
दुनिया भर की निगाहें इस समय फारस की खाड़ी और जलडमरूमध्य के सबसे अहम हिस्से यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हुई हैं, जहां भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते पर वर्चस्व को लेकर एक नया घमासान छिड़ गया है। ताजा हालात यह हैं कि इस भयंकर तनाव और सुरक्षा संकट के चलते दुनिया भर के लगभग 80 प्रतिशत से अधिक कमर्शियल और कार्गो जहाज अब वैकल्पिक ओमानी रूट (Omani Route) से होकर गुजरने को मजबूर हो चुके हैं। इस बीच, अमेरिकी राजनीतिक गलियारों से आ रहे बयानों और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया ने इस संकट को और अधिक पेचीदा बना दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व और ताजा सुरक्षा संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे होकर मध्य पूर्व का अधिकांश तेल और गैस दुनिया भर के बाजारों में सप्लाई किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ समय से इस इलाके में बढ़ते तनाव, सैन्य गतिविधियों और हमलों के खतरे के कारण शिपिंग कंपनियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। जहाजों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मैरीटाइम ऑपरेटरों ने पारंपरिक और जोखिम भरे रास्तों के बजाय ओमानी जलक्षेत्र के करीब से गुजरने वाले रूट को चुनना शुरू कर दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, इस सामरिक मार्ग से गुजरने वाले लगभग 80 प्रतिशत जहाजों ने अपनी सुरक्षा के खातिर इसी सुरक्षित मार्ग का रुख किया है, ताकि किसी भी संभावित अनहोनी या जब्ती की कार्रवाई से बचा जा सके।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में उबाल
इस भू-राजनीतिक हलचल के बीच अमेरिका के राजनीतिक मंच से एक ऐसा बयान सामने आया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और इसके नियंत्रण को लेकर अपना मजबूत दावा ठोक दिया है। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और खाड़ी देशों के साथ उनके समीकरणों पर लगातार चर्चा हो रही है। अमेरिका का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए इस मार्ग पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण जरूरी है, ताकि तेल की सप्लाई बाधित न हो और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे। उनके इस तीखे और आक्रामक दावे ने पश्चिमी देशों और खाड़ी के खांटी राजनैतिक विरोधियों के बीच कूटनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और ट्रंप के दावे का उड़ाया गया मजाक
डोनाल्ड ट्रंप के इस ताजा दावे के बाद खाड़ी क्षेत्र से बेहद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। खासकर ईरान (Iran), जिसका इस जलडमरूमध्य के ठीक उत्तर में सीधा नियंत्रण और प्रभाव है, ने अमेरिकी नेता के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसका जमकर मजाक उड़ाया है। ईरानी सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह क्षेत्र उनकी अपनी समुद्री सीमा और प्रभाव क्षेत्र के अंतर्गत आता है, और बाहरी ताकतों द्वारा इस तरह के दावे करना केवल राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है। तेहरान की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि होर्मुज के चौकीदार वे खुद हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ईरान द्वारा इस तरह खिल्ली उड़ाए जाने के बाद वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर तनाव और अधिक गहरा गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाला असर
होर्मुज संकट का यह पूरा घटनाक्रम केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी और आम आदमी की जेब पर पड़ने की पूरी आशंका है। चूँकि दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है, इसलिए यहां होने वाली हर हलचल कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा करती है। 80 प्रतिशत जहाजों का ओमानी रूट पर डायवर्ट होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि कंपनियां किसी भी प्रकार का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती हैं। यदि यह संकट और लंबा खिंचता है, तो शिपिंग की लागत में भारी इजाफा होगा, जिसका असर आने वाले दिनों में ईंधन और उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है।
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