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Bihar Corruption Control : घूसखोरों की अब खैर नहीं बिहार के इन 3 जिलों में खुलेंगे विशेष निगरानी थाने, स्पीडी ट्रायल से 3 साल में मिलेगी सजा

News India Live, Digital Desk : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बिहार सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक मेगा प्लान तैयार किया है। अब केवल पटना स्थित मुख्यालय पर निर्भर रहने के बजाय, सरकार जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत कर रही है। इसके तहत राज्य के महत्वपूर्ण जिलों में नए निगरानी थाने (Vigilance Police Stations) खोले जा रहे हैं।1. इन 3 जिलों में खुलेंगे नए निगरानी थानेनिगरानी विभाग ने केसों की बढ़ती संख्या और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सीमांचल के तीन प्रमुख जिलों में नए थाने खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है:पूर्णिया (Purnia)अररिया (Araria)कटिहार (Katihar)इन थानों के खुलने से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी और शिकायतकर्ताओं को पटना के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।2. 3 साल के अंदर फैसला: ‘स्पीडी ट्रायल’ पर जोरसरकार का मुख्य फोकस केवल गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि सजा दिलाने पर भी है। नए आपराधिक कानूनों के तहत यह लक्ष्य रखा गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों की कानूनी प्रक्रिया 3 साल के भीतर पूरी कर ली जाए। इसके लिए:निगरानी कोर्ट की संख्या बढ़ाई जा रही है।पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।भ्रष्टाचार उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोक अभियोजकों और जांचकर्ताओं को सम्मानित किया जा रहा है।3. शिकायतकर्ता को मिलेंगे अपने पैसे वापसभ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में लोगों का भरोसा जीतने के लिए विभाग ने एक अनूठी पहल की है। जिन लोगों ने घूसखोरों को पकड़ने (Trapping) के लिए अपनी राशि विभाग को दी थी, वह राशि अब सीधे उनके बैंक खातों में वापस भेजी जा रही है। इससे आम जनता में यह संदेश गया है कि विभाग पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।4. डिजिटल फुटप्रिंट और सख्त निगरानीअब भ्रष्टाचार की जांच में केवल कागजों पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। विभाग डिजिटल साक्ष्यों, बैंक स्टेटमेंट्स और आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामलों में तकनीकी सर्विलांस का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। हाल ही में शिक्षा विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के बड़े अधिकारियों पर हुई कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा है।