Monday , October 12 2026

20 साल छोटी इस टॉप एक्ट्रेस संग लिव-इन में रहे थे नाना पाटेकर, कैमरे के सामने दिए थे बेहद बोल्ड और इंटेंस सीन; फिर एक रात ऐसे हुआ दर्दनाक अंत

बॉलीवुड इंडस्ट्री में यूं तो प्रेम कहानियों और ब्रेकअप के अनगिनत किस्से मशहूर हैं, लेकिन 90 के दशक में एक ऐसा रिश्ता परवान चढ़ा था जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। यह कहानी थी अपने संजीदा, तीखे और बेबाक अभिनय के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर और उस दौर की सबसे खूबसूरत व कामयाब अभिनेत्रियों में शुमार मनीषा कोइराला की। उम्र में लगभग 20 वर्ष का भारी फासला होने के बावजूद दोनों के बीच पनपे गहरे आकर्षण, प्यार और बाद में टूटे रिश्ते ने फिल्मी पत्रिकाओं के पन्नों पर सालों तक राज किया। दोनों का रिश्ता केवल दोस्ती या अफेयर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों ने कुछ समय तक एक साथ रहकर लिव-इन रिलेशनशिप भी बिताया था। उस दौर में जब बड़े पर्दे पर ज्यादा बोल्डनेस दिखाने से सितारे कतराते थे, तब इन दोनों ने कैमरे के सामने बेहद आक्रामक, भावुक और इंटीमेट सीन्स देकर दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों को भी दंग कर दिया था।

फिल्म 'अग्नि साक्षी' के सेट पर जगी थी दोनों के बीच मोहब्बत की चिंगारी

साल 1996 में रिलीज हुई निर्देशक पार्थो घोष की साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 'अग्नि साक्षी' हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक साबित हुई थी। इस फिल्म में नाना पाटेकर ने एक जुनूनी, सनकी और अपनी पत्नी पर हक जताने वाले पति 'विश्वनाथ' का किरदार निभाया था, जबकि मनीषा कोइराला उनकी प्रताड़ित पत्नी 'शिवांगी' की भूमिका में थीं। फिल्म की पटकथा जितनी आक्रामक और तनावपूर्ण थी, कैमरे के सामने दोनों की अदाकारी उतनी ही जीवंत थी। कहानी की मांग के अनुसार दोनों कलाकारों ने बिना किसी हिचकिचाहट के कई बेहद इंटेंस, भावुक और क्लोज इंटीमेट सीन्स शूट किए थे। शूटिंग के दौरान ही दोनों के बीच की ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री परवान चढ़ने लगी थी। नाना पाटेकर का रौबदार व्यक्तित्व और मनीषा की मासूमियत ने दोनों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया और देखते ही देखते यह पेशेवर रिश्ता एक गंभीर प्रेम संबंध में तब्दील हो गया।

लिव-इन रिलेशनशिप और दोनों के स्वाभाव का जटिल तालमेल

फिल्म 'अग्नि साक्षी' के बाद यह रिश्ता सिर्फ सेट तक सीमित नहीं रहा। 90 के दशक की प्रमुख फिल्मी पत्रिकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। नाना पाटेकर उस समय अपनी पत्नी नीलकांति से अलग रह रहे थे, हालांकि उनका कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ था। मनीषा कोइराला अक्सर नाना के घर पर समय बिताती थीं और दोनों सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी एक-दूसरे की मौजूदगी को छिपाते नहीं थे। नाना पाटेकर का स्वभाव बेहद सादगी पसंद, जमीन से जुड़ा और थोड़ा गुस्से वाला था, वहीं मनीषा शाही नेपाली परिवार से ताल्लुक रखती थीं और उनकी जीवनशैली बेहद ग्लैमरस थी। इसके बावजूद दोनों का प्यार इतना गहरा था कि नाना पाटेकर ने एक बार एक साक्षात्कार में मनीषा की तारीफ करते हुए कहा था कि वह इतनी संवेदनशील और मासूम हैं कि अगर कोई रो दे तो वह भी रोने लगती हैं।

जब शादी की जिद और तीसरी अभिनेत्री के आने से टूट गया रिश्ता

हर प्रेम कहानी की तरह इस रिश्ते में भी एक ऐसा मोड़ आया जिसने सब कुछ तबाह कर दिया। मनीषा कोइराला नाना पाटेकर के साथ अपने रिश्ते को एक मुकम्मल नाम देना चाहती थीं और उनसे शादी करने की ख्वाहिश रखती थीं। लेकिन नाना पाटेकर पहले से शादीशुदा थे और अपनी पत्नी को औपचारिक तलाक देने के लिए तैयार नहीं थे। इसी बीच बॉलीवुड गलियारों में यह खबर तेजी से फैली कि नाना पाटेकर की नजदीकियां फिल्म 'आंच' की शूटिंग के दौरान अभिनेत्री आयशा जुल्का के साथ भी बढ़ने लगी हैं। इस बात को लेकर मनीषा और नाना के बीच तीखे विवाद और मतभेद शुरू हो गए। रिपोर्ट्स के अनुसार एक दिन मनीषा ने नाना पाटेकर और आयशा जुल्का को एक साथ देख लिया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ और मनीषा ने इस रिश्ते से हमेशा-हमेशा के लिए अपने कदम पीछे खींच लिए। दोनों का लिव-इन रिश्ता एक कड़वे मोड़ पर आकर बिखर गया।

ब्रेकअप के बावजूद पेशेवर मर्यादा: पर्दे पर बने पिता और बेटी

रिश्ते में आई भारी कड़वाहट और दिल टूटने के बावजूद दोनों कलाकारों ने कभी अपनी निजी जिंदगी को काम के आड़े नहीं आने दिया। उसी दौर में जब दोनों के ब्रेकअप की खबरें गर्म थीं, निर्देशक संजय लीला भंसाली ने दोनों को अपनी क्लासिक फिल्म 'खामोशी: द म्यूजिकल' (1996) में कास्ट किया। इस फिल्म में दोनों ने प्रेमी-प्रेमिका नहीं, बल्कि मूक-बधिर माता-पिता और बेटी का किरदार निभाया। नाना पाटेकर ने जोसेफ ब्रागांजा (पिता) और मनीषा ने एनी (बेटी) की भूमिका में ऐसा कालजयी अभिनय किया जिसे आज भी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन सिनेमाई प्रदर्शनों में गिना जाता है। सेट पर दोनों ने एक-दूसरे के साथ पूरी पेशेवर गरिमा बनाए रखी और अपने निजी दर्द को शानदार अभिनय के पीछे छिपा लिया।

आज भी याद किया जाता है 90 के दशक का वो तूफानी अफेयर

समय बीतने के साथ दोनों की राहें पूरी तरह अलग हो गईं। मनीषा कोइराला ने बाद में अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात दी और वेब सीरीज 'हीरामंडी' के जरिए एक बार फिर अपने अभिनय का परचम लहराया। वहीं नाना पाटेकर ने भी फिल्मों के साथ-साथ समाज सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्षों बाद भी जब कभी दोनों से एक-दूसरे के बारे में पूछा जाता है, तो दोनों ने कभी भी एक-दूसरे पर कीचड़ नहीं उछाला, बल्कि एक-दूसरे की अदाकारी और प्रतिभा का सम्मान ही किया। 90 के दशक का यह रिश्ता आज भी बॉलीवुड के इतिहास में सबसे चर्चित, तीव्र और अधूरा रह जाने वाला प्रेम अध्याय माना जाता है।