
News India Live, Digital Desk : हिंदी सिनेमा के इतिहास में मोहम्मद रफी और किशोर कुमार, ये दो ऐसे नाम हैं जिनकी आवाज ने दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज किया। हालांकि, 70 के दशक में एक ऐसा मोड़ भी आया जब फिल्म जगत में किशोर कुमार की लोकप्रियता चरम पर थी और रफी साहब को कुछ फिल्ममेकर्स कमतर आंकने लगे थे। इसी दौर का एक बेहद कड़वा किस्सा महान निर्देशक यश चोपड़ा से जुड़ा है, जिन्होंने अनजाने में या जानबूझकर मोहम्मद रफी का अपमान कर दिया था, जिसे देखकर किशोर कुमार भी खुद पर काबू नहीं रख पाए थे।छोटे पार्ट के लिए रफी साहब को बुलाया, फिर कर दी अनदेखी यह किस्सा साल 1977 में आई फिल्म ‘दूसरा आदमी’ की रिकॉर्डिंग के दौरान का है। फिल्म के मशहूर गाने ‘क्या मौसम है, ऐ दीवाने दिल’ के लिए संगीतकार राजेश रोशन ने जिद की थी कि इस गाने में किशोर कुमार के साथ मोहम्मद रफी की आवाज भी होनी चाहिए। यश चोपड़ा पहले तो हिचकिचाए क्योंकि गाना मुख्य रूप से किशोर कुमार और लता मंगेशकर पर केंद्रित था और रफी साहब का पार्ट बहुत छोटा था। हालांकि, राजेश रोशन के कहने पर रफी साहब मान गए और उन्होंने बेहतरीन रिकॉर्डिंग दी।गुलदस्ते ने बिगाड़ दिया खेल: किशोर कुमार हुए आगबबूला रिकॉर्डिंग के बाद जब यश चोपड़ा सिंगर्स को सम्मानित करने आए, तो उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसने सबको हैरान कर दिया। यश चोपड़ा दो फूलों के गुलदस्ते लेकर आए। उन्होंने पहला गुलदस्ता लता मंगेशकर को दिया। उनके बगल में ही मोहम्मद रफी खड़े थे, लेकिन यश चोपड़ा ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए सीधे किशोर कुमार को दूसरा गुलदस्ता थमा दिया। यह देखकर किशोर कुमार सन्न रह गए। उन्हें अपने सीनियर कलाकार का यह अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ।स्टूडियो छोड़कर चले गए रफी साहब किशोर कुमार ने तुरंत यश चोपड़ा को टोका और सवाल किया कि बीच में खड़े रफी साहब को छोड़कर वे उन्हें गुलदस्ता क्यों दे रहे हैं? यश चोपड़ा जब तक अंदर से तीसरा गुलदस्ता लेकर आए, तब तक आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने के कारण मोहम्मद रफी निराश होकर वहां से जा चुके थे। किशोर कुमार भी रफी साहब की इस बेइज्जती को देख नहीं पाए और वे भी वहां से चले गए। इस घटना ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं और यह दिखाया था कि किशोर कुमार अपने प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद रफी साहब का कितना सम्मान करते थे।
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