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Banking Sector Reforms: विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार ने बनाई हाई-लेवल कमेटी; AI और आधुनिक तकनीक पर रहेगा मुख्य फोकस

Indian banking sector reforms 2047 : भारत को वर्ष 2047 तक एक पूर्ण विकसित अर्थव्यवस्था (Viksit Bharat 2047) बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए देश के वित्तीय और बैंकिंग बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। 30 ट्रिलियन डॉलर की महत्वाकांक्षी अर्थव्यवस्था बनने के सफर में सबसे मजबूत रीढ़ देश का बैंकिंग तंत्र ही होगा, जो उद्योगों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, कृषि और आम नागरिकों की क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इसी दूरगामी विजन को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समन्वय से एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Committee) का गठन किया गया है। यह समिति आने वाले दो दशकों के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण, संरचनात्मक सुधारों, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत तकनीकों के एकीकरण का व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।

विकसित भारत 2047 के वित्तीय रोडमैप के लिए हाई-लेवल कमेटी का गठन

इस नवगठित उच्च-स्तरीय समिति में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ नीति निर्माताओं, केंद्रीय बैंक के पूर्व व वर्तमान नियामकों, शीर्ष सार्वजनिक व निजी बैंकों के प्रमुखों, फिनटेक दिग्गजों और वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इस समिति का प्राथमिक कार्य यह विश्लेषण करना है कि आगामी वर्षों में देश की जीडीपी की तीव्र वृद्धि दर को समर्थन देने के लिए बैंकों की बैलेंस शीट, पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy) और ऋण वितरण क्षमता का पैमाना क्या होना चाहिए। विकसित देशों की कतार में खड़े होने के लिए केवल बैंक शाखाओं का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि वित्तीय दक्षता, लागत में कमी और ऋण अनुमोदन की गति को कई गुना बढ़ाना अनिवार्य है। यह समिति बैंकों की प्रशासनिक संरचना (Corporate Governance), गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPA) के स्थायी प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों के साथ भारतीय बैंकिंग के सहज एकीकरण पर विस्तृत सिफारिशें सौंपेगी।

बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का क्रांतिकारी विस्तार

बैंकिंग सुधारों के इस नए चरण का सबसे प्रमुख और केंद्रीय स्तंभ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जनरेटिव एआई (GenAI) का व्यापक इस्तेमाल है। वर्तमान में बैंकिंग परिचालन में कागजी कार्य और मानव-आधारित सत्यापन में जो समय लगता है, उसे अत्याधुनिक एल्गोरिदम के जरिए सेकंडों में समेटने की तैयारी है। हाई-लेवल कमेटी बैंकों में एआई-संचालित क्रेडिट अंडरराइटिंग (Credit Underwriting) मॉडल लागू करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत किसी व्यक्ति या कारोबारी को ऋण देने से पहले उसकी क्रेडिट योग्यता का आकलन केवल पुराने सिबिल स्कोर से नहीं, बल्कि रियल-टाइम कैश फ्लो, डिजिटल ट्रांजैक्शन व्यवहार और मशीन लर्निंग इनसाइट्स के आधार पर किया जा सकेगा। इसके अलावा, ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 24 घंटे काम करने वाले बहुभाषी एआई वॉइस बॉट्स और पर्सनलाइज्ड वित्तीय सलाहकार बॉट्स को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और भाषाई रूप से विविध आबादी को अपनी मातृभाषा में बैंकिंग सेवाएं मिल सकेंगी।

डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम और साइबर सुरक्षा का अभेद्य घेरा

