
पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर फटने और भारी मूसलाधार बारिश के बाद भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण प्राकृतिक आपदा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और सैकड़ों विदेशी पर्यटक व तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। इस त्रासदी के बीच भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) पूरी तरह सक्रिय हैं और फंसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने स्थिति को लेकर ताजा प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया है कि तिब्बत (चीनी सीमा) की तरफ फंसे 400 से अधिक भारतीय नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी तक सीधा संपर्क नहीं हो पाया है जिनकी खोजबीन जारी है।
विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग: फंसे भारतीयों और लापता लोगों पर क्या है आधिकारिक स्थिति?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल बाढ़ संकट और भारतीय नागरिकों की स्थिति पर विस्तृत विवरण साझा किया है।
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चीन/तिब्बत की ओर फंसे भारतीय पूरी तरह सुरक्षित: विदेश मंत्रालय ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों में गए 400 से अधिक भारतीय नागरिक चीनी सीमा (तिब्बत क्षेत्र) में सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हैं। इनमें से दारचेन (Darchen), हिल्सा (Hilsa), जीलोंग (Jilong City) और सागा मार्ग पर मौजूद नागरिकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है और उन्हें सुरक्षित निकालने (Evacuation) के लिए चीनी और नेपाली अधिकारियों से तालमेल किया जा रहा है।
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320 भारतीय नागरिकों से संपर्क की कोशिश जारी: बाढ़ की चपेट में आए रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में लगभग 320 भारतीय नागरिकों से नेटवर्क ध्वस्त होने और भूस्खलन के कारण अभी संपर्क नहीं हो सका है। इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Trishuli-1 Power Project) पर काम कर रहे करीब 73 भारतीय कामगार और टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा पर गए विभिन्न राज्यों (तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल आदि) के तीर्थयात्री शामिल हैं।
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रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी: अब तक तमिलनाडु के 21 नागरिकों समेत 85 से अधिक भारतीय पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। रेस्क्यू किए गए कई भारतीयों को विशेष विमान से नई दिल्ली लाया जा चुका है।
नेपाल के रसुवा और भोटेकोशी क्षेत्र में कैसे आई इतनी भीषण तबाही?
नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित ऊंचे ग्लेशियर के ढहने और ल्हेंदे सहायक नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने के बाद अचानक सैलाब आ गया।
इस जलप्रलय ने सबसे पहले तिमुरे और रसुवागढ़ी के पास बुनियादी ढांचे, पुलों, सड़कों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में अब तक 450 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 1,400 से अधिक लोग घायल व विस्थापित हुए हैं। कई दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़कें बह जाने और टेलीकॉम टावर ठप होने के चलते संपर्क स्थापित करने में भारी मुश्किलें आ रही हैं।
'ऑपरेशन राहत': भारत ने नेपाल भेजी 47.5 टन आपातकालीन सहायता सामग्री
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना और पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता पहुंचाना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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राहत सामग्री की खेप: भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए अब तक 47.5 टन से अधिक आपातकालीन राहत सामग्री काठमांडू भेजी जा चुकी है।
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दवाएं और फूड पैकेट्स: इस मानवीय सहायता में 8 टन जरूरी जीवनरक्षक दवाएं, 1 टन तैयार खाद्य पैकेट्स, टेंट्स, सोलर लैंप्स और हाइजीन किट्स शामिल हैं।
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एनडीआरएफ अलर्ट पर: सीमावर्ती बिहार और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की कई टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत जमीनी बचाव कार्यों में उतारा जा सके।
विदेश मंत्रालय और दूतावासों ने जारी किए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर्स
नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन को देखते हुए नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में एक विशेष 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके साथ ही काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों ने प्रभावित नागरिकों और उनके परिजनों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
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भारतीय दूतावास, काठमांडू (नेपाल) हेल्पलाइन:
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फोन / व्हाट्सएप: +977 9851316807
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अतिरिक्त नंबर: +977 9709107500
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भारतीय दूतावास, बीजिंग (चीन) हेल्पलाइन:
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व्हाट्सएप / फोन: +86 18514284905
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नेपाल पर्यटन बोर्ड इमरजेंसी टोल-फ्री: 1234 | हॉटलाइन: 1144
विदेश मंत्रालय ने पीड़ितों के परिजनों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी जानकारी या सहायता के लिए सीधे आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करें। भारतीय अधिकारी लगातार नेपाल की सेना, पुलिस और चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर हर एक भारतीय की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित करने में जुटे हैं।
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