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Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, पूर्वजों के आगमन से पहले आज ही घर से बाहर निकाल फेंकें ये 4 अशुभ चीजें

सनातन धर्म परंपरा में पितृ पक्ष यानी श्राद्ध पक्ष की 16 दिनों की अवधि पूर्वजों, कुलदेवताओं और पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पावन कालखंड मानी जाती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष 26 सितंबर से पितृ पक्ष का शुभारंभ हो रहा है, जो आश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या तक चलेगा। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन 16 दिनों में पितर सूक्ष्म रूप में अपने वंशजों के घरों में पधारते हैं और उनकी निष्ठा, सेवा भाव व सात्विकता को देखकर तृप्त होते हैं।

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि जिस घर में गंदगी, नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष का वास होता है, वहां पितर देव अप्रसन्न होकर बिना आशीर्वाद दिए लौट जाते हैं, जिससे जीवन में 'पितृ दोष' (Pitru Dosh) की स्थिति उत्पन्न होती है। अतः 26 सितंबर को पितृ पक्ष शुरू होने से पहले घर की गहन साफ-सफाई के साथ-साथ इन 4 अशुभ और नकारात्मक वस्तुओं को तुरंत बाहर कर देना चाहिए ताकि पूर्वजों की असीम कृपा प्राप्त हो सके।

1. Broken Mirrors and Cracked Glassware: टूटे शीशे और दरके कांच के बर्तन

घर में किसी भी कोने में रखा चटका या टूटा हुआ दर्पण (Mirror), खिड़की का टूटा कांच या दरार पड़े हुए क्रॉकरी/कांच के बर्तन भारी वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं।

  • दोष का कारण: वास्तु शास्त्र में दर्पण और कांच को राहु और ऊर्जा के परावर्तन (Reflection) का कारक माना गया है। टूटे हुए दर्पण से निकलने वाली नकारात्मक तरंगे घर के मानसिक वातावरण को दूषित करती हैं।

  • पितृ पक्ष पर असर: मान्यता है कि खंडित वस्तुओं की उपस्थिति से घर में 'शोक ऊर्जा' का संचार होता है। जब पितर घर में प्रवेश करते हैं, तो ऐसी नकारात्मक ऊर्जा उन्हें अशांत करती है। इसलिए घर में पड़े किसी भी टूटे हुए शीशे या चटके बर्तनों को आज ही बाहर का रास्ता दिखाएं।

2. Broken Idols and Torn Religious Pictures: खंडित मूर्तियां और फटी तस्वीरें

अक्सर पूजा घर या घर के किसी कोने में भगवान की टूटी हुई मूर्तियां, दरके हुए शिवलिंग या पुरानी व फटी हुई धार्मिक तस्वीरें रखी रह जाती हैं।

  • शास्त्रसम्मत नियम: किसी भी खंडित मूर्ति की पूजा करना या उसे घर में सहेज कर रखना शास्त्रों में निषेध माना गया है। खंडित मूर्ति से प्राण-ऊर्जा समाप्त हो जाती है और वह वास्तु दोष का केंद्र बन जाती है।

  • विसर्जन विधि: पितृ पक्ष शुरू होने से पहले पूजा स्थल की संपूर्ण शुद्धि करें। यदि कोई प्रतिमा खंडित हो गई है या तस्वीर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, तो उसे आदरपूर्वक किसी पवित्र नदी, बहते जल में प्रवाहित कर दें या किसी पीपल के वृक्ष की जड़ के समीप साफ कपड़े में लपेटकर विसर्जित कर दें।

3. Stopped Clocks and Non-Working Electronics: बंद पड़ी घड़ियां और कबाड़ इलेक्ट्रॉनिक्स

दीवार पर टंगी बंद घड़ी, टेबल पर रखा रुका हुआ टाइमपीस या बरसों से ड्रॉर में पड़ा खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में समय की प्रगति को अवरुद्ध करता है।

  • ऊर्जा अवरोध: ज्योतिष और वास्तु में घड़ी को कालचक्र और जीवन की प्रगति का प्रतीक माना गया है। बंद घड़ी घर में दुर्भाग्य, अकर्मण्यता और आर्थिक गतिरोध लाती है।

  • कबाड़ का निस्तारण: यदि घड़ी की बैटरी खत्म हो गई है, तो तुरंत नया सेल लगाएं और उसे चालू करें। यदि वह पूरी तरह खराब हो चुकी है या कोई पुराना इलेक्ट्रॉनिक उपकरण केवल जगह घेर रहा है, तो उसे कबाड़ में निकाल दें। पितृ पक्ष में घर का हर कोना गतिशील और स्वच्छ ऊर्जा से युक्त होना चाहिए।

4. Old Footwear, Torn Mattresses and Dirty Clutter: फटे-पुराने जूते-चप्पल और फटे गद्दे

घर के मुख्य द्वार पर या सीढ़ियों के नीचे बिखरे हुए पुराने घिसे जूते-चप्पल, टूटी चप्पलें, फटे-पुराने कंबल और गद्दे शनि और दरिद्रता की नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं।

  • मुख्य द्वार की शुद्धि: पितरों का आगमन घर के मुख्य द्वार (Main Entrance) से माना जाता है। यदि मुख्य द्वार पर टूटे जूते-चप्पल या कूड़े-कबाड़ का अंबार लगा रहेगा, तो यह पितरों का अनादर माना जाता है।

  • संस्कार और नियम: अनुपयोगी, फटे जूते-चप्पलों को तुरंत फेंकें और मुख्य द्वार को गंगाजल मिले पानी से पोंछकर स्वच्छ बनाएं। फटे-पुराने और बदबूदार बिस्तरों को हटाकर घर में साफ, धुले और सुगंधित वस्त्रों का ही उपयोग करें।

Pitru Paksha Shuddhi Rules: 26 सितंबर से पहले इन बातों का भी रखें ध्यान

नकारात्मक वस्तुओं को हटाने के साथ-साथ पितृ पक्ष के स्वागत के लिए घर में कुछ सात्विक परंपराओं का पालन अवश्य करना चाहिए:

  • गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव: पूरे घर में, विशेषकर रसोई, पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर गंगाजल और थोड़ा गोमूत्र मिलाकर छिड़कें। इससे वातावरण पूर्णतः कीटाणु-मुक्त और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है।

  • कपूर और गूगल की धूप: घर में प्रतिदिन संध्या समय कपूर, लौंग और शुद्ध गूगल की धूप दिखाएं। इसकी सुगंध से नकारात्मक जीवाणु और सूक्ष्म दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

  • ईशान और दक्षिण दिशा का संतुलन: घर की दक्षिण दिशा यम और पितरों की मानी जाती है। इस दिशा को हमेशा भारी और साफ रखें, जबकि उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को पूरी तरह हल्का और स्वच्छ रखें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह बना रहे।

समय रहते इन अवांछित वस्तुओं को घर से बाहर कर आप अपने घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं, जिससे 26 सितंबर से शुरू हो रहे पितृ पक्ष में पितरों का आशीर्वाद पूरे परिवार पर सुख-शांति और समृद्धि बनकर बरसेगा।