जैसे-जैसे वित्तीय लेनदेन डिजिटल हो रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के तौर-तरीके भी परिष्कृत होते जा रहे हैं। हाई-लेवल कमेटी के एजेंडे में साइबर सुरक्षा तंत्र को अभेद्य बनाना शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा गया है। एआई-बेस्ड रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ने की सिफारिश की जा रही है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी खाते से कोई असामान्य लेन-देन, असामान्य भौगोलिक लोकेशन से निकासी या संदिग्ध पैटर्न में फंड ट्रांसफर होता है, तो सिस्टम कुछ ही मिलीसेकंड में उस ट्रांजैक्शन को रोक देगा और संबंधित खाताधारक व बैंक को तुरंत अलर्ट भेजेगा। इसके साथ ही, डेटा प्राइवेसी, क्लाउड कंप्यूटिंग सुरक्षा और क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित खतरों से निपटने के लिए क्वांटम-रेजिस्टेंट एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल विकसित करने पर भी रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

वैश्विक स्तर के बड़े बैंकों का निर्माण और क्रेडिट फ्लो में सुधार

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनना है, तो देश के पास दुनिया के शीर्ष 10 या 20 बैंकों की सूची में शामिल होने वाले विशालकाय वित्तीय संस्थान होने चाहिए। वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) जैसे कुछ ही संस्थान वैश्विक रैंकिंग के करीब पहुंचते हैं। यह उच्च-स्तरीय समिति इस बात का भी अध्ययन कर रही है कि क्या सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में रणनीतिक विलय और समेकन (Consolidation) के जरिए 4 से 5 ऐसे 'ग्लोबल साइज मेगा बैंक' तैयार किए जा सकते हैं, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सेमीकंडक्टर प्लांट्स, रिन्यूएबल एनर्जी कॉरिडोर और भारी उद्योगों को एकमुश्त खरबों रुपये का वित्तपोषण प्रदान करने में सक्षम हों। इससे भारतीय कॉरपोरेट्स को बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी बैंकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और विदेशी मुद्रा जोखिम भी कम होगा।

एमएसएमई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सुलभ डिजिटल क्रेडिट

देश के आर्थिक विकास की असली ताकत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बसती है, जो रोजगार सृजन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। परंपरागत रूप से छोटे कारोबारियों को कोलेटरल (संपत्ति गिरवी रखने) की कमी के चलते बैंकों से आसानी से ऋण नहीं मिल पाता था। समिति की कार्ययोजना में 'अकाउंट एग्रीगेटर' (Account Aggregator) नेटवर्क, ओएनडीसी (ONDC) और ओपन क्रेडिट एनेबलमेंट नेटवर्क (OCEN) के जरिए कोलेटरल-मुक्त और त्वरित डिजिटल ऋण की व्यवस्था को अंतिम छोर तक पहुंचाना शामिल है। डिजिटल फुटप्रिंट और जीएसटी इनवॉयस के आधार पर छोटे दुकानदारों, ग्रामीण कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मात्र 5 मिनट में कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराने की प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे देश के अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का सीधा लाभ मिलेगा।

भविष्य की बैंकिंग और भारतीय वित्तीय तंत्र का वैश्विक प्रभाव

समिति का विजन केवल घरेलू सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय बैंकिंग मानकों को वैश्विक मंच पर एक बेंचमार्क के रूप में स्थापित करना है। भारत की यूपीआई (UPI) तकनीक पहले ही दुनिया भर के कई देशों में अपनी छाप छोड़ चुकी है। अब सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी डिजिटल रुपया (e-Rupee) को सीमा-पार व्यापार (Cross-Border Payments) और रेमिटेंस के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। विकसित भारत 2047 के वित्तीय रोडमैप के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आने वाले समय में भारतीय रुपया एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार मुद्रा के रूप में मजबूत हो और भारत का बैंकिंग सेक्टर लचीला, तकनीकी रूप से संप्रभु और आर्थिक झटकों को झेलने में पूरी तरह सक्षम बने। यह हाई-लेवल कमेटी आने वाले महीनों में अपनी विस्तृत अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद बैंकिंग नियमों में व्यापक विधायी और नीतिगत बदलावों का सिलसिला देखने को मिलेगा।