
अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) ने भारतीय मूल के एक 55 वर्षीय पूर्व टैक्सी ड्राइवर गुरमीत सिंह (Gurmeet Singh) की अमेरिकी नागरिकता आधिकारिक रूप से रद्द (Denaturalize) कर दी है। गुरमीत सिंह साल 2011 में न्यूयॉर्क में एक महिला यात्री के अपहरण और चाकू की नोक पर किए गए क्रूर बलात्कार (First-Degree Rape & Second-Degree Kidnapping) के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से 20 साल की कठोर जेल की सजा काट रहा है।
अमेरिकी अदालत ने पाया कि गुरमीत सिंह ने अमेरिकी नागरिकता (Naturalization) हासिल करने की कानूनी प्रक्रिया के दौरान अपने इस जघन्य अपराध को जानबूझकर छिपाया था और धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त की थी।
क्या था पूरा मामला? टैक्सी में सोई महिला का चाकू की नोक पर किया था रेप
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी आधिकारिक रिलीज और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यह खौफनाक वारदात मई 2011 में घटी थी। उस समय गुरमीत सिंह न्यूयॉर्क में टैक्सी चलाता था। विलियम्सबर्ग से ईस्ट विलेज जा रही एक युवा महिला यात्री सफर के दौरान टैक्सी में ही सो गई।
गुरमीत सिंह उसे किसी सुनसान जगह ले गया। जब पीड़िता की नींद खुली, तो उसने देखा कि गुरमीत उसके ऊपर बैठा था और उसके गले पर चाकू रखकर जान से मारने की धमकी दे रहा था। उसने पीड़िता के हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा, आंखों पर पट्टी बांधी और उसके कपड़े उतारकर उसके साथ दरिंदगी की। किसी तरह जान बचाकर पीड़िता सुबह के वक्त टैक्सी से भागी और सड़क पर जा रहे एक राहगीर से मदद मांगी।
नागरिकता की अर्जी में छिपाया अपराध, धोखाधड़ी से बना अमेरिकी नागरिक
इस भयानक वारदात को अंजाम देने के कुछ ही हफ्तों बाद गुरमीत सिंह ने अमेरिकी नागरिकता के लिए औपचारिकीकरण (Naturalization) की अर्जी दाखिल कर दी। उसने पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान अपने इस आपराधिक कृत्य को संघीय अधिकारियों से छुपाए रखा और 19 अक्टूबर 2011 को उसे धोखे से अमेरिकी नागरिकता मिल गई।
बाद में न्यूयॉर्क की अदालत में उस पर मुकदमा चला और 2014 में उसे फर्स्ट-डिग्री रेप और किडनैपिंग का दोषी पाते हुए 20 साल जेल की सजा सुनाई गई। वर्तमान में वह उल्स्टर काउंटी की शावांगंक जेल (Shawangunk Correctional Facility) में अपनी सजा भुगत रहा है।
16 सितंबर तक पासपोर्ट और नागरिकता सर्टिफिकेट सरेंडर करने का आदेश
अमेरिकी न्याय विभाग की सिविल डिवीजन ने इस साल 2 फरवरी को गुरमीत सिंह के खिलाफ डीनैचुरलाइजेशन (नागरिकता रद्द करने) का मुकदमा दायर किया था।
ब्रुकलिन स्थित ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के फेडरल जज निकोलस गारौफिस (Nicholas Garaufis) ने मामले की सुनवाई के बाद गुरमीत सिंह की नागरिकता को पूरी तरह रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गुरमीत सिंह को 16 सितंबर 2026 तक अपना अमेरिकी पासपोर्ट और नेचुरलाइजेशन सर्टिफिकेट अदालत के समक्ष सरेंडर करना होगा।
'धोखे से ली गई नागरिकता अपराधियों को न्याय से नहीं बचा सकती'
अमेरिकी न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट (Brett A. Shumate) ने कड़े शब्दों में कहा कि गुरमीत सिंह ने एक भयानक और घृणित अपराध को छिपाकर गैरकानूनी तरीके से अमेरिकी नागरिकता के विशेषाधिकार हासिल किए थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी न्याय विभाग देश की नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और जो भी व्यक्ति धोखाधड़ी या झूठ बोलकर नागरिकता हासिल करेगा, उसके खिलाफ कानून के तहत नागरिकता छीनने की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
1992 में भारत से अमेरिका पहुंचा था गुरमीत सिंह
गुरमीत सिंह पहली बार फरवरी 1992 में 6 महीने के अस्थायी टूरिस्ट वीजा पर भारत से अमेरिका गया था। वीजा अवधि खत्म होने के बाद वह कई सालों तक अवैध रूप से अमेरिका में रहा। बाद में उसके परिवार द्वारा दायर वीजा याचिका के जरिए जून 2000 में उसे परमानेंट रेजिडेंसी (ग्रीन कार्ड) मिली थी। अब अमेरिकी नागरिकता छिन जाने के बाद, 20 साल की जेल की सजा पूरी होने पर गुरमीत सिंह को वापस भारत डिपोर्ट (Deport) किए जाने की पूरी संभावना है।
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