
रिटायरमेंट के बाद हर वरिष्ठ नागरिक की पहली प्राथमिकता अपनी जीवनभर की जमा पूंजी को पूरी तरह सुरक्षित रखना और उससे नियमित, निश्चित आय प्राप्त करना होती है। भारतीय वित्तीय बाजार में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी बैंक एफडी दशकों से बुजुर्गों की पहली पसंद रही है, वहीं केंद्र सरकार द्वारा संचालित वरिष्ठ नागरिक बचत योजना यानी सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम भी लगातार मजबूत रिटर्न और सरकारी गारंटी के चलते बेहद लोकप्रिय हुई है। वर्तमान ब्याज दरों के दौर में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवेशकों के मन में यह सवाल सबसे आम है कि वे अपना पैसा बैंक एफडी में लगाएं या पोस्ट ऑफिस व अधिकृत बैंकों में मिलने वाली एससीएसएस में डालें। दोनों ही योजनाएं कम जोखिम वाले विकल्पों में आती हैं, लेकिन उनके नियम, लिक्विडिटी, भुगतान चक्र और अंतिम रिटर्न में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
ब्याज दरों और सरकारी सुरक्षा की सीधी तुलना
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना को सीधे भारत सरकार का समर्थन प्राप्त होता है, जिससे इसमें किसी भी प्रकार का क्रेडिट जोखिम या डिफॉल्ट का खतरा नहीं रहता। वर्तमान में सरकार इस योजना पर 8.20 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज प्रदान कर रही है, जिसकी समीक्षा वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही में की जाती है। दूसरी तरफ, देश के प्रमुख सरकारी और निजी बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 5 वर्ष की एफडी पर लगभग 7.00 प्रतिशत से लेकर 7.75 प्रतिशत तक का ब्याज ऑफर कर रहे हैं। बैंक एफडी में जमाकर्ता की 5 लाख रुपये तक की मूल और ब्याज राशि डीआईसीजीसी (DICGC) नियमों के तहत सुरक्षित रहती है। इस प्रकार सुरक्षा के मामले में दोनों ही मजबूत हैं, लेकिन ब्याज दर के मामले में सरकारी स्कीम स्पष्ट रूप से बढ़त बनाए हुए है।
ब्याज भुगतान की शर्तें और कैश फ्लो का तरीका
नियमित खर्चों के प्रबंधन के लिए यह जानना जरूरी है कि ब्याज का भुगतान कब और कैसे होता है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में ब्याज का भुगतान केवल त्रैमासिक आधार पर यानी हर तीन महीने में 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को सीधे निवेशक के बचत खाते में भेजा जाता है। इसमें संचयी यानी कंपाउंडिंग के साथ मैच्योरिटी पर एकमुश्त पैसा लेने का विकल्प उपलब्ध नहीं होता। इसके विपरीत बैंक एफडी में निवेशकों को भारी लचीलापन मिलता है। बैंक एफडी में निवेशक अपनी सुविधानुसार मासिक पेंशन की तरह ब्याज ले सकते हैं, तिमाही आधार पर भुगतान चुन सकते हैं या फिर संचयी विकल्प चुनकर पूरी राशि को मैच्योरिटी पर चक्रवृद्धित होकर एकमुश्त प्राप्त कर सकते हैं।
निवेश सीमा और समय अवधि के कड़े नियम
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में एक व्यक्ति अधिकतम 30 लाख रुपये तक का ही निवेश कर सकता है। यदि पति और पत्नी दोनों 60 वर्ष से अधिक हैं, तो वे अलग-अलग या संयुक्त रूप से 30-30 लाख यानी कुल 60 लाख रुपये तक लगा सकते हैं। इस योजना का लॉक-इन पीरियड 5 वर्ष का होता है, जिसे मैच्योरिटी के बाद 3 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाने की सुविधा मिलती है। दूसरी तरफ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं होती, निवेशक अपनी इच्छा और वित्तीय क्षमता के अनुसार 50 लाख, 1 करोड़ या उससे अधिक का निवेश भी अलग-अलग बैंकों में कर सकते हैं। बैंक एफडी की अवधि 7 दिनों की न्यूनतम सीमा से लेकर 10 वर्षों तक अपनी जरूरत के हिसाब से चुनी जा सकती है।
