
News India Live, Digital Desk : Ashtalakshmi Stotram : पैसा, सुख और मन की शांति – जीवन में हर कोई बस यही चाहता है। हम इसके लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कई बार किस्मत साथ नहीं देती और घर में तंगी बनी रहती है। अगर आप भी ऐसी ही किसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को समर्पित ‘अष्टलक्ष्मी स्तोत्र’ का पाठ आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।यह सिर्फ़ एक साधारण पाठ नहीं है, बल्कि इसमें मां लक्ष्मी के उन आठ शक्तिशाली स्वरूपों की महिमा बताई गई है, जो जीवन के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं। माना जाता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है और घर धन-धान्य से भर जाता है।कौन हैं मां लक्ष्मी के ये 8 स्वरूप?आदि लक्ष्मी: मां का सबसे पहला और मूल स्वरूप।धन्य लक्ष्मी: घर में अन्न और धान्य की बरकत देने वालीं।धैर्य लक्ष्मी: जीवन में धैर्य और साहस प्रदान करने वालीं।गज लक्ष्मी: राजसी सुख, वाहन और सम्मान दिलाने वालीं।संतान लक्ष्मी: संतान सुख और परिवार की वृद्धि करने वालीं।विजय लक्ष्मी: हर कार्य में विजय और सफलता सुनिश्चित करने वालीं।विद्या लक्ष्मी: ज्ञान और कला का आशीर्वाद देने वालीं।धन लक्ष्मी: धन और संपत्ति प्रदान करने वालीं।जब आप इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो आप एक साथ इन सभी आठ देवियों का आह्वान करते हैं, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मकता आती है।॥ श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् ॥आदि लक्ष्मी (Adi Lakshmi)सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये।मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनि, मंजुल भाषिणि वेदनुते॥पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम्॥धान्य लक्ष्मी (Dhanya Lakshmi)अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये।क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते॥मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि परिपालय माम्॥धैर्य लक्ष्मी (Dhairya Lakshmi)जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये।सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते॥भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, धैर्यलक्ष्मि परिपालय माम्॥गज लक्ष्मी (Gaja Lakshmi)जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्व फलप्रद शास्त्रमये।रथगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते॥हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥सन्तान लक्ष्मी (Santana Lakshmi)अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, राग विवर्धिनि ज्ञानमये।गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि, सप्तस्वर भूषित गाननुते॥सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मि परिपालय माम्॥विजय लक्ष्मी (Vijaya Lakshmi)जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञान विकासिनि ज्ञानमये।अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते॥कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्कर देशिक मान्य पदे।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मि परिपालय माम्॥विद्या लक्ष्मी (Vidya Lakshmi)प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोक विनाशिनि रत्नमये।मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे॥नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम्॥धन लक्ष्मी (Dhana Lakshmi)धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि दिन्धिमि, दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये।घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते॥वेद पुराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते।जय जय हे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥
UK News