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ईरान बॉर्डर बंद करने पर प्रोफेसर ने खोली असीम मुनीर की पोल

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला घटनाक्रम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। पाकिस्तान और उसके पड़ोसी इस्लामिक देश ईरान के बीच सीमाई इलाकों में लगातार बढ़ते तनाव और बॉर्डर सील करने की नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस छिड़ गई है। इस बीच, एक जाने-माने भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर ने पाकिस्तान के मौजूदा सैन्य तानाशाह और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पोल खोलते हुए उनकी नीतियों का पर्दाफाश किया है। प्रोफेसर का साफ तौर पर कहना है कि पाकिस्तान द्वारा ईरान के साथ अपनी सीमाओं को बंद करने और वहां सुरक्षा दीवारें खड़ी करने के पीछे कोई आतंकवाद विरोधी नीति नहीं, बल्कि एक गहरी भू-राजनीतिक और आंतरिक मजबूरी छिपी हुई है। वाशिंगटन और पश्चिमी कूटनीतिक गलियारों में इस खुलासे के बाद पाकिस्तानी सेना की कार्यप्रणाली और उसकी दोहरी कसरतों पर फिर से बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, जिससे इस्लामाबाद के हुक्मरानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

ईरान-पाकिस्तान सीमा सील होने के पीछे का असली और छिपा हुआ सच

पिछले कुछ महीनों से ईरान और पाकिस्तान की साझा सीमा पर तनाव लगातार चरम पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक आवाजाही, प्रवासन और सुरक्षा मुद्दों को लेकर कई तरह के गतिरोध देखने को मिले हैं। पाकिस्तान सरकार और वहां के सैन्य तंत्र द्वारा यह दलील दी जा रही है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध तस्करी और सुरक्षा कारणों से बॉर्डर को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। लेकिन भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर ने इस झूठे नैरेटिव की हवा निकालते हुए दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि असल वजह कुछ और ही है। पाकिस्तान के भीतर लगातार सुलग रही आंतरिक अशांति, बलूचिस्तान के सुदूर इलाकों में सुलग रही सुलगती बगावत और अपनी ही जनता के आक्रोश से घबराई पाकिस्तानी सेना अब खुद को बचाने के लिए इन सीमाओं को बंद कर रही है। जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी फौज अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है ताकि पड़ोसी मुल्कों के साथ चल रहे तनाव को बहाना बनाकर देश की जनता का ध्यान भटकाया जा सके।

जनरल असीम मुनीर की दमनकारी रणनीतियाँ और बलूचिस्तान का सुलगता संकट

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के शासनकाल में देश के भीतर मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांतों में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों और दमनकारी अभियानों के कारण स्थानीय आबादी का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बलूच विद्रोही लगातार पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, और सीमा पार ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के साथ उनके सांस्कृतिक व पारिवारिक रिश्ते इस संघर्ष को और अधिक व्यापक बनाते हैं। पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को इस बात का हमेशा डर सताता रहता है कि कहीं सीमा के दोनों तरफ रहने वाले बलूच समुदाय एकजुट होकर उनके खिलाफ कोई बड़ा सशस्त्र आंदोलन न छेड़ दें। इसी खौफ के चलते जनरल मुनीर ने ईरान के साथ लगने वाली सीमा पर अवरोध पैदा करने और उसे बंद करने की यह सोची-समझी रणनीति अपनाई है, ताकि बलूचिस्तान के भीतर चल रहे स्वतंत्रता संग्राम की आवाज़ों को बाहरी दुनिया तक पहुँचने से रोका जा सके।

वैश्विक कूटनीति पर इस सीमा विवाद और भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर के खुलासे का प्रभाव

एक भारतीय-अमेरिकी रणनीतिकार द्वारा जनरल असीम मुनीर की इस चालाकी को दुनिया के सामने उजागर किए जाने से अमेरिका और पश्चिमी देशों के थिंक-टैंक में भी बड़ी हलचल पैदा हो गई है। पश्चिमी देश हमेशा से पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक सहयोगी के रूप में देखते आए हैं, लेकिन अब अकादमिक और कूटनीतिक स्तर पर यह बात पूरी तरह साफ होने लगी है कि पाकिस्तानी सेना केवल अपने निजी और संस्थागत हितों को सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्रीय स्थिरता को दांव पर लगा रही है। ईरान जैसी क्षेत्रीय ताकत के साथ सीमा बंद करने के इस फैसले से न केवल पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के बीच होने वाले व्यापारिक गलियारे भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। जनरल मुनीर की इस अदूरदर्शिता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश को गर्त में धकेलने से भी गुरेज नहीं करते हैं।

कूटनीतिक मोर्चे पर मात खाता पाकिस्तान और उसके भविष्य के संकट

यह पूरा वाकया इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पाकिस्तान अब अंदरूनी और बाहरी दोनों मोर्चों पर पूरी तरह से घिर चुका है। एक तरफ जहाँ उसकी अर्थव्यस्था वेंटिलेटर पर है और देश के भीतर जनता महंगाई व भुखमरी से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ जनरल असीम मुनीर अपनी तानाशाहीक प्रवृत्ति को बनाए रखने के लिए झूठे सुरक्षा दावों की आड़ ले रहे हैं। भारतीय-अमेरिकी प्रोफेसर द्वारा खोली गई इस पोल ने पाकिस्तानी सेना के उस नकाब को भी खींच लिया है जिसके पीछे वे अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश करते थे। आने वाले दिनों में यदि पाकिस्तान ने अपनी इन दमनकारी और संकीर्ण नीतियों में सुधार नहीं किया, तो बलूचिस्तान और अन्य सीमावर्ती प्रांतों का यह सुलगता असंतोष देश के विघटन का सबसे बड़ा कारण बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब पाकिस्तान के इन हथकंडों को भली-भांति समझ चुका है, और वह दिन दूर नहीं जब जनरल मुनीर की इन चालबाजियों का हिसाब पूरी दुनिया के सामने कड़े शब्दों में लिया जाएगा।