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Bihar Assembly Election : हेमंत सोरेन की सिफारिश पर तेजस्वी ने दिया टिकट, झारखंड में बदले का हिसाब बराबर

News India Live, Digital Desk: बिहार और झारखंड की सियासत में ‘गठबंधन धर्म’ के नए समीकरण उभरकर सामने आए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच एक बड़ी खबर झारखंड के सियासी गलियारों से आई है। बताया जा रहा है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विशेष सिफारिश पर आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने बिहार चुनाव में एक-दो उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। यह कदम न केवल दोनों दलों के बीच बढ़ती नजदीकी को दर्शाता है, बल्कि पिछले झारखंड चुनाव के उस ‘कर्ज’ को उतारने जैसा भी है, जहां हेमंत सोरेन ने आरजेडी को सम्मानजनक सीटें दी थीं।हेमंत की ‘पसंद’ पर तेजस्वी की मुहरझारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने शुरुआत में बिहार की 7 विधानसभा सीटों पर अपना दावा ठोका था। हालांकि, महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग के पेचीदा समीकरणों को देखते हुए तेजस्वी यादव ने जेएमएम को सीधे तौर पर सीटें देने के बजाय हेमंत सोरेन की पसंद के 1-2 उम्मीदवारों को आरजेडी के सिंबल पर चुनाव लड़ाने का बीच का रास्ता निकाला। सूत्रों के अनुसार, इन उम्मीदवारों का चयन सीमावर्ती क्षेत्रों (झारखंड-बिहार बॉर्डर) को ध्यान में रखकर किया गया है, जहां जेएमएम का प्रभाव आरजेडी के काम आ सकता है।झारखंड का ‘बदला’ बिहार में पूरा!इस सियासी लेन-देन को झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के संदर्भ में देखा जा रहा है। झारखंड में इंडिया गठबंधन के तहत हेमंत सोरेन ने आरजेडी को 6 सीटें दी थीं, जिनमें से आरजेडी ने 4 पर शानदार जीत दर्ज की थी। हेमंत सरकार के गठन के बाद आरजेडी के गोड्डा विधायक संजय प्रसाद यादव को कैबिनेट में जगह देकर सोरेन ने गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी। अब बिहार चुनाव में हेमंत सोरेन की सिफारिश को मानकर तेजस्वी यादव ने उस ‘राजनीतिक शिष्टाचार’ को आगे बढ़ाया है।गठबंधन की मजबूती का संदेशसियासी जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह फैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने वाला है। इससे यह संदेश गया है कि इंडिया गठबंधन के घटक दल केवल अपनी जीत के लिए नहीं, बल्कि सहयोगियों के मान-सम्मान के लिए भी काम कर रहे हैं। हालांकि, आरजेडी के भीतर कुछ दावेदारों में इस ‘बाहरी सिफारिश’ को लेकर दबी जुबान में नाराजगी भी है, लेकिन नेतृत्व ने इसे ‘बड़े लक्ष्य’ के लिए जरूरी कुर्बानी बताया है।विपक्ष का तंज: “उधार के चेहरों पर टिकी है लालटेन”इस घटनाक्रम पर एनडीए (NDA) गठबंधन ने चुटकी ली है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि आरजेडी के पास अब अपने जिताऊ उम्मीदवार नहीं बचे हैं, इसलिए उसे पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री से नामों की लिस्ट मांगनी पड़ रही है। विपक्ष ने इसे “मजबूरी का गठबंधन” करार देते हुए कहा कि बिहार की जनता बाहरी सिफारिशों के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के नाम पर वोट देगी।