
भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे और वित्तीय अनुशासन का सकारात्मक असर एक बार फिर सरकारी खजाने पर साफ दिखाई देने लगा है। चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर तक देश के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (Net Direct Tax Collection) में सालाना आधार पर 13.21 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक 13.38 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम शुद्ध प्रत्यक्ष कर राजस्व जुटा लिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वाणिज्यिक केंद्रों से लेकर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के कॉरपोरेट गलियारों तक इस रिकॉर्ड संग्रह को कारोबारी गतिविधियों की तेज रफ्तार और कर अनुपालन में आए ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। प्रत्यक्ष करों में यह तेज उछाल स्पष्ट संकेत दे रहा है कि वैश्विक मंदी की आहटों के बीच भी भारतीय घरेलू मांग, कॉरपोरेट मुनाफा और व्यक्तिगत आय का स्तर मजबूती से विस्तार कर रहा है।
कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स में भारी बढ़ोतरी
टैक्स संग्रह के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इस शानदार प्रदर्शन में कॉरपोरेट जगत और व्यक्तिगत आयकरदाताओं दोनों का बराबर का योगदान रहा है। 14 अक्टूबर तक की अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 20.58 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए लगभग 5.99 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। कंपनियों के मुनाफे में हुई इस वृद्धि ने साबित कर दिया है कि भारतीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की बैलेंस शीट लगातार मजबूत हो रही है। वहीं दूसरी तरफ, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, बढ़कर 6.92 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। इसके अलावा शेयर बाजार में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से मिलने वाले राजस्व में भी मजबूत इजाफा देखने को मिला है, जिसने कुल संग्रह के ग्राफ को और ऊंचा उठा दिया है।
ग्रॉस कलेक्शन 16 लाख करोड़ पार और रिफंड में 24 फीसदी का इजाफा
यदि टैक्स रिफंड को घटाने से पहले के सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह (Gross Direct Tax Collection) की बात करें, तो इसमें लगभग 14.89 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है। चालू कारोबारी सत्र में अब तक का कुल ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 16.03 लाख करोड़ रुपये के पार निकल चुका है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 13.95 लाख करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया था। इस व्यवस्था की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि टैक्सपेयर्स को समय पर रिफंड जारी करने की गति में भी भारी तेजी आई है। आयकर विभाग ने 1 अप्रैल से 14 अक्टूबर के बीच 2.65 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 24.22 प्रतिशत अधिक है। आधुनिक एआई संचालित प्रोसेसिंग सिस्टम और डिजिटल सुधारों के चलते अब करदाताओं के खातों में रिफंड सीधे और बिना किसी प्रशासनिक देरी के ट्रांसफर हो रहे हैं, जिससे कर प्रणाली पर जनता का भरोसा गहरा हुआ है।
डिजिटल सुधार, एआई तकनीक और बेहतर कर अनुपालन का असर
प्रत्यक्ष कर संग्रह में यह निरंतर उछाल केवल सामान्य आर्थिक विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि आयकर विभाग द्वारा अपनाई गई अत्याधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स की भी बड़ी भूमिका है। विभाग द्वारा पेश किए गए एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) और प्रोजेक्ट इनसाइट जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स के माध्यम से वित्तीय लेन-देन पर रियल-टाइम नजर रखी जा रही है। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट और बड़े बैंक ट्रांजैक्शंस की जानकारी सीधे करदाताओं के पोर्टल पर दिखाई देती है, जिससे कर चोरी की गुंजाइश लगभग समाप्त हो गई है। लखनऊ के गोमती नगर और हजरतगंज जैसे क्षेत्रों में स्थित चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्मों और टैक्स सलाहकारों का कहना है कि नोटिस आधारित जांच के बजाय फेसलेस असेसमेंट और ई-वेरिफिकेशन ने आम प्रोफेशनल्स और व्यापारियों को समय पर व सटीक टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित किया है।
राजकोषीय घाटा नियंत्रण और विकास योजनाओं को मिलेगी नई गति
टैक्स राजस्व में दोहरे अंकों की यह मजबूत वृद्धि केंद्र सरकार के लिए राजकोषीय मोर्चे पर एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। केंद्रीय बजट में तय किए गए पूरे साल के प्रत्यक्ष कर लक्ष्यों की दिशा में यह प्रगति बेहद उत्साहजनक है, जिससे चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.9 प्रतिशत से नीचे रखने के सरकारी लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी आसानी होगी। खजाने में अतिरिक्त पूंजी आने से सरकार को रेलवे आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े पूंजीगत व्यय (Capex) को बिना किसी वित्तीय दबाव के आगे बढ़ाने की खुली छूट मिलेगी। इसके साथ ही, प्रत्यक्ष कर संग्रह का यह मजबूत रुख त्योहारी सीजन के दौरान ग्रामीण और शहरी खपत को बढ़ावा देने वाली विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्बाध वित्तपोषण की भी गारंटी देता है।
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