
फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर से जुड़ा विवाद इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। हाल ही में इस बात को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था कि भारतीय संस्था से जुड़े लोगों के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को वहां से कथित तौर पर हटाया गया था। अब इस पूरे मामले में बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम) स्वामीनारायण संस्था की तरफ से आधिकारिक बयान सामने आया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि उनकी तरफ से किसी भी महिला कर्मचारी को हटाने या अलग-थलग करने का कोई अनुरोध नहीं किया गया था और जांच में भी यह बात पूरी तरह साबित हो चुकी है।
क्या था पूरा मामला और क्यों हुई थी हड़ताल?
बीते महीने पेरिस के ऐतिहासिक एफिल टावर पर एक अजीब स्थिति देखने को मिली थी, जब वहां के कर्मचारियों ने अचानक हड़ताल कर दी थी। कर्मचारियों का आरोप था कि बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था से जुड़े लगभग 100 लोगों के एक समूह ने जब एफिल टावर का दौरा किया, तो उस दौरान कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र से हटा दिया गया था। इस विरोध प्रदर्शन और हड़ताल के चलते पर्यटकों के लिए एफिल टावर को एहतियात के तौर पर एक दिन के लिए पूरी तरह बंद रखना पड़ा था, जिससे प्रशासन में भी हड़कंप मच गया था।
संस्था ने आरोपों को नकारा, कहा- जांच में साबित हुई सच्चाई
इस पूरी घटना के तूल पकड़ने के बाद बीएपीएस पेरिस की ओर से एक स्पष्ट बयान जारी किया गया है। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे शुरुआत से ही यह बात लगातार कहते आ रहे हैं कि उनकी तरफ से कभी भी किसी भी महिला कर्मचारी को छिपाने, हटाने या अलग-थलग करने का कोई अनुरोध नहीं किया गया था। संस्था का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की गई है, जिससे यह साफ तौर पर साबित होता है कि आगंतुकों के आवागमन के मार्ग पर महिलाओं को अलग करने या हटाने से जुड़ा कोई भी निर्देश उनकी तरफ से नहीं दिया गया था। इस सफाई के बाद अब इस विवाद पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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