
लखनऊ/ज्योतिष डेस्क। सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष परंपरा में किसी भी नए कार्य की शुरुआत, मांगलिक अनुष्ठान, व्यापारिक लेन-देन और यात्रा से पहले दैनिक पंचांग के पांच प्रमुख अंगों—तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। आज यानी बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद मंगलकारी साबित होने जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की इस पावन तिथि पर पूरे दिन रोहिणी नक्षत्र की उपस्थिति और उसके प्रभाव से निर्मित 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का अत्यंत शुभ संयोग बना हुआ है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए सभी कार्य बिना किसी विघ्न-बाधा के संपन्न होते हैं और उनमें पूर्ण सफलता हासिल होती है। यदि आप कोई नया व्यवसाय शुरू करने, सोने-चांदी के आभूषण खरीदने, नए वाहन की डिलीवरी लेने या किसी महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश और बुध देव की आराधना के लिए समर्पित होता है, ऐसे में यह महासंयोग बुद्धि, विवेक, व्यापार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने वाला माना गया है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की दैनिक स्थिति का ब्योरा
दैनिक जीवन में काल की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होती है। आज की खगोलीय और पंचांगीय स्थिति इस प्रकार दर्ज की गई है:
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सूर्योदय का समय: सुबह 06:30 बजे
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सूर्यास्त का समय: शाम 05:40 बजे
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चंद्रोदय का समय: रात्रि 08:45 बजे
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चंद्रास्त का समय: अगले दिन सुबह 09:20 बजे
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सूर्य राशि: सूर्य देव वर्तमान में तुला राशि में संचरण कर रहे हैं।
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चंद्र राशि: चंद्रमा अपनी प्रिय और उच्च राशि वृषभ में पूरे दिन-रात विराजमान रहेंगे। चंद्रमा के अपनी उच्च राशि में रहने से मन में शांति, सकारात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता में मजबूती आती है।
तिथि, नक्षत्र, करण और योग का संपूर्ण गणित
वैदिक पंचांग के मूलभूत घटकों की समय सारिणी आज के दिन को विशेष ऊर्जावान बना रही है:
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विक्रम संवत: 2083 (प्रमादी)
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शक संवत: 1948
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मास: कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: आज चतुर्थी तिथि का प्रभाव दोपहर तक रहेगा, जिसके उपरांत पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
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नक्षत्र: आज आकाश मंडल का चौथा और चंद्रमा का प्रिय 'रोहिणी नक्षत्र' पूरे दिन और रात्रि पर्यन्त प्रभावी रहेगा। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी स्वयं चंद्र देव हैं और इसके देवता प्रजापति ब्रह्मा हैं। इस नक्षत्र में किए गए रचनात्मक कार्य, कृषि, निर्माण और खरीदारी चिरस्थायी लाभ प्रदान करते हैं।
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योग: आज 'परिघ योग' और उसके साथ ही दिनभर 'सर्वार्थ सिद्धि योग' का दुर्लभ संयोग विद्यमान रहेगा। परिघ योग के बाद 'शिव योग' का आरंभ होगा, जो जप-तप और मंत्र साधना के लिए उत्तम फलदायी माना गया है।
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करण: बव करण दोपहर तक रहेगा, तत्पश्चात बालव और कौलव करण का क्रम आरंभ होगा।
आज के शुभ मुहूर्त: कब करें नए और शुभ कार्यों की शुरुआत?
जब दिन में सर्वार्थ सिद्धि योग बना हो, तो सामान्य कार्यों के लिए भी समय अत्यंत अनुकूल हो जाता है। इसके बावजूद विशेष मांगलिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों का ध्यान रखना श्रेयस्कर होता है:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:48 बजे से 05:39 बजे तक। यह समय ध्यान, योग, ईष्ट स्मरण और अध्ययन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
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अभिजीत मुहूर्त: सामान्यतः बुधवार के दिन अभिजीत मुहूर्त का निषेध माना जाता है या इस दिन इसे परिहार के अंतर्गत छोड़ दिया जाता है, लेकिन आज दिनभर सर्वार्थ सिद्धि योग सक्रिय रहने के कारण अन्य शुभ मुहूर्तों में कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 01:57 बजे से 02:42 बजे तक। किसी विवाद को सुलझाने, कानूनी दस्तावेजों की तैयारी या महत्वपूर्ण बैठकों के लिए यह मुहूर्त अत्यंत प्रभावी है।
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से 06:03 बजे तक। संध्या वंदन, घर में दीप प्रज्वलन और मंदिर दर्शन के लिए यह समय श्रेष्ठ है।
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अमृत काल: रात्रि 10:15 बजे से 11:55 बजे तक। तांत्रिक अनुष्ठान या शांति कर्म के लिए इस समय का उपयोग किया जा सकता है।
अशुभ समय और राहुकाल से सावधान: न करें ये गलतियां
शास्त्रों में विधान है कि भले ही दिन में कितने भी शुभ योग उपस्थित हों, लेकिन राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण, नया या मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए। इस अवधि में शुरू किए गए कार्यों में अप्रत्याशित बाधाएं आने की आशंका रहती है:
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राहुकाल: दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 01:29 बजे तक। राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार की नई खरीदारी, यात्रा प्रस्थान या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पूरी तरह बचना चाहिए।
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यमगंड काल: प्रातः 07:54 बजे से 09:18 बजे तक। इस समय में किसी जोखिम भरे कार्य या नए निवेश की शुरुआत न करें।
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गुलिक काल: प्रातः 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक।
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दुर्मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक।
दिशाशूल और यात्रा के विशेष नियम
आज बुधवार होने के कारण उत्तर दिशा में 'दिशाशूल' रहता है। इसका अर्थ यह है कि उत्तर दिशा की ओर अनावश्यक या लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी आवश्यक कार्य, व्यापार या चिकित्सा आपातकाल के चलते आज उत्तर दिशा की यात्रा करना अपरिहार्य हो, तो शास्त्रों में इसके लिए सरल परिहार बताया गया है। प्रस्थान करने से पहले घर से तिल या धनिया खाकर निकलें, भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित कर उनका स्मरण करें और पांच पग पीछे की ओर चलकर फिर आगे की यात्रा प्रारंभ करें। ऐसा करने से दिशाशूल का नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाता है और मार्ग में आने वाले संकट टल जाते हैं।
बुधवार और रोहिणी नक्षत्र में कैसे करें गणेश जी और बुध देव की पूजा?
आज के दिन का आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ाने के लिए प्रातःकाल स्नान के उपरांत स्वच्छ हरे या पीले वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान पर भगवान गणेश की प्रतिमा के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और उन्हें 21 दूर्वा दल 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्पित करें। इसके साथ ही विघ्नहर्ता को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
चूंकि आज चंद्रमा उच्च के हैं और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है, इसलिए भगवान शिव का कच्चे दूध और गंगाजल से अभिषेक करना मानसिक तनाव और कुंडली के चंद्र दोष को दूर करने के लिए अचूक उपाय साबित होगा। जो जातक व्यापार में घाटा झेल रहे हैं या जिनका संवाद कौशल कमजोर है, वे आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति या गाय को हरा चारा, मूंग की दाल या हरी सब्जियां दान करें। किन्नरों को कुछ धन देकर उनका आशीर्वाद लेना भी बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने का सबसे प्रभावी टोटका माना जाता है। इस प्रकार पंचांग के नियमों का पालन करते हुए यदि आप अपने दिन की योजना बनाते हैं, तो आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।
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