इंडिया व स्टेट रैंक, आरक्षण श्रेणी (UR, OBC, SC, ST, EWS), महिला कोटा, पीडब्ल्यूडी कोटा और उनके द्वारा लॉक की गई कॉलेज चॉइस के आधार पर सॉफ्टवेयर द्वारा पारदर्शी तरीके से किया जाता है। जिन छात्रों ने अपनी प्राथमिकताओं में टॉप सरकारी कॉलेजों के साथ-साथ बैकअप के तौर पर नए सरकारी व मान्यता प्राप्त प्राइवेट कॉलेजों को सही क्रम में रखा है, उनके सीट पाने के अवसर काफी बढ़ जाते हैं।
20 अगस्त को सीट अलॉटमेंट के बाद क्या करें?
20 अगस्त को राउंड-1 का आवंटन परिणाम घोषित होते ही चयनित अभ्यर्थियों को आधिकारिक पोर्टल dme.mponline.gov.in पर लॉगिन करके अपना प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करना होगा। इसके बाद 21 अगस्त से 27 अगस्त के बीच छात्रों को आवंटित मेडिकल कॉलेज में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मूल दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) कराना होगा और निर्धारित ट्यूशन फीस जमा करनी होगी। जो अभ्यर्थी राउंड-1 में मिली सीट से संतुष्ट हैं, वे एडमिशन लॉक कर सकते हैं, जबकि बेहतर कॉलेज की उम्मीद रखने वाले उम्मीदवार 'अपग्रेडेशन' (Upgradation) का विकल्प चुनकर सेकंड राउंड में भाग ले सकेंगे।
एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेजों की चेकलिस्ट
कॉलेज रिपोर्टिंग के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए छात्रों को सभी जरूरी दस्तावेजों के मूल सेट और तीन-तीन स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी तैयार रखनी चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों में नीट यूजी 2026 एडमिट कार्ड व स्कोरकार्ड, एमपी नीट रजिस्ट्रेशन रसीद और अलॉटमेंट लेटर, 10वीं और 12वीं की मूल अंकसूची व प्रमाण पत्र, मध्य प्रदेश का मूल निवास प्रमाण पत्र (MP Domicile Certificate), जाति प्रमाण पत्र (सक्षम अधिकारी द्वारा जारी), आय प्रमाण पत्र (OBC/EWS के लिए), आधार कार्ड/पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट शामिल हैं। जिन छात्रों ने सरकारी स्कूल कोटा या स्वतंत्रता सेनानी कोटे का लाभ लिया है, उन्हें उसका अधिकृत प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
क्या रहेगा कटऑफ का रुझान?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल मध्य प्रदेश में सरकारी एमबीबीएस सीटों के लिए सामान्य वर्ग (UR) का कटऑफ 600 से 615 अंकों के बीच रहने का अनुमान है, जबकि ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के लिए यह 590 से 605 अंकों के आसपास सिमट सकता है। एससी वर्ग के लिए 490 से 510 और एसटी वर्ग के लिए 390 से 410 अंक सुरक्षित स्कोर माने जा रहे हैं। प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सरकारी कोटे की सीटों के लिए कटऑफ तुलनात्मक रूप से कम रहेगा। 20 अगस्त को जारी होने वाली अलॉटमेंट लिस्ट के साथ ही हजारों अभ्यर्थियों के डॉक्टर बनने की दिशा में पहला कदम तय हो जाएगा।
UK News
