
News India Live, Digital Desk: बिहार विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) डॉ. प्रेम कुमार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा की 28 में से 20 महत्वपूर्ण समितियों का पुनर्गठन कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले इस नए ढांचे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई दिग्गज चेहरों को जगह दी गई है। इस पुनर्गठन की सबसे खास बात यह है कि बाहुबली छवि वाले विधायकों को भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि एनडीए की सहयोगी पार्टी चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को फिलहाल किसी भी समिति की अध्यक्षता नहीं मिली है।बाहुबली विधायकों का बढ़ा दबदबाविधानसभा की इन कमेटियों में कुछ चर्चित नामों को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया है।मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह: एकमा के बाहुबली विधायक को पर्यटन उद्योग से संबंधित समिति का चेयरमैन बनाया गया है।अनंत कुमार सिंह: मोकामा के पूर्व विधायक और चर्चित नेता अनंत सिंह को पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।भाई वीरेंद्र (RJD): मुख्य विपक्षी दल आरजेडी के कद्दावर नेता भाई वीरेंद्र को भी एक महत्वपूर्ण समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।किस पार्टी को मिली कितनी अध्यक्षता?पुनर्गठित 20 समितियों में सत्ता पक्ष का भारी बोलबाला है, हालांकि विपक्षी दलों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।बीजेपी (BJP): सबसे ज्यादा 9 समितियों की कमान भाजपा के पास है।जेडीयू (JDU): मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी को 6 समितियों की अध्यक्षता मिली है।अन्य: आरएलएम (RLM), हम (HAM), आरजेडी (RJD), कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) को 1-1 समिति का अध्यक्ष पद मिला है।एलजेपी (LJP-R): चिराग पासवान की पार्टी और वामपंथी दलों (CPI-ML, CPM) को फिलहाल किसी समिति का नेतृत्व नहीं सौंपा गया है।स्पीकर और डिप्टी सीएम की भूमिकाविधानसभा की सबसे पावरफुल मानी जाने वाली विशेषाधिकार समिति, सामान्य प्रयोजन समिति और नियम समिति की कमान खुद स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार संभालेंगे। इन समितियों में पदेन सदस्य के रूप में दोनों डिप्टी सीएम—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—के साथ-साथ संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी रखा गया है। यह समितियां सदन के सुचारू संचालन और नियमों की व्याख्या के लिए उत्तरदायी होती हैं।इन समितियों का पुनर्गठन अभी बाकीअभी केवल 20 समितियों की सूची जारी की गई है, जबकि 8 अन्य समितियों के पुनर्गठन की अधिसूचना का इंतजार है। इनमें लोक लेखा समिति (PAC), प्राक्कलन समिति, आवास समिति, और सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। इन कमेटियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा, जिसके दौरान ये समितियां सरकारी कामकाज की निगरानी और विभागवार समीक्षा का कार्य करेंगी।
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