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Ayodhya Mystery : राम मंदिर के शिखर पर लहराया जो ध्वज, उसमें छिपा है कचनार का वो राज जो 99% लोग नहीं जानते

News India Live, Digital Desk : आज (25 नवंबर 2025) अयोध्या में एक नया इतिहास रचा गया है। प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के शिखर पर’धर्मध्वज’ को विधिवत स्थापित कर दिया गया है। हम सबने टीवी और मोबाइल पर इस सुनहरे पल को देखा, भावुक हुए और जयकारे लगाए।लेकिन, क्या आपने एक खास बात पर गौर किया?इस ध्वजारोहण और आज की तारीख के पीछे एक गहरा’रहस्य’ छिपा है। एक ऐसा रहस्य जिसका कनेक्शन सीधे ‘त्रेतायुग’ और एक खास पेड़’कचनार’ (Bauhinia) से है। अक्सर हम झंडे को देखते हैं, पर उसके पीछे की कहानी को नहीं जान पाते।आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि राम मंदिर के ध्वज में ‘कचनार’ का क्या महत्व है और आज का मुहूर्त इतना खास क्यों था।कचनार का रहस्य: रघुकुल की असली पहचानशायद यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि हम जिस’कचनार’ (जिसे शास्त्रों में कोविदस या कोविदार कहा गया है) को आज सिर्फ एक फूल या सब्जी समझते हैं, वह असल मेंअयोध्या के राजकुल (रघुकुल) का राजकीय चिन्ह था।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम के भाईभरत जी के रथ के ध्वज पर हमेशा ‘कोविदार’ (कचनार) के वृक्ष का चिन्ह बना होता था।आज का महत्व: राम मंदिर के शिखर पर फहराए गए ध्वज में इस प्राचीन परंपरा को फिर से जीवित किया गया है। कचनार का यह संबंध बताता है कि यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि ‘रामराज्य’ की पुन: स्थापना है। कचनार को विजय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।25 नवंबर 2025 ही क्यों? (Auspicious Yoga)आज की तारीख का चयन यूं ही नहीं किया गया। इसके पीछे ज्योतिषीय गणना (Astrological Calculation) है।विवाह पंचमी का महीना: अभी अगहन (मार्गशीर्ष) का महीना चल रहा है। यह वही पवित्र महीना है जब भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।सर्वार्थ सिद्धि योग: 25 नवंबर को ग्रहों का एक ऐसा दुर्लभ संयोग (योग) बना है, जिसे किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। माना जाता है कि इस नक्षत्र में फहराया गया ध्वज युगों-युगों तक अटल रहता है और धर्म की रक्षा करता है।ध्वजदंड और हनुमान जी की साखीमंदिर का ध्वजदंड (Flag Pole) सोने की परत से मढ़ा हुआ है, लेकिन सबसे ख़ास बात यह है कि मुख्य ध्वज के साथहनुमान जी की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई है।जैसा कि हम जानते हैं, महाभारत में अर्जुन के रथ पर भी हनुमान जी विराजमान थे, ठीक वैसे ही अयोध्या के इस ‘विजय ध्वज’ पर भी उनका वास है।भक्तों के लिए संदेशजब आप अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे और अपनी नजरें ऊपर उठाकर उस 161 फीट ऊंचे शिखर पर लहराते ध्वज को देखेंगे, तो याद रखिएगा कि यह ‘कचनार’ रूपी ध्वज हमें अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और अपने इतिहास की याद दिला रहा है।यह बताता है कि समय कितना भी बदल जाए, रघुकुल की रीत और प्रतीक कभी मिटते नहीं।