
बिहार के संवेदनशील सीमावर्ती जिले किशनगंज में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक एक अमेरिकी युवती को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद हड़कंप मच गया है। 'चिकन नेक' (Siliguri Corridor) के बेहद करीब स्थित किशनगंज का रणनीतिक महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। ऐसे इलाके में बिना किसी स्पष्ट स्थानीय संपर्क या वैध स्थानीय अनुमति के विदेशी नागरिक, विशेषकर पश्चिमी देश की महिला की सक्रियता ने सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय बिहार पुलिस दोनों को सतर्क कर दिया।
घटना के सामने आते ही सुरक्षा महकमे में सवाल उठने लगे कि आखिर यह अमेरिकी नागरिक भारत के इस दूरदराज सीमांत इलाके में क्या कर रही थी और क्या वह अनाधिकृत रास्ते से सीमा पार करने की फिराक में थी। हालांकि, शुरुआती जांच के बाद मामले ने उस समय नाटकीय मोड़ ले लिया जब इस पूरे घटनाक्रम पर सीमा की निगहबानी कर रही एसएसबी और मामले की जांच कर रही किशनगंज जिला पुलिस के बयानों व दावों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिला।
एसएसबी का दावा: अवैध सीमा पार करने की फिराक में थी विदेशी नागरिक
सीमा की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (SSB) की बटालियन के जवानों ने गश्त के दौरान गलगलिया/पानीटंकी या उससे सटे सीमावर्ती चेकपोस्ट के पास इस अमेरिकी महिला को संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए पाया।
एसएसबी सूत्रों के अनुसार:
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महिला सीमा के उन संवेदनशील पिलर्स के बेहद नजदीक पहुंच चुकी थी, जहां बिना वैध कागजात और औपचारिक इमिग्रेशन स्टैंप के किसी भी तीसरे देश (Third-Country National) के नागरिक की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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भारत और नेपाल के नागरिकों के लिए खुली सीमा की व्यवस्था है, लेकिन विदेशी नागरिकों के लिए केवल तयशुदा अधिकृत लैंड इमिग्रेशन चेकपोस्ट (ICP) से ही पासपोर्ट और वीजा जांच के बाद प्रवेश या निकास की अनुमति होती है।
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एसएसबी का प्राथमिक संदेह था कि युवती अवैध रूप से सीमा पार कर नेपाल जाने या नेपाल के रास्ते भारत में अनाधिकृत प्रवेश करने की कोशिश कर रही थी। संदेह गहराने पर जवानों ने उसे रोककर पूछताछ की और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय थाने के हवाले कर दिया।
स्थानीय पुलिस का रुख: 'दस्तावेज मौजूद, पर अनजाने में पहुंची सीमांत क्षेत्र'
एसएसबी द्वारा सौंपे जाने के बाद जब किशनगंज पुलिस और स्थानीय खुफिया शाखा ने महिला से विस्तृत पूछताछ की और उसके सामान की तलाशी ली, तो पुलिस का पक्ष काफी अलग नजर आया:
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वैध पासपोर्ट और भारत का वीजा: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान अमेरिकी युवती के पास से उसका मूल अमेरिकी पासपोर्ट और भारत सरकार द्वारा जारी वैध वीजा बरामद हुआ। यानी भारत में उसकी मौजूदगी कानूनी रूप से अवैध नहीं थी।
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भाषा और रूट की गलतफहमी: पुलिस की पूछताछ में युवती ने दावा किया कि वह भारत में पर्यटन और सांस्कृतिक अध्ययन के सिलसिले में आई थी। दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी या उत्तर-पूर्व के किसी हिस्से की यात्रा के दौरान सार्वजनिक वाहन या टैक्सी की गलत दिशा के चलते वह अनजाने में सीमावर्ती ग्रामीण इलाके में पहुंच गई।
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नेपाल जाने के नियमों से अनभिज्ञता: पुलिस का कहना है कि कई बार विदेशी सैलानियों को यह गलतफहमी होती है कि जैसे भारतीय और नेपाली नागरिक बिना वीजा सीमा पार चले जाते हैं, वैसे वे भी पैदल जा सकते हैं। युवती के पास से कोई आपत्तिजनक उपकरण, संदिग्ध नक्शा या जासूसी से जुड़ा सामान नहीं मिला।
एसएसबी और पुलिस के दावों में कहां फंसा पेच?
इस पूरे मामले में दोनों एजेंसियों के दावों में जो अंतर सामने आया है, उसने कई सवाल खड़े किए हैं:
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घुसपैठ का प्रयास बनाम अनजाने में भटकाव: एसएसबी जहां इसे सीमा सुरक्षा प्रोटोकॉल का जानबूझकर किया गया उल्लंघन और 'संदेहास्पद घुसपैठ' की कोशिश मान रही थी, वहीं स्थानीय पुलिस इसे केवल विदेशी पर्यटक की 'दिशा भ्रम और अनभिज्ञता' (Route Confusion) का साधारण मामला बता रही है।
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इमिग्रेशन क्लीयरेंस की प्रक्रिया: यदि महिला के पास वैध दस्तावेज थे, तो उसने बागडोगरा या पानीटंकी के अधिकृत इमिग्रेशन काउंटर पर जाने के बजाय सुनसान सीमावर्ती पगडंडी का रुख क्यों किया? इस बिंदु पर सुरक्षा एजेंसियां अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
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संवेदनशील कॉरिडोर की संवेदनशीलता: किशनगंज और सिलीगुड़ी कॉरिडोर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (नेपाल, बांग्लादेश और भूटान) से घिरा हुआ है। ऐसे क्षेत्र में किसी भी विदेशी का अनाधिकृत आवागमन सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का सबब होता है, जिसके चलते एसएसबी कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती थी।
खुफिया एजेंसियां अलर्ट: दूतावास को भेजी जा रही रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय खुफिया एजेंसियां (IB) और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) भी हरकत में आ गए हैं। पुलिस ने महिला के पासपोर्ट, वीजा की वैधता और भारत में उसके पिछले यात्रा इतिहास (Travel History) की पुष्टि के लिए संबंधित दूतावास और आव्रजन विभाग से संपर्क साधा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी सुरक्षा एजेंसियों से ग्रीन सिग्नल नहीं मिल जाता और उसके बयानों का भौतिक सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक औपचारिक औपचारिकताएं पूरी की जाती रहेंगी। यदि किसी भी स्तर पर सुरक्षा नियमों का जानबूझकर उल्लंघन पाया जाता है, तो फॉरेनर्स एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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