
कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर से भू-राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया द्वारा शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर अपनी कड़ी आपत्ति और कड़ा विरोध जताया है। प्योंगयांग प्रशासन का कहना है कि वह इन सैन्य गतिविधियों और धमकियों के खिलाफ अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल लगातार जारी रखेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी प्रशासन और कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को सुधारने के प्रयास भी समानांतर रूप से चल रहे हैं।
ट्रंप के आदेश और सैन्य अभ्यास की पृष्ठभूमि
उत्तर कोरिया का यह तीखा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेंटागन को दिए गए उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें अमेरिकी सेना को इन सैन्य अभ्यासों में अपनी भागीदारी को काफी हद तक कम करने के लिए कहा गया था। ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने पुराने और अच्छे संबंधों का जिक्र करते हुए यह भी संकेत दिया था कि किम ने उनकी पहलों का सकारात्मक जवाब दिया है। हालांकि, तय कार्यक्रम के अनुसार ये अभ्यास सोमवार को शुरू हो गए, लेकिन दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना कोरिया के कमांडर जेवियर ब्रंसन ने मंगलवार को दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय का दौरा करके अभ्यासों के दायरे को सीमित करने की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर तनाव बरकरार
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक बातचीत को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीन पर सैन्य अभ्यासों को लेकर अविश्वास अब भी बना हुआ है। किम जोंग उन के नेतृत्व में उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र के तमाम कड़े प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अपने सामरिक परमाणु हथियारों और उन्नत मिसाइल कार्यक्रमों का तेजी से विस्तार किया है। यही वजह है कि वाशिंगटन और सियोल द्वारा संयुक्त सैन्य अभ्यास किए जाने पर प्योंगयांग हमेशा आक्रामक रुख अपनाता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिकी नेतृत्व की इस नरमी से दोनों देशों के बीच संवाद का कोई नया दौर शुरू हो पाएगा या तनाव और अधिक गहराएगा।
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