Tuesday , July 21 2026

AI Boom & Salary Hike: AI क्रांति का अनोखा असर! टेक इंजीनियर्स से ज्यादा कमा रहे इलेक्ट्रिशियन; कंपनियां दे रही हैं 2.7 करोड़ रुपये तक का पैकेज

नौकरियों और टेक इंडस्ट्री (Tech Industry) की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Boom) के तेजी से बढ़ने के चलते दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों में लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और आईटी एम्प्लॉइज की छंटनी (Layoffs) हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एक ब्लू-कॉलर जॉब यानी इलेक्ट्रिशियन (Electricians) की मांग आसमान छू रही है। आलम यह है कि सिलिकॉन वैली और बड़े टेक हब्स में स्किल्ड इलेक्ट्रिशियंस और टेक्नीशियन्स को कई सॉफ्टवेयर डेवलपर्स से भी ज्यादा सैलरी पैकेज मिल रहा है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो एआई मॉडल को पावर देने वाले विशाल डेटा सेंटर्स (AI Data Centers) की जरूरत ने आज कुशल हाथ के कारीगरों की कीमत टेक एक्सपर्ट्स से भी ज्यादा बढ़ा दी है।

2.7 करोड़ रुपये ($280,000) तक पहुंच गई सालाना सैलरी!

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और 'डर्टी जॉब्स' शो के फाउंडर माइक रो (Mike Rowe) के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, 30 साल से कम उम्र के Gen Z (युवा) इलेक्ट्रिशियन अब टेक हब्स में भारी कमाई कर रहे हैं:

  • करोड़ों में पैकेज: कई युवा स्किल्ड इलेक्ट्रिशियंस का सालाना पैकेज $240,000 से $280,000 (लगभग ₹2.3 करोड़ से ₹2.7 करोड़ रुपये) के बीच पहुंच चुका है।

  • सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को पछाड़ा: कई शुरुआती और मिड-लेवल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की औसत सैलरी के मुकाबले यह पैकेज काफी ज्यादा है। इसके अलावा ओवरटाइम और इमरजेंसी कॉल-आउट्स पर अलग से भारी बोनस भी दिया जा रहा है।

आखिर AI कंपनियों को क्यों पड़ी इलेक्ट्रिशियंस की इतनी जरूरत?

एआई मॉडल्स जैसे कि चैटजीपीटी (ChatGPT), जेमिनी या बड़े एलएलएम (LLMs) को ट्रेनिंग देने और चलाने के लिए अत्यधिक बिजली और कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है:

  1. हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स का निर्माण: एमेज़ॉन (AWS), माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा और ऑरेकल जैसी दिग्गज कंपनियां दुनिया भर में विशाल एआई डेटा सेंटर्स बना रही हैं।

  2. हजारों GPU और पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर: इन डेटा सेंटर्स में लगे हजारों हाई-एंड जीपीयूस (GPUs) और सर्वर रैक्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए जटिल इलेक्ट्रिक ग्रिड, हाई-वोल्टेज वायरिंग, बैकअप पावर जनरेटर और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है।

  3. कुशल कारीगरों की भारी किल्लत: सॉफ्टवेयर कोडर्स की संख्या तो बाजार में काफी है, लेकिन हाई-वोल्टेज और एडवांस डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को संभालने वाले ट्रेंड और लाइसेंसधारी इलेक्ट्रिशियंस, वेल्डर्स और कंस्ट्रक्शन मैनेजर्स की वैश्विक स्तर पर भारी कमी है।

स्किल्ड ट्रेड्स का बढ़ा क्रेज: Gen Z का नया रुख

इस ट्रेंड ने युवा पीढ़ी (Gen Z) के सोचने के तरीके को भी बदल दिया है। भारी-भरकम एजुकेशन लोन लेकर 4 साल की कंप्यूटर साइंस डिग्री करने के बजाय, अब कई युवा 'ट्रेड स्कूल्स' और वोकेशनल ट्रेनिंग (Vocational Training) की ओर रुख कर रहे हैं। बिना किसी बड़े कर्ज के वे कम उम्र में ही हाई-पेइंग जॉब्स और खुद का कांट्रैक्टर बिजनेस शुरू कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जारी रहेगा, तब तक ऑन-ग्राउंड स्किल्ड वर्कफोर्स की मांग और उनकी तनख्वाह में इसी तरह का उछाल देखने को मिलता रहेगा।