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करवाचौथ पर भद्रा का साया! जानिए वायरल दावों का पूरा सच और पूजा का सटीक मुहूर्त

सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के सबसे पवित्र और आस्था से भरे पर्व करवाचौथ (Karwa Chauth 2026) की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इसे लेकर तरह-तरह के दावे वायरल होने लगे हैं। इस वर्ष 29 अक्टूबर 2026 को रखे जाने वाले करवाचौथ के व्रत को लेकर हाल ही में अफवाह उड़ी है कि इस दिन 'भद्रा' (Bhadra Ka Chhaya) का भयानक साया रहने वाला है, जिसके कारण पूजा-पाठ और अर्घ्य देने का समय प्रभावित हो सकता है। इस खबर के फैलते ही देश भर की व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं में संशय और चिंता का माहौल बन गया है। इस वायरल दावे की वास्तविक सच्चाई क्या है, क्या भद्रा का प्रभाव सचमुच पूजा पर पड़ेगा या फिर यह महज एक भ्रामक खबर है? इस पूरे विषय पर देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों और पंचांग विशेषज्ञों ने शास्त्र सम्मत विश्लेषण प्रस्तुत कर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

#1 भद्रा काल का पौराणिक महत्व और करवाचौथ पर इसके साये की सच्चाई

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री तथा भगवान शनिदेव की बहन माना गया है। भद्रा का स्वभाव उग्र माना जाता है, इसलिए मांगलिक और शुभ कार्यों (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या रक्षाबंधन का धागा बांधना) में भद्रा काल का त्याग किया जाता है। लेकिन जहां तक करवाचौथ 2026 के व्रत का सवाल है, ज्योतिषाचार्यों ने साफ कर दिया है कि 29 अक्टूबर को पड़ने वाले इस व्रत पर भद्रा का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं है। पंचांगीय गणना के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भद्रा का निवास या तो स्वर्ग लोक में होगा या फिर यह चतुर्थी तिथि की शुरुआत से पहले ही समाप्त हो जाएगी। शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि यदि भद्रा पाताल या स्वर्ग लोक में निवास करती है, तो उसका पृथ्वी लोक (भूलोक) के मनुष्यों पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता और न ही शुभ कार्यों में कोई रुकावट आती है।

#1 वायरल दावों का खंडन: जानिए क्यों डरने की आवश्यकता नहीं है?

सोशल मीडिया पर बिना किसी प्रामाणिक आधार के फैलाए जा रहे दावों को खारिज करते हुए ज्योतिषियों ने बताया कि कुछ लोग पंचांग की सही समझ न होने के कारण ऐसी अफवाहें फैला देते हैं। 29 अक्टूबर 2026 को उदया तिथि के अनुसार चतुर्थी तिथि पूरे दिन व्यापिनी रहेगी और शाम के समय जब महिलाएं माता पार्वती, भगवान शिव और श्रीगणेश का पूजन करेंगी, उस समय पृथ्वी पर किसी भी प्रकार का भद्रा दोष नहीं होगा। इसलिए सुहागिन महिलाओं को किसी भी भ्रामक जानकारी से घबराने या असमंजस में पड़ने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। इस दिन पूरे भक्ति भाव और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ करवाचौथ का निर्जला व्रत संपन्न किया जा सकता है।

#1 करवाचौथ 2026 का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का सटीक समय

पंचांग के अनुसार करवाचौथ की पूजा का समय हमेशा प्रदोष काल और शाम के समय तय किया जाता है। 29 अक्टूबर 2026 को व्रत धारण करने वाली महिलाओं के लिए पूजा और चंद्र दर्शन का समय इस प्रकार रहने वाला है:

  • करवाचौथ व्रत की तिथि: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार

  • संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से लेकर शाम 06:56 बजे तक (कुल अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)

  • चंद्रोदय (चांद निकलने) का समय: रात 08:12 बजे से 08:18 बजे के बीच (अलग-अलग राज्यों और शहरों के अक्षांश के अनुसार समय में मामूली अंतर संभव है)

#1 करवाचौथ की पूजा विधि और व्रतियों के लिए शास्त्रीय सलाह

करवाचौथ के दिन व्रती महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर सरगी ग्रहण करें और भगवान के समक्ष अखंड सौभाग्य के व्रत का संकल्प लें। दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम को शुभ मुहूर्त के दौरान गेहूं या चावल की ढेरी पर मिट्टी का करवा स्थापित करें। करवे पर रोली, अक्षत और कलावा बांधें तथा करवा माता की कथा सुनें या पढ़ें। रात में चंद्रमा के प्रकट होने पर उन्हें छलनी के माध्यम से देखें, जल से अर्घ्य दें और अपने पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करें। भद्रा का कोई भय न रखते हुए शास्त्र सम्मत मुहूर्त में पूजा करने से दांपत्य जीवन में सदैव प्रेम, सुख और सौभाग्य बना रहता है।