
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति और संसाधन देने की दिशा में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। विभाग ने वैश्विक ऊर्जा दिग्गज 'शेल इंडिया' (Shell India) और प्रमुख फिनटेक प्लेटफॉर्म 'फोनपे' (PhonePe) के साथ दो अलग-अलग समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य देश के उभरते हुए स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक डिजिटल पेमेंट टूल्स, वित्तीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सुविधाएं और वैश्विक स्तर की मेंटरशिप उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने कारोबार को तेजी से स्केल कर सकें।
फोनपे के साथ साझेदारी: पेमेंट क्रेडिट्स और डिजिटल टूल्स की सुविधा
फोनपे के साथ हुए समझौते के तहत डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को डिजिटल पेमेंट्स और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाने में सीधी मदद मिलेगी।
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पेमेंट गेटवे क्रेडिट्स: शुरुआती चरण (Early-stage) के स्टार्टअप्स को लेनदेन की लागत कम करने के लिए विशेष पेमेंट गेटवे क्रेडिट्स और रियायती दरों पर मर्चेंट सॉल्यूशंस दिए जाएंगे।
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टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन: नए उद्यमों को फोनपे के सुरक्षित एपीआई (API), पेमेंट लिंक्स और डिजिटल इनवॉइसिंग टूल्स का सीधा एक्सेस मिलेगा, जिससे उनके प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के लिए चेकआउट प्रक्रिया आसान होगी।
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वित्तीय साक्षरता और ग्रोथ वर्कशॉप्स: स्टार्टअप संस्थापकों को सुरक्षित डिजिटल पेमेंट्स, फ्रॉड डिटेक्शन और कंप्लायंस से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
शेल इंडिया के साथ गठबंधन: क्लीन-टेक और डीप-टेक को बढ़ावा
शेल इंडिया के साथ हुए समझौते का मुख्य केंद्र क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी और डीप-टेक सेक्टर्स में काम कर रहे स्टार्टअप्स को मजबूती देना है।
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शेल ई4 (Shell E4) प्लेटफॉर्म का लाभ: स्टार्टअप्स को शेल के प्रमुख एक्सेलेरेटर प्रोग्राम 'शेल ई4' से जोड़ा जाएगा, जहां उन्हें वैश्विक उद्योग विशेषज्ञों से तकनीकी और रणनीतिक मार्गदर्शन मिलेगा।
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आरएंडडी और टेस्टिंग लैब एक्सेस: इनोवेटर्स को ऊर्जा दक्षता, बायो-फ्यूल्स, बैटरी टेक्नोलॉजी और कार्बन रिडक्शन से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए आधुनिक लैब और टेस्टिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा मिलेगी।
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ग्लोबल मार्केट लिंकेज: चयनित स्टार्टअप्स को शेल के अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन नेटवर्क और संभावित निवेशकों से जुड़ने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें विदेशी बाजारों में विस्तार करने में मदद मिलेगी।
स्टार्टअप इंडिया पहल को मिलेगा बड़ा संबल
डीपीआईआईटी के अधिकारियों के अनुसार, कॉरपोरेट सेक्टर की दिग्गज कंपनियों और फिनटेक लीडर्स के साथ इस तरह का सहयोग 'स्टार्टअप इंडिया' अभियान को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरने वाले इनोवेटर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती उच्च परिचालन लागत (Operational Cost) और तकनीकी मार्गदर्शन की कमी होती है। यह द्विपक्षीय समझौता न केवल शुरुआती वित्तीय बोझ को कम करेगा, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स को विश्वस्तरीय मानकों पर खरा उतरने के लिए आवश्यक इकोसिस्टम भी प्रदान करेगा।
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