₹15 लाख के निवेश पर रिटर्न का पूरा गणित
यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 15 लाख रुपये की एकमुश्त राशि को 5 वर्ष की अवधि के लिए निवेश करता है, तो दोनों माध्यमों में आय का अंतर साफ देखा जा सकता है। एससीएसएस में 8.20 प्रतिशत की दर से निवेशक को हर तिमाही लगभग 30,750 रुपये की निश्चित आय मिलती है, जो एक वर्ष में 1,23,000 रुपये बैठती है। इस तरह 5 वर्षों के पूरे कार्यकाल में कुल ब्याज आय 6,15,000 रुपये हो जाती है। वहीं यदि यही 15 लाख रुपये किसी बैंक की 5 साल की एफडी में 7.25 प्रतिशत साधारण त्रैमासिक भुगतान दर पर रखे जाएं, तो प्रति तिमाही लगभग 27,188 रुपये और सालाना 1,08,750 रुपये प्राप्त होंगे। 5 साल में एफडी से कुल ब्याज 5,43,750 रुपये बनेगा। इस प्रकार 15 लाख रुपये पर सीधे तौर पर सरकारी योजना में 71,250 रुपये अधिक मुनाफा मिलता है।
टैक्स छूट और टीडीएस के क्या हैं नियम
आयकर के लिहाज से दोनों योजनाओं में कुछ समानताएं और कुछ अंतर हैं। पुरानी कर व्यवस्था के तहत 5 वर्षीय टैक्स सेवर बैंक एफडी और एससीएसएस दोनों में धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। हालांकि नई कर व्यवस्था में यह छूट लागू नहीं होती। ब्याज से होने वाली कमाई पर दोनों ही जगह निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। आयकर कानून की धारा 80टीटीबी के अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये तक की कुल ब्याज आय (एफडी और बचत दोनों मिलाकर) पर पूर्ण टैक्स छूट मिलती है। यदि कुल ब्याज 50,000 रुपये से अधिक हो जाता है, तो बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा टीडीएस काटा जाता है, जिसे फॉर्म 15एच भरकर टाला जा सकता है यदि कुल कर योग्य आय शून्य हो।
प्री-मैच्योर निकासी और लिक्विडिटी की स्थिति
आपातकालीन स्थिति में पैसे निकालने के नियम बैंक एफडी में अधिक सरल हैं। अधिकांश बैंक मामूली ब्याज कटौती या 0.5 से 1 प्रतिशत की पेनल्टी लेकर एफडी को समय से पहले तोड़ने की अनुमति देते हैं और पैसा तुरंत खाते में आ जाता है। इसके अलावा बैंक एफडी के बदले 90 से 95 प्रतिशत तक लोन लेने की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। दूसरी ओर, एससीएसएस में यदि खाता खोलने के 1 वर्ष के भीतर पैसा निकाला जाता है तो कोई ब्याज नहीं मिलता और दिया गया ब्याज मूलधन से काट लिया जाता है। 1 से 2 वर्ष के बीच निकासी पर मूलधन का 1.5 प्रतिशत और 2 वर्ष बाद निकालने पर मूलधन का 1 प्रतिशत पेनल्टी के रूप में काटा जाता है, साथ ही इसके एवज में बैंक लोन की सुविधा भी आसानी से नहीं मिलती।
रिटायरमेंट फंड के लिए सही रणनीति का चुनाव
बुजुर्ग निवेशकों को अपने पूरे फंड को किसी एक जगह लगाने के बजाय संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। पहली प्राथमिकता के तौर पर अधिकतम 30 लाख रुपये की सीमा तक एससीएसएस में निवेश करना चाहिए ताकि 8.20 प्रतिशत की उच्च और गारंटीड दर का लाभ उठाया जा सके। इसके बाद बची हुई अतिरिक्त पूंजी और आपातकालीन फंड को 1 से 3 साल की अलग-अलग बैंक एफडी में बांटकर लगाना समझदारी भरा फैसला है, जिससे नियमित नकदी की कमी न हो और जरूरत पड़ने पर आसानी से पैसा निकाला जा सके।
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