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Ahoi Ashtami 2026: दिल्ली, कानपुर, मेरठ और लखनऊ समेत देश के प्रमुख शहरों में किस समय दिखेंगे तारे

सनातन संस्कृति, भारतीय लोक आस्था और मातृत्व के प्रेम को समर्पित सबसे पवित्र व्रतों में से एक अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2026) का पावन पर्व आज यानी 1 नवंबर 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर रखा जाने वाला यह निर्जला उपवास माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं। इस व्रत की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसमें दिनभर अन्न और जल का त्याग करने के बाद शाम के समय आकाश में तारे देखने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। चूंकि अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है, इसलिए देश भर की व्रतधारी माताओं के मन में यह उत्सुकता रहती है कि उनके शहर में तारे दिखने का सही समय क्या होगा। आइए इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि दिल्ली, कानपुर, मेरठ, लखनऊ, आगरा और जयपुर समेत देश के प्रमुख शहरों में आज शाम तारे दिखने का संभावित समय क्या रहेगा।

भौगोलिक स्थिति और सूर्यास्त के अनुसार बदलता है तारों के दिखने का समय

खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में तारों के दिखने का समय एक जैसा नहीं होता है। पृथ्वी की स्थिति और सूर्य के अस्त होने के समय के आधार पर पूर्व से लेकर पश्चिम तक के शहरों में समय में कुछ मिनटों का अंतर पाया जाता है।

पूर्वी भारत के राज्यों में जहां शाम जल्दी होती है और तारे सबसे पहले नजर आते हैं, वहीं पश्चिमी राज्यों की ओर बढ़ने पर यह समय थोड़ा आगे खिसक जाता है। यही कारण है कि माताओं को अपने स्थानीय समय और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही तारों के दर्शन का इंतजार करना चाहिए। हालांकि, यदि मौसम साफ रहता है, तो तय समय के आसपास ही आसमान में तारे टिमटिमाते हुए नजर आ जाएंगे।

प्रमुख शहरों में अहोई अष्टमी पर तारे दिखने का संभावित समय

यदि आप भी आज शाम अहोई माता के पूजन के बाद तारों को अर्घ्य देने की तैयारी कर रही हैं, तो विभिन्न शहरों के अनुसार निर्धारित संभावित समय की इस सूची को देख सकती हैं:

  • दिल्ली: शाम 06:00 बजे

  • गाजियाबाद: शाम 05 बजकर 58 मिनट से 06:00 बजे तक

  • मेरठ: शाम 05 बजकर 58 मिनट पर

  • कानपुर: शाम 05 बजकर 50 मिनट पर

  • लखनऊ: शाम 05 बजकर 47 मिनट पर

  • प्रयागराज: शाम 05 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 46 मिनट तक

  • वाराणसी: शाम 05 बजकर 41 मिनट पर

  • आगरा: शाम 05 बजकर 53 मिनट से लेकर 05 बजकर 56 मिनट तक

  • जयपुर: शाम 06 बजकर 08 मिनट पर

  • उदयपुर: शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

  • भोपाल: शाम 06 बजकर 05 मिनट से 06 बजकर 08 मिनट तक

  • इंदौर: शाम 06 बजकर 12 मिनट पर

  • पटना: शाम 05 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 38 मिनट तक

(विशेष नोट: यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आकाश में तारों का दिखाई देना पूरी तरह से उस क्षेत्र के स्थानीय मौसम और बादलों की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि आसमान में बादल छाए हुए हैं, तो तारे दिखने में थोड़ा समय आगे-पीछे भी हो सकता है।)

तारों को अर्घ्य देने और संतान के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा

अहोई अष्टमी के इस पावन व्रत का विधान बेहद कड़ा और अनुशासित होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं आज सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और हाथ में जल या अक्षत लेकर अपनी संतान की लंबी उम्र और आरोग्यता का संकल्प लेती हैं। इसके बाद दिनभर बिना जल ग्रहण किए निर्जला उपवास रखा जाता है।

शाम के समय दीवार पर गेरू से अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाकर या कैलेंडर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। माता को रोली, अक्षत, दूध और मीठे पुए या हलवे का भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात अहोई अष्टमी की पावन व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। जब आपके शहर के निर्धारित समय के अनुसार आकाश में तारे निकल आते हैं, तब छलनी से तारों को देखने और उन्हें जल से अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। अंत में अपनी संतान के हाथों से जल पीकर और प्रसाद ग्रहण करके माताओं द्वारा इस कठिन व्रत का पारण किया जाता है, जिससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास बना रहता है।