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नई दिल्ली/लखनऊ। ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्वास्थ्य और पोषण की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (Anganwadi Workers) और सहायिकाओं के लिए यह समय बड़ी राहत लेकर आया है। लंबे समय से अपने मानदेय (Honorarium) में वृद्धि, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर संघर्ष कर रही आंगनवाड़ी बहनों की आवाज को अब गंभीरता से सुना जा रहा है। उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जो बढ़ती महंगाई के बीच उनके लिए एक बड़ा तोहफा है।वेतन/मानदेय वृद्धि का गणित: कैसे मिलता है पैसा?आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय केंद्र और राज्य सरकार के साझा फंड से दिया जाता है।केंद्र का हिस्सा: वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹4,500, मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ₹3,500 और सहायिकाओं को ₹2,250 प्रति माह का निश्चित मानदेय दिया जाता है।राज्य का हिस्सा (प्रोत्साहन राशि): इसके ऊपर राज्य सरकारें अपने बजट के अनुसार अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि जोड़ती हैं। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में आंगनवाड़ी बहनों का कुल वेतन अलग-अलग होता है। 2026 के नए बजट और घोषणाओं के तहत कई राज्य सरकारों ने अपने हिस्से की प्रोत्साहन राशि में भारी इजाफा किया है।आखिर क्यों जरूरी था यह फैसला?आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कंधों पर जिम्मेदारियों का भारी बोझ होता है, जिसे अक्सर कम आंका जाता है:पोषण और स्वास्थ्य की नींव: बच्चों का वजन तौलना, कुपोषण से बचाना, और गर्भवती व धात्री महिलाओं को ‘टेक होम राशन’ (THR) बांटना।टीकाकरण और सर्वे: पल्स पोलियो से लेकर पल्स रेट नापने और सरकारी सर्वे (जैसे जनगणना या बीएलओ ड्यूटी) तक में इनकी ड्यूटी लगाई जाती है।महंगाई की मार: काम के घंटे बढ़ने और महंगाई के बावजूद उनके मानदेय में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हो रही थी, जिससे आर्थिक संकट गहरा रहा था।वेतन वृद्धि से होने वाले सीधे और परोक्ष लाभसरकार के इस सकारात्मक कदम से केवल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को फायदा होगा:आर्थिक सशक्तिकरण: बढ़ा हुआ मानदेय सीधे तौर पर इन महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारेगा। वे अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी।कार्यक्षमता में वृद्धि: उचित पारिश्रमिक मिलने से आत्मसम्मान बढ़ता है। जब आर्थिक तनाव कम होगा, तो वे कुपोषण मिटाने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारने के काम में और अधिक ऊर्जा लगा सकेंगी।समाज में बदलाव: मजबूत आंगनवाड़ी व्यवस्था का सीधा अर्थ है—स्वस्थ बच्चे और स्वस्थ माताएं, जो एक सशक्त राष्ट्र की निशानी है।भविष्य की उम्मीदें: अभी और भी हैं कई मांगेंवेतन वृद्धि एक शानदार और स्वागत योग्य कदम है, लेकिन विशेषज्ञों और यूनियनों का मानना है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है। भविष्य में आंगनवाड़ी बहनों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलने की उम्मीदें भी जोरों पर हैं:स्थायी कर्मचारी का दर्जा: उन्हें ‘मानदेय कर्मी’ के बजाय ‘सरकारी कर्मचारी’ घोषित किया जाए।सामाजिक सुरक्षा: ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) जैसी स्वास्थ्य बीमा सुविधाएं और रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक पेंशन व ग्रेच्युटी (Gratuity) का लाभ।
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