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Child Treatment Safety : डॉक्टरों की सख्त चेतावनी ,दवाई देते वक्त बच्चे पर मत करना ये 4 ग़लतियाँ, जान जा सकती है!

News India Live, Digital Desk: Child Treatment Safety : बच्चों की सेहत की बात आती है, तो हम माता-पिता के लिए यह दुनिया का सबसे अहम काम होता है. लेकिन कभी-कभी, अनजाने में ही सही, दवाइयाँ देते समय हम कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जो बच्चों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती हैं. डॉक्टर भी हमें अक्सर इन गलतियों से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि थोड़ी सी भी चूक जानलेवा हो सकती है.आज हम ऐसी ही 4 बड़ी गलतियों के बारे में बात करेंगे, जो अक्सर दवाइयाँ देते समय हम करते हैं, और जिन्हें बिलकुल नहीं दोहराना चाहिए:बड़ों वाली दवाई बच्चे को देना:ग़लती: अक्सर हम सोचते हैं कि अगर बड़ों को इसी बीमारी की ये दवाई दी जाती है, तो बच्चे को थोड़ी कम मात्रा में वही दे सकते हैं.क्यों ख़तरनाक? यह बहुत बड़ी ग़लती है! बच्चों के शरीर बड़ों से अलग होते हैं. उनकी उम्र, वज़न और मेटाबॉलिज़्म के हिसाब से ही दवाई की डोज़ (खुराक) तय की जाती है. बड़ों की दवाई बच्चे को देना बहुत ज़हरीला हो सकता है, क्योंकि उसकी मात्रा बच्चे के लिए बहुत ज़्यादा होगी. हमेशा बच्चों के लिए बनी दवाई और उनके डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक ही दें.पुरानी दवाई या बिना डॉक्टर की सलाह के देना:ग़लती: जब बच्चा बीमार पड़ता है, तो हम पुरानी बची हुई दवाई दे देते हैं, या फिर बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी दवाई उठा कर दे देते हैं.क्यों ख़तरनाक? हर बार बच्चे की बीमारी का कारण अलग हो सकता है. हो सकता है कि पिछली बार वाली दवाई इस बार की बीमारी पर असर ही न करे, या फिर उलटा नुक़सान कर दे. साथ ही, एक्सपायरी डेट वाली दवाई या सही तरीक़े से स्टोर न की गई दवाई भी ज़हर बन सकती है. हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही नई दवाई ख़रीदें और दें.दवाई को खाने या पीने की चीज़ में बिना पूछे मिलाना:ग़लती: बच्चे दवाई आसानी से नहीं पीते, तो हम अक्सर उनकी दूध, जूस या खाने की किसी चीज़ में मिलाकर दे देते हैं, ताकि वे पी लें.क्यों ख़तरनाक? यह हर बार सही नहीं होता. कुछ दवाइयों का असर, अगर उन्हें किसी ख़ास खाने या पीने की चीज़ में मिला दिया जाए, तो कम हो जाता है या ख़त्म हो जाता है. कई बार स्वाद बदलने से बच्चा फिर वह चीज़ भी खाना बंद कर देता है. दवाई को किस चीज़ के साथ मिलाना सही रहेगा, ये हमेशा डॉक्टर से ज़रूर पूछें.खु़राक़ को आधा करना या दवाई बीच में बंद कर देना:ग़लती: जब बच्चे को थोड़ा ठीक महसूस होता है, तो हम दवाई की खुराक कम कर देते हैं या दवाई बीच में ही देना बंद कर देते हैं, यह सोचकर कि अब ज़रूरत नहीं है.क्यों ख़तरनाक? डॉक्टर हमें जितनी मात्रा और जितने दिन तक दवाई देने को कहते हैं, वह शरीर में संक्रमण को पूरी तरह ख़त्म करने के लिए होती है. अगर आप दवाई बीच में बंद कर देते हैं या खुराक कम करते हैं, तो बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती और हो सकता है कि वह दोबारा और ज़्यादा तेज़ी से वापस आ जाए, और इस बार उस दवाई का असर भी न हो. दवाई का कोर्स हमेशा पूरा करें.याद रखें, बच्चों को दवाई देना कोई छोटी बात नहीं है. यह हमेशा एक ज़िम्मेदारी वाला काम होता है. जब भी बच्चों को दवाई दें, हमेशा डॉक्टर की सलाह को ध्यान से सुनें और उन्हीं के कहे अनुसार चलें. उनकी सेहत सबसे बढ़कर है!