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Balochistan Attack : बलूचिस्तान में BLA का खूनी तांडव पहली बार महिला फिदायीन आसिफा मेंगल ने खुद को उड़ाया

News India Live, Digital Desk : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में जारी गृहयुद्ध ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। बलूच अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के ‘मजीद ब्रिगेड’ ने एक भीषण आत्मघाती हमले को अंजाम दिया है। इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें आसिफा मेंगल नामक एक महिला आत्मघाती हमलावर (Fidyeen) शामिल थी। यह पहली बार है जब मेंगल जनजाति की किसी महिला ने इस तरह के हमले का नेतृत्व किया है। इस हमले में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि हुई है।कौन थी आसिफा मेंगल? मजीद ब्रिगेड का ‘नया हथियार’आसिफा मेंगल बलूचिस्तान के एक प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखती थी। BLA द्वारा जारी बयान के अनुसार, आसिफा ने स्वेच्छा से ‘मजीद ब्रिगेड’ के आत्मघाती दस्ते में शामिल होने का फैसला किया था।शिक्षित हमलावर: रिपोर्टों के अनुसार, आसिफा उच्च शिक्षित थी, जो बलूच उग्रवाद में बढ़ते ‘रेडिकलाइजेशन’ और युवाओं, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी को दर्शाता है।रणनीतिक संदेश: आसिफा मेंगल का इस्तेमाल करके BLA ने पाकिस्तानी सरकार को यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब बलूच महिलाएं भी इस लड़ाई में फ्रंटलाइन पर हैं।हमले का टारगेट: CPEC और पाकिस्तानी सेनायह हमला उस स्थान पर हुआ जहां पाकिस्तानी सेना और चीनी परियोजनाओं (CPEC) से जुड़े अधिकारियों की आवाजाही अधिक रहती है।धमाके की तीव्रता: चश्मदीदों के मुताबिक, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और कई वाहन जलकर खाक हो गए।दो महिला हमलावर: अपुष्ट खबरों के अनुसार, आसिफा के साथ एक और महिला हमलावर शामिल थी, जिन्होंने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए खुद को उड़ा लिया।पाकिस्तान में ‘इमरजेंसी’ जैसे हालातइस हमले के बाद पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य नेतृत्व दबाव में है।सुरक्षा में चूक: खुफिया एजेंसियों की विफलता पर सवाल उठ रहे हैं कि एक महिला हमलावर इतने संवेदनशील इलाके में विस्फोटक लेकर कैसे पहुंच गई।बलूच विद्रोह का विस्तार: विशेषज्ञों का मानना है कि बलूच विद्रोह अब केवल छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘फीमेल सुसाइड बॉम्बिंग’ के उस दौर में पहुंच गया है जो कभी श्रीलंका के LTTE में देखा गया था।मानवाधिकारों का हनन और बढ़ता आक्रोशबलूचिस्तान में ‘लापता व्यक्तियों’ (Enforced Disappearances) का मुद्दा इस विद्रोह की मुख्य जड़ है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच युवाओं और महिलाओं के उत्पीड़न ने ही आसिफा मेंगल जैसे लोगों को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया है।