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यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पत्नी ने मांगी मदद: पाकिस्तानी सेना के मेजर ने कैंपस में छात्रों पर चलाई अंधाधुंध गोलियां, छात्र घायल होने पर भड़का भारी आक्रोश

पाकिस्तान में सेना के अधिकारियों द्वारा सत्ता और रसूख के खुले दुरुपयोग का एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पंजाब प्रांत के रावलपिंडी स्थित प्रतिष्ठित 'पीर मेहर अली शाह एरिड एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी' (PMAS Arid Agriculture University) में विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर द्वारा मदद मांगने पर उनके पति, जो पाकिस्तानी सेना में सेवारत मेजर (Army Major) हैं, सशस्त्र जवानों के साथ कैंपस में घुस आए और निहत्थे छात्रों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस सनसनीखेज गोलीबारी में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में तनाव फैल गया और छात्रों ने सेना के दबदबे व प्रशासनिक दादागीरी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

क्लास विवाद से शुरू हुआ मामला: प्रोफेसर पत्नी ने पति को बुलाया

घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और दर्ज प्राथमिक सूचना के अनुसार, विश्वविद्यालय के एक विभाग में महिला प्रोफेसर और कुछ छात्रों के बीच किसी शैक्षणिक व प्रशासनिक मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई थी।

विवाद सुलझाने के लिए विश्वविद्यालय की अनुशासन समिति या सुरक्षा गार्ड्स का सहारा लेने के बजाय, महिला प्रोफेसर ने अपने पति को फोन कर दिया, जो पाकिस्तानी सेना में मेजर के पद पर तैनात हैं। कुछ ही देर में सैन्य अधिकारी अपनी आधिकारिक गाड़ी और वर्दीधारी गनर व साथियों के साथ यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर आ धमके।

कैंपस में घुसते ही छात्रों पर तान दी बंदूक, सीधे चलाई गोली

मेजर के कैंपस पहुंचते ही माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। छात्रों का आरोप है कि सैन्य अधिकारी ने बिना किसी बातचीत या स्थिति समझने की कोशिश किए छात्रों को धमकाना शुरू कर दिया। जब छात्रों ने सैन्य वर्दी में कैंपस के भीतर आकर डराने-धमकाने का विरोध किया, तो मेजर ने अपना आपा खो दिया और अपनी सरकारी पिस्तौल/हथियार निकालकर सीधे छात्रों के समूह पर फायरिंग शुरू कर दी।

  • छात्र हुआ घायल: गोलीबारी के दौरान एक निर्दोष छात्र के पैर में सीधे गोली लगी, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा।

  • अस्पताल में भर्ती: घायल छात्र को साथी छात्रों ने आनन-फानन में बेनजीर भुट्टो अस्पताल (BBH) में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • छात्रों का उग्र प्रदर्शन: घटना के तुरंत बाद सैकड़ों छात्रों ने मुख्य सड़क और यूनिवर्सिटी गेट को जाम कर दिया और सेना व विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई और सेना का प्रभाव

घटना की सूचना मिलते ही रावलपिंडी के न्यू टाउन पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि आरोपी के सेना का वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण पुलिस शुरुआत में मुकदमा दर्ज करने और अधिकारी को हिरासत में लेने से बचती रही।

भारी छात्र आक्रोश, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव के बाद पुलिस ने घटना की औपचारिक जांच शुरू की और घायल छात्र के बयानों के आधार पर मामला दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी आंतरिक जांच समिति गठित कर दी है।

पाकिस्तान में सैन्य दबदबे और नागरिक अधिकारों पर फिर उठे सवाल

यह कोई पहला मामला नहीं है जब पाकिस्तान में सैन्य अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत विवादों में अपनी वर्दी, ताकत और हथियारों का इस्तेमाल आम नागरिकों को दबाने के लिए किया गया हो।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने इस कायराना हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि एक शैक्षणिक संस्थान के भीतर फौजी अधिकारी द्वारा गोलियां चलाना यह दिखाता है कि पाकिस्तान में कानून का राज किस कदर पंगु हो चुका है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की है कि आरोपी मेजर के खिलाफ न केवल सिविल कोर्ट में हत्या के प्रयास का मुकदमा चलाया जाए, बल्कि सैन्य अदालत (Court Martial) के तहत उसकी सेवा भी समाप्त की जाए।