
देश भर के लाखों पेंशनर्स के मन में इन दिनों एंप्लाइज पेंशन स्कीम यानी EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को लेकर कई तरह के सवाल और उम्मीदें बनी हुई हैं। लंबे समय से देश के विभिन्न हिस्सों से यह मांग जोर पकड़ रही थी कि न्यूनतम मासिक पेंशन को मौजूदा ₹1,000 से बढ़ाकर सीधे ₹7,500 कर दिया जाए। बढ़ती महंगाई, दवाइयों के खर्च और रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ बुजुर्ग पेंशनर्स इस दिशा में सरकार के किसी बड़े फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, संसद के मानसून सत्र के दौरान 10 अगस्त को लोकसभा में इस अति संवेदनशील मुद्दे पर औपचारिक सवाल पूछा गया, जिसके बाद सरकार की तरफ से जो आधिकारिक जवाब सामने आया है, उसने साफ कर दिया है कि फिलहाल न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर क्या स्थिति है और पेंशनर्स को अभी कितना इंतजार करना पड़ सकता है।
लोकसभा में उठी मांग और सरकार का आधिकारिक रुख
लोकसभा में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी द्वारा सरकार से यह सीधा सवाल किया गया था कि क्या कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-1995) के अंतर्गत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की कोई आधिकारिक योजना सरकार के विचाराधीन है। इसके साथ ही उन्होंने कुल पेंशनर्स की संख्या और सुप्रीम कोर्ट के उच्च वेतन पर पेंशन संबंधी फैसले के बाद के लाभार्थियों का ब्योरा भी मांगा था। इस सवाल के लिखित जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्पष्ट किया कि सरकार वर्तमान में EPS-1995 के दायरे में आने वाले सभी पात्र पेंशनर्स को ₹1,000 प्रति माह की न्यूनतम पेंशन दे रही है। इस न्यूनतम राशि को बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से लगातार विशेष बजटीय सहायता भी मुहैया कराई जाती है। हालांकि, सरकार के इस जवाब में ₹7,500 की मांग को तत्काल प्रभाव से मंजूरी देने या इसे लागू करने की किसी भी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि फिलहाल मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी।
पेंशनर्स का राष्ट्रव्यापी आंदोलन और वित्तीय चुनौतियां
यह पूरा मामला केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सामाजिक और संगठनात्मक संघर्ष भी जुड़ा हुआ है। 'ईपीएस-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति' (National Agitation Committee) के बैनर तले देश भर के पेंशनर्स लगातार देश की राजधानी दिल्ली समेत कई प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शन कर चुके हैं। हाल ही में 5 अगस्त को भी दिल्ली में पेंशनर्स ने अपनी इन मांगों को लेकर जोरदार आवाज उठाई थी। उनकी मुख्य मांगों में न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 करने के साथ-साथ इसमें महंगाई भत्ते (DA) का लाभ जोड़ना भी शामिल है। हालांकि, दूसरी तरफ सरकार के सामने अपनी वित्तीय सीमाएं और भविष्य की आर्थिक देनदारियां भी एक बड़ी चुनौती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक देश भर में 85,84,604 से अधिक पेंशनर्स EPS के जरिए हर महीने पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, जिन पर अब तक कुल ₹15,819 करोड़ से ज्यादा की राशि वितरित की जा चुकी है। इतने विशाल पेंशनर आधार को देखते हुए न्यूनतम पेंशन में एकमुश्त भारी बढ़ोतरी करने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है, जिसके कारण सरकार काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
उच्च वेतन पर पेंशन और PPO जारी होने के आंकड़े
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार ने उन कर्मचारियों को भी राहत दी है जो लंबे समय से उच्च वेतन पर पेंशन की कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 4 नवंबर 2022 के फैसले के बाद, पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को वास्तविक मूल वेतन (Actual Basic Salary) के आधार पर उच्च पेंशन का विकल्प चुनने की अनुमति दी गई थी। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस कानूनी प्रक्रिया और नियमों के तहत अब तक रिटायर हो चुके पात्र आवेदकों के लिए कुल 1,49,806 पेंशन पेमेंट ऑर्डर्स यानी PPOs जारी किए जा चुके हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जहां एक तरफ उच्च वेतन श्रेणी के कुछ चुनिंदा लाभार्थियों को इसका कानूनी लाभ मिल रहा है, वहीं सामान्य श्रेणी के करोड़ों पेंशनर्स के लिए ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन की मांग फिलहाल कागजों पर ही बनी हुई है और अधिकारिक रूप से अभी ₹1,000 की न्यूनतम मासिक पेंशन ही प्रभावी है।
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