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Bengal Election : वोटिंग के बीच 7 जिलों में NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, आखिर क्या है मिशन धमाका का सच?

News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मोर्चा संभाल लिया है। सूबे के 7 संवेदनशील जिलों में NIA की टीमों ने एक साथ छापेमारी कर हड़कंप मचा दिया है। मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों और सुरक्षा के भारी इंतजामों के बीच केंद्रीय एजेंसी की इस सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ा दी है। चुनाव आयोग के निर्देश पर हो रही इस कार्रवाई का मकसद चुनाव के दौरान होने वाली संभावित हिंसा और विस्फोटक सामग्रियों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।NIA के रडार पर बंगाल के ये 7 संवेदनशील जिलेसूत्रों के मुताबिक, NIA की टीमें दक्षिण 24 परगना, नादिया, हुगली, वर्धमान और कोलकाता समेत कुल सात जिलों में डेरा डाले हुए हैं। इन जिलों में उन इलाकों को चिह्नित किया गया है, जहां हाल ही में भारी मात्रा में कच्चे बम और अवैध हथियार बरामद हुए थे। विशेष रूप से भांगड़ और मालदा जैसे इलाकों में केंद्रीय एजेंसी की पैनी नजर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन विस्फोटकों का इस्तेमाल मतदान को प्रभावित करने या मतदाताओं के बीच दहशत पैदा करने के लिए किया जाना था।79 कच्चे बमों की बरामदगी ने बढ़ाई चिंताNIA की इस कार्रवाई की असल कड़ी हाल ही में भांगड़ के उत्तर काशीपुर इलाके से जुड़े ‘बम कांड’ से है। यहाँ से करीब 79 कच्चे बम और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। गृह मंत्रालय के निर्देश पर NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि चुनाव से ठीक पहले बड़े पैमाने पर बम बनाने का काम चल रहा था। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब उन ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में हैं जो पर्दे के पीछे से इन गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं।सियासी पारा हाई: सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरारमतदान के दिन NIA की सक्रियता पर बंगाल की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल मतदाताओं को डराने और चुनाव में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम का स्वागत किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि निष्पक्ष और हिंसा मुक्त चुनाव कराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों की मौजूदगी बेहद जरूरी है।सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा और NIA की चौकसीचुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां एक ओर अर्धसैनिक बलों की 1000 से ज्यादा कंपनियां सुरक्षा में तैनात हैं, वहीं NIA की मौजूदगी ने ‘प्रिवेंटिव’ एक्शन को और मजबूत कर दिया है। बताया जा रहा है कि NIA की टीमें न केवल छापेमारी कर रही हैं, बल्कि बम डिस्पोजल स्क्वॉड के साथ मिलकर संदिग्ध ठिकानों की बारीकी से जांच भी कर रही हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि इन छापों में और क्या बड़े खुलासे होते हैं।