
आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड (Aditya Birla Fashion and Retail) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी पहली तिमाही (Q1 Results) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के इन नतीजों में एक तरफ जहां बिजनेस की टॉप-लाइन यानी कुल आय में डबल डिजिट की मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है, वहीं दूसरी तरफ लागत बढ़ने के कारण घाटे में भी आंशिक इजाफा दर्ज हुआ है। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा और कारोबार के किन मोर्चों पर तेजी या सुस्ती देखने को मिली, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
जून तिमाही के वित्तीय आंकड़े और घाटा
आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा बढ़कर ₹215.2 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को ₹212 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था। हालांकि, कंपनी की ऑपरेशनल और कुल आय में अच्छी-खासी तेजी दर्ज की गई है। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय 10.6% की उछाल के साथ ₹2,025.6 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹1,831.5 करोड़ थी। दूसरी ओर, महंगाई और खर्च बढ़ने के कारण कुल खर्च 11.4% बढ़कर ₹2,395 करोड़ पर पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹2,149 करोड़ दर्ज किया गया था।
EBITDA और सेगमेंट के अनुसार कारोबार का हाल
कंपनी का एबिटडा (EBITDA) पहली तिमाही में 5% बढ़कर ₹117.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल की पहली तिमाही में ₹111.7 करोड़ था। हालांकि, एबिटडा मार्जिन घटकर 5.78% पर आ गया, जबकि पिछले साल यह 6.10% पर था। कंपनी के मुताबिक, अन्य आय में करीब 70 बेसिस प्वाइंट की गिरावट और नए बिजनेस सेगमेंट को आगे बढ़ाने पर किए गए खर्च का दबाव मार्जिन पर साफ तौर पर दिखाई दिया। इसके बावजूद Pantaloons जैसे प्रमुख कारोबार की आय 10% बढ़कर ₹1,204 करोड़ पर पहुंच गई, जबकि एथनिक बिजनेस (Ethnic Businesses) में 4% और TMRW सेगमेंट में 11% की ग्रोथ दर्ज की गई। इसके अलावा अन्य कारोबारों में 30% की मजबूत बढ़त देखने को मिली।
शादियों के सीजन की सुस्ती और लागत का बढ़ता दबाव
कंपनी ने बताया कि इस तिमाही के दौरान शादियों और अन्य मांग वाले अवसरों पर पिछले साल की तुलना में कुछ नरमी रही, जिसका मुख्य कारण अधिक मास होना रहा। इसके बावजूद अलग-अलग श्रेणियों में कंज्यूमर डिमांड पिछली तिमाहियों के आसपास ही बनी रही। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, कच्चे माल, ट्रांसपोर्टेशन और लेबर कॉस्ट यानी मजदूरी में महंगाई का दबाव लगातार महसूस किया जा रहा है। छोटे शहरों और टियर-2, टियर-3 बाजारों में बढ़ते कॉम्पिटिशन और वैल्यू रिटेल सेगमेंट की वजह से कंपनियों को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लानी पड़ रही है। इसके साथ ही, डिजिटल-फर्स्ट फैशन ब्रांड अब ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहे हैं और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स नए सेल्स चैनल के रूप में उभर रहे हैं।
UK News