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विदेशी बाजारों में सोना-चांदी में अचानक क्यों आई जोरदार तेजी? जानिए कॉमेक्स पर उछाल और घरेलू सराफा बाजार पर असर के 5 बड़े कारण

वैश्विक वित्तीय बाजारों और कमोडिटी एक्सचेंजों में एक बार फिर कीमती धातुओं (Precious Metals) की चमक बढ़ गई है। अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) और लंदन बुलियन मार्केट में सोने और चांदी के वायदा भाव में मजबूती दर्ज की गई है। विदेशी बाजारों में सोना चढ़कर 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है, जबकि चांदी में भी 61 डॉलर प्रति औंस के पार मजबूत बढ़त देखी गई है। वैश्विक संकेतों का सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और स्थानीय सराफा बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है, जहां त्योहारी सीजन के बीच कीमतों को सहारा मिला है। कमोडिटी विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी किसी एक तात्कालिक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं।

तेजी के पीछे की 5 मुख्य वजहें: क्यों बुलियन की ओर भाग रहे हैं निवेशक?

विदेशी बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में आई इस ताजा बढ़त के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (Safe-Haven Demand): पश्चिम एशिया में स्थिरता को लेकर बनी अनिश्चितता, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के व्यापारिक मार्ग पर गतिरोध और सऊदी अरब के ठिकानों पर हुए हमलों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। जब भी युद्ध या वैश्विक अशांति की आशंका गहराती है, तो संस्थागत और खुदरा निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों (जैसे शेयर बाजार) से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe-Haven Assets) में निवेश करते हैं।

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरें: अमेरिकी रोजगार के नरम आंकड़ों और आर्थिक संकेतकों के बाद बाजार यह मानकर चल रहा है कि यूएस फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करने से बचेगा या नीतिगत रुख को लचीला बनाए रखेगा। सोने पर कोई निश्चित ब्याज या यील्ड (Yield) नहीं मिलता। ऐसे में जब ब्याज दरें स्थिर या घटने की दिशा में बढ़ती हैं और बॉन्ड यील्ड्स नरम पड़ती हैं, तो गैर-उपज वाली धातु सोना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाता है।

  • डॉलर इंडेक्स में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में आई नरमी ने विदेशी खरीदारों के लिए सोने-चांदी को सस्ता बना दिया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के कमजोर होते ही अन्य मुद्राओं वाले देशों में मांग स्वतः बढ़ जाती है, जिससे वैश्विक कीमतों में उछाल आता है।

  • सप्लाई की कमी और चांदी की भारी औद्योगिक मांग: सोने के उलट चांदी की तेजी में उसका दोहरा चरित्र (Monetary + Industrial) काम कर रहा है। सोलर पैनल्स, 5G इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है। इसके विपरीत, नई खदानों से उत्पादन सीमित होने के चलते चांदी का बाजार लगातार आपूर्ति घाटे (Supply Deficit) का सामना कर रहा है, जिससे कीमतों को भारी सपोर्ट मिल रहा है।

  • ग्लोबल सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (विशेषकर चीन, रूस, भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं) अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े पैमाने पर फिजिकल सोने की खरीद कर रहे हैं। यह संस्थागत मांग सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत बेस का काम कर रही है।

भारतीय बाजार और त्योहारी खरीदारी पर क्या होगा सीधा असर?

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है और अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहता है। इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव बढ़ते हैं, तो आयात लागत (Landed Cost) बढ़ने से घरेलू सराफा बाजारों में भी गहनों और सिक्कों के दाम बढ़ जाते हैं।

  1. धनतेरस और दिवाली की मांग: नवरात्रि के बाद अब धनतेरस और दीपावली का शुभ मुहूर्त नजदीक है। भारतीय परंपरा में इस समय सोना-चांदी खरीदना अत्यधिक शुभ माना जाता है। मजबूत त्योहारी मांग के चलते स्थानीय ज्वैलर्स पहले से ही स्टॉक जुटाने में लगे हैं, जिससे कीमतों को और गति मिल रही है।

  2. रुपये की विनिमय दर का प्रभाव: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर आयातित सोने के मूल्य पर पड़ता है। यदि रुपया दबाव में रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में घरेलू बाजार में तेजी का असर और अधिक तीव्र दिखाई देता है।

निवेशकों और आम खरीदारों के लिए आगे की रणनीति

कमोडिटी एक्सपर्ट्स की सलाह है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में सोने-चांदी में एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से (SIP या डिप्स पर) खरीदारी करना समझदारी भरा फैसला होगा। शादियों और त्योहारों के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हॉलमार्क (HUID) देखकर ही खरीदारी करें और बिल में मेकिंग चार्ज व जीएसटी का स्पष्ट ब्योरा जांचें। अल्पावधि में भले ही मुनाफावसूली या भू-राजनीतिक बयानों के आधार पर कीमतों में मामूली करेक्शन देखने को मिले, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में मजबूत फंडामेंटल्स, औद्योगिक मांग और सेंट्रल बैंकों की खरीद सोने-चांदी के रुझान को सकारात्मक बनाए रखने का संकेत दे रही है।