
खरीफ सीजन में कपास की खेती करने वाले अन्नदाताओं के लिए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। पिछले कुछ वर्षों में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) और अन्य कीटों के प्रकोप तथा मौसम की मार के कारण कपास का रकबा लगातार घट रहा था। किसानों की बढ़ती लागत को कम करने, फसल को कीटों से बचाने और गुणवत्तापूर्ण पैदावार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कपास किसानों के लिए ₹4,000 तक के विशेष अनुदान (Subsidy) का ऐलान किया है। इस योजना का सीधा लाभ सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।
सूक्ष्म पोषक तत्वों और एकीकृत कीट प्रबंधन पर मिलेगा अनुदान
कपास की फसल में सबसे बड़ा खर्च महंगे कीटनाशकों और उर्वरकों पर होता है। हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई इस नई कल्याणकारी पहल के तहत किसानों को सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) और एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM) से जुड़ी कृषि सामग्री खरीदने पर 50% या अधिकतम ₹2,000 प्रति एकड़ की दर से वित्तीय सहायता दी जा रही है। एक किसान को अधिकतम 2 एकड़ तक के लिए कुल ₹4,000 का अनुदान दिया जा रहा है। यदि किसी किसान का कीटनाशक या पोषक तत्वों का बिल ₹5,000 आता है, तो उसे अधिकतम ₹2,000 प्रति एकड़ (2 एकड़ पर ₹4,000) का लाभ मिलेगा। वहीं बिल कम होने की स्थिति में वास्तविक खर्च का 50 प्रतिशत ही अनुदान स्वरूप दिया जाएगा।
देसी कपास की किस्मों को बढ़ावा देने के लिए अलग से प्रोत्साहन
कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील हाइब्रिड और बीटी किस्मों के अलावा, राज्य सरकार देसी कपास (Indigenous Cotton) की खेती को भी पुनर्जीवित करने पर जोर दे रही है। देसी कपास की किस्मों में कीटों और रोगों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता अधिक होती है और इसमें लागत भी कम आती है। देसी कपास की बुवाई करने वाले किसानों को प्रति एकड़ अलग से प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में हर जिले में दो-दो एकड़ के विशेष डिमॉन्स्ट्रेशन प्लॉट्स तैयार किए जा रहे हैं, जहां किसानों को आधुनिक व वैज्ञानिक तरीकों से कपास की खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पारंपरिक 'कॉटन बेल्ट' के इन प्रमुख जिलों पर रहेगा खास फोकस
हरियाणा के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में इस योजना को युद्धस्तर पर लागू किया जा रहा है। इनमें राज्य के पारंपरिक कॉटन बेल्ट माने जाने वाले जिले—सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ शामिल हैं। इन जिलों में लगातार कीटों के हमलों से परेशान होकर जो किसान धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों की ओर रुख कर रहे थे, उन्हें दोबारा कपास की लाभदायक खेती से जोड़ने के लिए कृषि विभाग की विशेष विंग 'प्रमोशन ऑफ कॉटन कल्टीवेशन इन हरियाणा' (PCCH) पूरी सक्रियता से काम कर रही है।
योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें
अनुदान का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों को पूरा करते हैं:
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किसान हरियाणा का मूल निवासी होना चाहिए और उसके पास राज्य में कृषि भूमि होनी चाहिए।
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किसान ने अपने खेत में कपास की अधिकृत/प्रमाणित किस्मों की बुवाई की हो।
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किसान द्वारा खरीदे गए सूक्ष्म पोषक तत्व और कीट प्रबंधन सामग्री के अधिकृत जीएसटी बिल (GST Purchase Bills) होने अनिवार्य हैं।
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योजना का लाभ लेने के लिए किसान का राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर समय पर पंजीकरण होना आवश्यक है।
आवेदन की पूरी प्रक्रिया: 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर करें रजिस्ट्रेशन
इस वित्तीय सहायता का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को सरकार के आधिकारिक पोर्टल 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' (fasal.haryana.gov.in) पर अपनी फसल का विधिवत पंजीकरण करना अनिवार्य है।
पोर्टल पर किसान अपनी भूमि का खसरा-खतौनी विवरण, बोई गई कपास की किस्म और बैंक खाते की जानकारी दर्ज करेंगे। इसके बाद स्थानीय कृषि अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और बिलों की जांच के बाद सब्सिडी की स्वीकृत राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता या विस्तृत जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2117 पर सीधे संपर्क कर सकते हैं।
लागत घटेगी, बढ़ेगी किसानों की शुद्ध आमदनी
कपास को 'सफेद सोना' कहा जाता है, लेकिन लागत में अनियंत्रित बढ़ोतरी और कीटों के प्रकोप ने हाल के वर्षों में किसानों के मुनाफे को कम कर दिया था। सरकार द्वारा कीट प्रबंधन और आवश्यक पोषक तत्वों पर ₹4,000 तक की सीधी सब्सिडी देने से किसानों की जेब पर कीटनाशकों का बोझ कम होगा, जमीन की उर्वरकता सुरक्षित रहेगी और पैदावार में गुणवत्तापूर्ण सुधार आएगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव और पोषक तत्वों की आपूर्ति अपनाकर किसान अपनी पैदावार में 20% से 30% तक की सीधी बढ़ोतरी हासिल कर सकते हैं।
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