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PIA का नया लुक देख भड़के लोग: ‘यूनिफॉर्म नहीं पहले प्लेन ठीक करो’, एयरलाइन की रीब्रांडिंग पर फूटा गुस्सा

लगातार गहराते गंभीर आर्थिक संकट, भारी कर्ज के बोझ और तकनीकी बदहाली से जूझ रही पाकिस्तान की राष्ट्रीय विमानन कंपनी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने अपनी खराब वैश्विक छवि को चमकाने के लिए एक नया कॉस्मेटिक दांव खेला है। एयरलाइन प्रबंधन ने अपने केबिन क्रू के लिए बिल्कुल नए और आधुनिक डिजाइनों वाली यूनिफॉर्म का अनावरण किया है। एयरलाइन का दावा था कि इस मेकओवर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रियों के बीच एक नया और सकारात्मक संदेश जाएगा, लेकिन इसका परिणाम ठीक उल्टा नजर आ रहा है। सोशल मीडिया से लेकर विमानन गलियारों तक इस कदम का जमकर उपहास उड़ाया जा रहा है। आम नागरिक, लगातार यात्रा करने वाले यात्री और डिजिटल यूजर्स एयरलाइन को उसकी जमीनी हकीकत याद दिला रहे हैं। लोगों का कहना है कि जहां एक तरफ एयरलाइन के पास अपने पुराने और खटारा हो चुके जहाजों के उचित रखरखाव के पैसे नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ फिजूलखर्ची करके केवल कर्मचारियों के कपड़े बदलना बेहद हास्यास्पद और गैर-जिम्मेदाराना कदम है।

उड़ानों में भारी कटौती और अंतरराष्ट्रीय रूट्स बंद: तंगहाली के दौर में रीब्रांडिंग का तमाशा

यह नई यूनिफॉर्म ऐसे समय में सामने आई है जब पीआईए इतिहास के सबसे नाजुक वित्तीय दौर से गुजर रही है। हालांकि एयरलाइन ने हाल ही में अपने बेड़े में तीन नए विमानों को शामिल करने का दावा किया है, लेकिन इन जहाजों के संचालन का खर्च उठाना भी प्रबंधन के लिए भारी पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी जेट ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों और वित्तीय घाटे की भरपाई करने के नाम पर एयरलाइन ने आम मुसाफिरों को मिलने वाली सभी रियायतों और किराए में छूट को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े तनाव और इसके चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों का बहाना बनाकर पीआईए ने दर्जनों उड़ानों की संख्या घटा दी है और कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अपना परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया है। ईंधन और स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण उड़ानों के लगातार रद्द होने से परेशान यात्रियों का कहना है कि जब एयरलाइन अपनी बुनियादी सेवाएं ही नहीं दे पा रही है, तो कपड़ों के रंग बदलने से कंपनी का दिवालियापन छिपने वाला नहीं है।

टॉप फैशन डिजाइनरों का लगा मजमा: फॉरेस्ट ग्रीन और ग्रे-ब्लू रंगों में सजी नई पोशाकें

इस्लामाबाद में आयोजित एक भव्य और औपचारिक कार्यक्रम के दौरान इस नई यूनिफॉर्म को सार्वजनिक मंच पर पेश किया गया। पीआईए प्रबंधन ने गर्व से यह प्रचारित किया कि इस नए परिधान संग्रह को तैयार करने के लिए पाकिस्तान के शीर्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त फैशन डिजाइनरों का एक पूरा पैनल शामिल किया गया था। इस पैनल में माहिन खान, दीपक और फहाद, जेनरेशन, इस्माइल फरीद, मुनीब नवाज, दीपक परवानी, फराज मनन, आमिर अदनान, एचएसवाई (HSY) और नोमी अंसारी जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इन डिजाइनरों ने मिलकर एयरलाइन के पारंपरिक रूप को आधुनिक टच देने के लिए दो मुख्य रंगों का संयोजन चुना, जिसमें गहरा फॉरेस्ट ग्रीन और हल्का ग्रे-ब्लू रंग शामिल है। पुरुष फ्लाइट अटेंडेंट्स के लिए बेहतरीन फिटिंग वाली फॉर्मल जैकेट, टेलर्ड ट्राउजर और विशेष पैटर्न वाली टाई तैयार की गई है, जबकि महिला क्रू मेंबर्स के लिए मैचिंग ट्राउजर के ऊपर एक स्मार्ट फिटेड वेस्टकोट, नफासत भरा डिजाइनर स्कार्फ और मैचिंग कैप शामिल की गई है।

पूरे एक दशक बाद हुआ मेकओवर, लेकिन सोशल मीडिया पर फूटा मुसाफिरों का गुस्सा

लगभग दस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पीआईए के फ्लाइट क्रू का यह मेकओवर किया गया है। एयरलाइन को उम्मीद थी कि इस दशक भर पुराने बदलाव की सोशल मीडिया पर सराहना होगी, लेकिन आधिकारिक फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पेजों पर प्रतिक्रियाओं की ऐसी बाढ़ आई जिसने एयरलाइन के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। पीआईए की फेसबुक पोस्ट पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा कि केवल कपड़े बदलने से एयरलाइन का दर्जा नहीं बढ़ जाता, अगर वाकई छवि सुधारनी है तो एमिरेट्स या कतर एयरवेज जैसी बड़ी खाड़ी एयरलाइंस की तरह काबिल और अंतरराष्ट्रीय प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखना शुरू करें। एक अन्य निराश यात्री ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा कि क्रू की यूनिफॉर्म पर पानी की तरह पैसा बहाने से पहले अपने कबाड़ हो चुके प्लेन सुधारें, कैबिन की सफाई और सर्विस की क्वालिटी पर ध्यान दें, कस्टमर केयर का रवैया बदलें और स्टाफ को प्रोफेशनलिज्म सिखाएं।

'यूनिफॉर्म नहीं, स्टाफ की सोच और सर्विस ठीक करो': यात्रियों ने गिनाईं बुनियादी कमियां

विमानन विशेषज्ञों और सोशल मीडिया टिप्पणीकारों का मानना है कि पीआईए की सबसे बड़ी समस्या उसका ढांचागत भ्रष्टाचार, बदइंतजामी, कर्मचारियों की लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप है, जिसका समाधान किसी महंगे डिजाइनर के बनाए सूट या वेस्टकोट से नहीं निकल सकता। कई नियमित यात्रियों ने टिप्पणी की कि एयरलाइन के पुराने बोइंग और एयरबस विमानों में सीटें टूटी रहती हैं, इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट स्क्रीन काम नहीं करतीं, वॉशरूम बेहद गंदे होते हैं और फ्लाइट्स अक्सर बिना पूर्व सूचना के घंटों लेट हो जाती हैं। यात्रियों का कहना है कि स्टाफ का यात्रियों के प्रति बर्ताव बेहद उपेक्षापूर्ण और गैर-पेशेवर रहता है, जिसे बदलने के लिए कड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम और बुनियादी सुधारों की जरूरत है, न कि फैंसी फोटो शूट की। इंटरनेट पर लोग यह सलाह देते नहीं थक रहे कि पीआईए को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और खोखले दिखावे को छोड़कर विमानों की सुरक्षा, तकनीकी विश्वसनीयता और समय की पाबंदी सुनिश्चित करने पर अपना पूरा ध्यान लगाना चाहिए।