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तीसरे बच्चे पर मिलेगी पूरे 1 साल की मैटरनिटी लीव: इस राज्य सरकार का ऐतिहासिक फैसला, जानें किन महिलाओं को मिलेगा फायदा

कामकाजी महिलाओं के स्वास्थ्य, नवजात की उचित देखभाल और गिरती जन्म दर को संतुलित करने की दिशा में सरकार ने एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने अपनी सेवा नियमावली में बड़ा संशोधन करते हुए महिला कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर पूरे 365 दिन यानी 1 साल का सवेतन मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) देने का आधिकारिक ऐलान किया है।

अब तक अधिकांश सरकारी और निजी संस्थानों में मातृत्व लाभ केवल पहले दो बच्चों तक ही सीमित रहता था या तीसरे बच्चे पर अवकाश की अवधि काफी कम कर दी जाती थी। लेकिन इस नए नीतिगत फैसले के बाद तीसरे बच्चे के प्रसव पर भी महिला कर्मियों को पूरे एक वर्ष तक पूरे वेतन के साथ छुट्टी का लाभ मिलेगा।

किस राज्य ने लिया यह बड़ा फैसला और क्या है इसके पीछे का कारण?

यह अनूठा और दूरगामी फैसला सिक्किम सरकार द्वारा राज्य में तेजी से घटती प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) की समस्या से निपटने के लिए लागू किया गया है।

सिक्किम देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां स्थानीय जनजातीय और मूल आबादी की जन्म दर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे चली गई है। जनगणना और स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों में जनसंख्या के गिरते ग्राफ को देखते हुए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़े पैमाने पर 'जनसंख्या प्रोत्साहन नीति' (Pro-natalist Policy) को लागू किया है।

सरकार का मानना है कि कामकाजी महिलाएं करियर और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन न बन पाने के कारण एक या दो से अधिक बच्चे पैदा करने से बचती हैं। एक साल का अवकाश मिलने से उन्हें करियर की चिंता किए बिना परिवार विस्तार का सुरक्षित माहौल मिलेगा।

नए मातृत्व अवकाश नियमों की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)

संशोधित सेवा नियमों के तहत महिला व पुरुष दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए कई विशेष लाभ जोड़े गए हैं:

  • तीसरे बच्चे पर 365 दिन की छुट्टी: तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला कर्मचारी पूरे 1 वर्ष (365 दिन) का सवेतन अवकाश ले सकेंगी। इस दौरान उनका पूरा मासिक वेतन और नियमित भत्ते निर्बाध रूप से मिलते रहेंगे।

  • पहले दो बच्चों के लिए 12 महीने का अवकाश: सिक्किम में पहले दो जीवित बच्चों के जन्म पर भी महिला सरकारी कर्मचारियों को 1 वर्ष (365 दिन) की मैटरनिटी लीव पहले से ही दी जा रही है, जिसे अब तीसरे बच्चे के लिए भी विस्तारित कर दिया गया है।

  • पुरुष कर्मचारियों के लिए पितृत्व अवकाश (Paternity Leave): नवजात शिशु और पत्नी की देखभाल में सहयोग के लिए पुरुष कर्मचारियों को 30 दिन (1 माह) का सवेतन पितृत्व अवकाश प्रदान किया जा रहा है।

  • वरिष्ठता और पदोन्नति पर कोई असर नहीं: इस 1 वर्ष के अवकाश को महिला कर्मचारी की निरंतर सेवा (Continuous Service) माना जाएगा। इससे उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) या भविष्य की पदोन्नति (Promotion) पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

तीसरे बच्चे पर अन्य विशेष वित्तीय प्रोत्साहन और लाभ

सिर्फ मातृत्व अवकाश ही नहीं, बल्कि तीसरे बच्चे के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अतिरिक्त आर्थिक सहायता योजनाएं भी शुरू की हैं:

  • विशेष वित्तीय सहायता: सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को दूसरे बच्चे के जन्म पर एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि (Special Increment) और तीसरे बच्चे के जन्म पर दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि (Two Increments) का लाभ दिया जा रहा है।

  • गैर-सरकारी व ग्रामीण महिलाओं को मदद: जो महिलाएं सरकारी सेवा में नहीं हैं, उन्हें 'वात्सल्य योजना' और स्थानीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आर्थिक अनुदान और प्रसव सहायता प्रदान की जा रही है।

  • आईवीएफ (IVF) सहायता योजना: जिन दंपतियों को संतान उत्पत्ति में चिकित्सीय बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए सरकार विशेष अस्पतालों में आईवीएफ उपचार के लिए ₹3 लाख तक की वित्तीय सहायता मुहैया करा रही है।

देश के केंद्रीय मातृत्व लाभ कानून (Maternity Benefit Act) से यह कैसे अलग है?

केंद्रीय 'मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017' के तहत पूरे भारत में कामकाजी महिलाओं को पहले दो बच्चों के जन्म पर 26 सप्ताह (लगभग 6 महीने) का सवेतन अवकाश मिलता है, जबकि तीसरे बच्चे के जन्म पर यह अवधि घटकर केवल 12 सप्ताह (लगभग 3 महीने) रह जाती है।

सिक्किम सरकार का यह नियम केंद्रीय कानून से कहीं अधिक उदार और महिला-हितैषी है, क्योंकि यह तीसरे बच्चे पर भी बिना किसी कटौती के पूरे 52 सप्ताह (365 दिन) का पूर्ण वेतन अवकाश सुनिश्चित करता है।

समाज और महिला कर्मचारियों पर प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। शिशु विशेषज्ञों के अनुसार, जीवन के पहले वर्ष में बच्चे को मां के दूध और निरंतर देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। 1 साल की मैटरनिटी लीव से न केवल शिशु मृत्यु दर (IMR) और कुपोषण में कमी आएगी, बल्कि प्रसवोपरांत माताओं में होने वाले तनाव (Postpartum Depression) से उबरने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

सिक्किम की यह अनूठी नीति अब अन्य पूर्वोत्तर राज्यों और कम प्रजनन दर वाले क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल नीति के रूप में देखी जा रही है।