
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाए और इसके नेताओं को किसी भी प्रकार का राजनयिक सम्मान या उच्चस्तरीय बैठकें न दी जाएं। आयोग का यह तीखा बयान संघ प्रमुख मोहन भागवत के संभावित अमेरिका दौरे से कुछ ही दिन पहले सामने आया है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
USCIRF के अध्यक्ष और कमिश्नर के बयान
अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने एक बयान में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है। इसी आधार पर आयोग की कमिश्नर जीन मिल्स ने भी अमेरिकी प्रशासन से यह अपील की है कि धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
क्या है मोहन भागवत का विदेशी दौरा कार्यक्रम?
संघ प्रमुख मोहन भागवत आगामी 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के महत्वपूर्ण दौरे पर जाने वाले हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' (AHEAD) द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके इस दौरे को लेकर विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और विभिन्न संगठनों के बीच काफी उत्साह देखा जा रहा है।
कनाडा के 100 से अधिक संगठनों ने किया समर्थन
दूसरी ओर, आरएसएस प्रमुख के इस दौरे का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। कनाडा के 100 से अधिक प्रमुख संगठनों और समूहों ने खुलकर मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रियों को औपचारिक पत्र लिखकर उनके दौरे को रोकने की मांग करने वाले तत्वों को खारिज करने की अपील की है। समर्थन करने वाले समूहों का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता, स्वतंत्र और निष्पक्ष सबूत होने चाहिए तथा स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।
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