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Bharat Taxi: ओला-उबर को टक्कर देने आया ‘भारत टैक्सी’; अमित शाह ने किया देश के पहले सहकारी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का ऐलान

भारतीय मोबिलिटी और परिवहन क्षेत्र (Transport Sector) में एक बहुत बड़ी क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को एक भव्य कार्यक्रम में देश के पहले सहकारी मॉडल पर आधारित और 'ड्राइवर-स्वामित्व' वाले राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म 'भारत टैक्सी' (Bharat Taxi) के देशव्यापी मेगा विस्तार का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

अमित शाह ने बताया कि वर्तमान में गुजरात के 14 शहरों से शुरू हुई यह सेवा अगले दो वर्षों (2028 तक) के भीतर देश के 500 से अधिक छोटे-बड़े शहरों तक अपनी सेवाओं का विस्तार करेगी। आने वाले समय में यह प्लेटफॉर्म दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर और कोलकाता जैसे सभी मेट्रो व प्रमुख शहरों में ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसी निजी कंपनियों को सीधी चुनौती देता नजर आएगा।

क्या है 'जीरो-कमीशन' मॉडल, जो बदल देगा ड्राइवरों की किस्मत?

'भारत टैक्सी' की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी खासियत इसका 'जीरो-कमीशन मॉडल' (Zero-Commission Model) है। अभी तक निजी ऐप-आधारित कंपनियां ड्राइवरों की हर राइड की कमाई से 20 से 30 फीसदी तक का मोटा कमीशन खुद रख लेती हैं। लेकिन भारत टैक्सी में ऐसा नहीं होगा:

  • किराए की 100% राशि ड्राइवर को: इस सहकारी प्लेटफॉर्म पर यात्री द्वारा भुगतान की गई किराए की पूरी की पूरी (100%) राशि सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगी।

  • ड्राइवर ही होंगे मालिक: इसमें काम करने वाला कोई भी ड्राइवर सिर्फ एक सर्विस प्रोवाइडर या कर्मचारी नहीं, बल्कि इस पूरी सहकारी संस्था का 'सह-मालिक' (Co-owner) होगा। गृहमंत्री ने इन्हें केवल ड्राइवर नहीं बल्कि ‘सारथी’ नाम दिया है।

  • कम ब्याज पर लोन और बीमा: भविष्य में इस सहकारी मॉडल के तहत सभी पंजीकृत चालकों (सारथियों) को बहुत कम ब्याज दरों पर वाहन लोन, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और अन्य जरूरी वित्तीय व सामाजिक सुरक्षा योजनाएं देने का भी पूरा खाका तैयार किया गया है।

गांधीनगर के महात्मा मंदिर में भव्य लॉन्च: कई सरकारी विभागों से हुआ करार

गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित इस बेहद खास लॉन्चिंग कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस पहल को प्रशासनिक और तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और सूरत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स के साथ-साथ अहमदाबाद नगर निगम (AMC), GETCO और अहमदाबाद पुलिस जैसी शीर्ष सरकारी एजेंसियों के साथ कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिससे गुजरात में इसके सुचारू संचालन का रास्ता साफ हो गया है।

निजी ऑपरेटरों की एंट्री पर चालकों ने जताई चिंता

जहां इस लॉन्च को लेकर चारों तरफ जबरदस्त उत्साह का माहौल था, वहीं जमीनी स्तर पर शेयर होल्डर ड्राइवरों के भीतर एक छोटी सी चिंता भी उभर कर सामने आई। कार्यक्रम के दौरान कई स्थानीय टैक्सी चालकों ने सरकार और प्रबंधन से एक विशेष आग्रह किया। उनका कहना था कि किसी भी बड़े या निजी स्वामित्व वाले कमर्शियल टैक्सी ऑपरेटरों (Private Taxi Operators) को इस सहकारी फ्रेमवर्क में शामिल होने की अनुमति बिल्कुल न दी जाए। चालकों को डर है कि यदि बड़े कॉरपोरेट या निजी ऑपरेटर इसमें बिना किसी प्रतिबंध के प्रवेश पा गए, तो इस 'ड्राइवर-स्वामित्व' वाले प्लेटफॉर्म का मूल और पवित्र उद्देश्य पूरी तरह कमजोर हो सकता है।

'शोषण का होगा अंत'—निजी कंपनियों के मनमानेपन पर बरसे अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में निजी ऐप-आधारित टैक्सी प्लेटफॉर्म्स पर ड्राइवरों और यात्रियों दोनों के आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।

अमित शाह का बयान: "आज भारत के मोबिलिटी सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन है। निजी कंपनियों पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि वे ड्राइवरों से भारी-भरकम कमीशन वसूलती हैं, उनके हक के भुगतान में हफ्तों की देरी करती हैं और किसी भी छोटी बात पर मनमाने तरीके से चालकों का रजिस्ट्रेशन ब्लॉक (बंद) कर देती हैं। भारत टैक्सी को इसी तानाशाही और शोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह सहकारी (Cooperative) मॉडल पर खड़ा किया गया है।"

'महंगी होने की अफवाहें पूरी तरह गलत, हमारे आने से दूसरों के दाम घटे'

मार्केट में चल रही कुछ प्रतिस्पर्धी अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए अमित शाह ने कहा, "कुछ विरोधी और हितधारक बाजार में यह झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि भारत टैक्सी के किराए आम टैक्सियों से महंगे हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि हमारी दरें पूरी तरह से प्रतिस्पर्धी और जायज हैं। हकीकत तो यह है कि भारत टैक्सी के बाजार में कदम रखते ही कई बड़ी निजी कंपनियों ने डर के मारे अपने किराए कम करना शुरू कर दिए हैं, जो अपने आप में इस सहकारी मॉडल के सकारात्मक प्रभाव को साबित करता है।"

7 लाख से ज्यादा सारथी बने मालिक: आपको जानकर हैरानी होगी कि देश भर के 7,00,000 (7 लाख) से अधिक ऑटो और टैक्सी चालकों ने मात्र ₹100 का शेयर खरीदकर इस सहकारी संस्था का मालिकाना हक हासिल कर लिया है। यह अनूठा मॉडल न केवल ग्राहकों को एक बेहद सुरक्षित, पारदर्शी और उचित कीमत पर सफर की गारंटी देता है, बल्कि देश के लाखों ड्राइवरों को समाज में एक गरिमापूर्ण जीवन, सुरक्षा और समृद्धि की नई राह भी सुनिश्चित करता है।