Friday , October 23 2026

मेडिकल इंटर्न्स को जम्मू-कश्मीर सरकार का बड़ा तोहफा: स्टाइपेंड ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह, आदेश जारी

जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे युवा डॉक्टरों और इंटर्न्स के लिए बेहद बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने मेडिकल इंटर्न्स के मासिक स्टाइपेंड में दोगुने से भी अधिक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी करने का आधिकारिक फैसला ले लिया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग (H&ME) द्वारा जारी किए गए नए सरकारी आदेश के तहत अब इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों को हर महीने महज ₹12,300 की जगह सीधे ₹25,000 का मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा। लंबे समय से कम स्टाइपेंड, बढ़ती महंगाई और 24-24 घंटे की कठिन इमरजेंसी ड्यूटी को लेकर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन और छात्र संगठन स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की गुहार लगा रहे थे। सरकार के इस सकारात्मक कदम से न केवल इंटर्न्स की आर्थिक चिंताएं दूर होंगी, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में सेवाएं दे रहे भावी डॉक्टरों का मनोबल भी कई गुना बढ़ेगा।

सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के सभी इंटर्न्स को मिलेगा लाभ

जम्मू-कश्मीर प्रशासन के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव) द्वारा इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना और प्रशासनिक मंजूरी जारी कर दी गई है। इस नए आदेश का सीधा फायदा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) श्रीनगर, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू के साथ-साथ बारामूला, अनंतनाग, राजौरी, कठुआ और डोडा जैसे नए स्थापित सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) इंटर्न्स को मिलेगा। इसके अलावा, सरकारी डेंटल कॉलेजों के बीडीएस (BDS) इंटर्न्स को भी इस बढ़ी हुई स्टाइपेंड नीति के दायरे में शामिल किया गया है। वर्तमान में इन संस्थानों से हर साल सैकड़ों युवा छात्र अपनी एमबीबीएस और बीडीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं उत्तीर्ण कर एक साल की अनिवार्य रोटेटरी रेजिडेंशियल इंटर्नशिप पूरी करते हैं। अब इन सभी इंटर्न्स के खातों में हर महीने ₹25,000 की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी।

₹12,300 के पुराने ढांचे से क्यों परेशान थे युवा डॉक्टर?

एमबीबीएस पाठ्यक्रम का अंतिम वर्ष पास करने के बाद इंटर्न डॉक्टरों को अस्पतालों की रीढ़ माना जाता है। वार्ड राउंड्स, ओपीडी (OPD), इमरजेंसी ड्यूटी, माइनर सर्जरी, ट्रॉमा केयर और नाइट शिफ्ट जैसी सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां इन्हीं इंटर्न्स के कंधों पर होती हैं। कई बार इन्हें बिना रुके 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। लेकिन इतने कठिन परिश्रम के बावजूद उन्हें केवल ₹12,300 प्रति माह का मामूली मानदेय मिल रहा था, जो पड़ोसी राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा या हिमाचल प्रदेश) और केंद्रीय संस्थानों (जैसे एम्स) के मुकाबले काफी कम था। हॉस्टल का खर्च, किताबों का खर्च, नीट-पीजी (NEET PG) की तैयारी और रोजमर्रा के खान-पान की महंगाई के बीच युवा डॉक्टरों के लिए यह रकम बेहद नाकाफी साबित हो रही थी। छात्रों ने कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापनों के जरिए प्रशासन का ध्यान इस विसंगति की ओर खींचा था, जिस पर अब उपराज्यपाल प्रशासन और वित्त विभाग ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

बजट में अलग से किया गया वित्तीय प्रावधान: तुरंत प्रभाव से लागू

स्टाइपेंड को ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 यानी 100 फीसदी से अधिक करने से केंद्र शासित प्रदेश के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ना स्वाभाविक था। इसी वजह से यह फाइल काफी समय से विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक समीक्षाओं के दौर से गुजर रही थी। स्वास्थ्य विभाग ने वित्त विभाग के साथ मिलकर इसका पूरा वित्तीय खाका तैयार किया और चालू वित्तीय वर्ष के बजट में इस मद के लिए आवश्यक अतिरिक्त फंड का प्रावधान सुनिश्चित किया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़े हुए स्टाइपेंड के भुगतान में कोई फंड संकट नहीं आने दिया जाएगा और सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपल्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे संशोधित दरों के अनुसार इंटर्न्स के बिल तैयार कर जल्द से जल्द नियमित भुगतान सुनिश्चित करें।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और डॉक्टरों के मनोबल पर सकारात्मक असर

चिकित्सा विशेषज्ञों और वरिष्ठ डॉक्टरों का मानना है कि इस निर्णय का दूरगामी असर जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देगा। जब किसी जूनियर डॉक्टर को उसके बुनियादी जीवनयापन के लिए सम्मानजनक मानदेय मिलता है, तो वह आर्थिक तनाव से मुक्त होकर पूरी लगन से मरीजों के इलाज और क्लिनिकल ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर पाता है। सुदूर और पहाड़ी जिलों (जैसे किश्तवाड़, पुंछ, कुपवाड़ा और डोडा) के जिला अस्पतालों व नए मेडिकल कॉलेजों में जहां अनुभवी डॉक्टरों की कमी रहती है, वहां ये युवा इंटर्न्स स्वास्थ्य तंत्र की प्राथमिक ढाल बनकर उभरते हैं। स्टाइपेंड बढ़ने से नए मेडिकल कॉलेजों में युवा डॉक्टरों के टिकने और बेहतर समर्पण के साथ ड्यूटी करने का माहौल तैयार होगा। डॉक्टरों के संगठनों और मेडिकल छात्र संघों ने इस संवेदनशील फैसले के लिए प्रशासन का आभार जताया है और इसे जम्मू-कश्मीर के मेडिकल एजुकेशन रिफॉर्म्स का एक बड़ा कदम करार दिया है।