
देश के पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड सेक्टर में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। नियामक संस्था ने देश की दो दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) बहुराष्ट्रीय कंपनियों—नेस्ले इंडिया (Nestle India) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL)—को खाद्य सुरक्षा मानकों, भ्रामक विज्ञापनों और लेबलिंग नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) थमा दिए हैं। खाद्य सुरक्षा नियामक की इस त्वरित कार्रवाई से प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री और रिटेल मार्केट में हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) कार्यालय से लेकर दिल्ली मुख्यालय तक खाद्य सुरक्षा अधिकारी पैकेज्ड उत्पादों की गुणवत्ता, अतिरिक्त शुगर (Added Sugar), सोडियम और पोषण दावों की गहन जांच-पड़ताल में जुट गए हैं।
किस आधार पर जारी किए गए एफएसएसएआई के नोटिस?
नियामक सूत्रों के अनुसार, एफएसएसएआई ने यह कदम उत्पादों के लेबल पर किए जाने वाले पोषण संबंधी दावों और उनकी वास्तविक रासायनिक संरचना के बीच सामने आए अंतर के बाद उठाया है। नोटिस में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है:
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भ्रामक स्वास्थ्य दावे (Misleading Health Claims): पैकेजिंग पर 'हेल्दी', 'नेचुरल' या 'इम्यूनिटी बूस्टर' जैसे बड़े दावों के बावजूद उत्पादों में अतिरिक्त चीनी (Added Sugar), प्रिजर्वेटिव्स और सैचुरेटेड फैट की ऊंची मात्रा का पाया जाना।
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फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (FOPNL) का उल्लंघन: पैकेजिंग के मुख्य भाग पर पोषक तत्वों की सही जानकारी प्रदर्शित न करने और सामग्री की सूची में छिपी हुई शर्करा (Hidden Sugars जैसे माल्टोडेक्सट्रिन, कॉर्न सिरप) को अस्पष्ट रखने का आरोप।
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बेबी फूड और हेल्थ ड्रिंक्स का विवाद: विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाए जाने वाले सिरियल्स, माल्ट-बेस्ड ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट स्नैक्स में अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में भारतीय बाजार के लिए अलग फॉर्मूलेशन अपनाने की शिकायतों पर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
नेस्ले इंडिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) पर क्या हैं आरोप?
नेस्ले इंडिया पर शिशु आहार (Baby Food) और ब्रेकफास्ट सीरियल्स में अतिरिक्त चीनी की मात्रा तथा अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के दोहरे मानकों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। नियामक ने कंपनी से स्पष्ट करने को कहा है कि उत्पादों में सुक्रोज और रिफाइंड शुगर की मात्रा का स्तर क्या निर्धारित मानकों के अनुकूल है और क्या लेबल पर इसे सही ढंग से उपभोक्ताओं के सामने रखा गया है।
वहीं, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) को उसके पैकेज्ड फूड पोर्टफोलियो—जिसमें सूप, नूडल्स, सॉस और हेल्थ ड्रिंक्स शामिल हैं—में सोडियम (नमक), आर्टिफिशियल फ्लेवर्स और भ्रामक विज्ञापन दावों को लेकर नोटिस भेजा गया है। नियामक ने कंपनियों को अपनी पैकेजिंग में प्रयुक्त शब्दावली, लैब टेस्टिंग रिपोर्ट्स और न्यूट्रिशनल ब्रेकडाउन के साथ 15 दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।
नियामक की सख्ती: तय समय में जवाब न देने पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कंपनियों द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act) के तहत विधिक कार्रवाई की जा सकती है:
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उत्पादों को बाजार से वापस मंगाना (Product Recall): मानकों का उल्लंघन करने वाले विशिष्ट बैचों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाकर उन्हें सुपरमार्केट्स और किराना दुकानों से वापस मंगाया जा सकता है।
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भारी जुर्माना और विज्ञापन पर प्रतिबंध: खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 52 और 53 के तहत भ्रामक विज्ञापनों और सब-स्टैंडर्ड लेबलिंग के लिए ₹10 लाख तक का जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी दी जा सकती है।
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लेबलिंग में अनिवार्य संशोधन: कंपनियों को अपने उत्पाद पैकेटों के फॉन्ट साइज, इंग्रीडिएंट लिस्ट और वार्निंग लेबल्स को संशोधित करने का वैधानिक आदेश दिया जा सकता है।
कंपनियों का प्रारंभिक पक्ष: मानकों के पूर्ण अनुपालन का दावा
नोटिस मिलने के बाद दोनों प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों के प्रवक्ताओं ने प्रारंभिक बयानों में कहा है कि वे भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सभी घरेलू दिशा-निर्देशों और कानूनी नियमों का कड़ाई से अनुपालन करते हैं। कंपनियों का कहना है कि वे नियामक के नोटिस की समीक्षा कर रहे हैं और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी वैज्ञानिक साक्ष्य, लैब रिपोर्ट्स और स्पष्टीकरण प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर देंगे। कंपनियों ने दोहराया कि उपभोक्ता स्वास्थ्य और गुणवत्ता हमेशा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं सतर्कता और जांच के जरूरी नियम?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों और डर्मेटोलॉजिस्ट/डायटीशियन का कहना है कि पैकेज्ड फूड खरीदते समय उपभोक्ताओं को केवल फ्रंट कवर पर लिखे आकर्षक दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए:
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इंग्रीडिएंट लिस्ट पर नजर डालें: पैकेट के पीछे सामग्री की सूची में जो तत्व सबसे पहले लिखे होते हैं, पैकेट में उनकी मात्रा सबसे अधिक होती है। यदि पहले तीन तत्वों में 'शुगर', 'पाम ऑयल' या 'मैदा' लिखा है, तो वह उत्पाद दैनिक स्वास्थ्य के लिए मुफीद नहीं है।
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पर सर्विंग (Per Serving) साइज का गणित समझें: कई बार कंपनियां प्रति 100 ग्राम के बजाय प्रति 15-20 ग्राम सर्विंग का पोषण मान दिखाती हैं, जिससे चीनी और सोडियम की मात्रा कम नजर आती है। कुल मात्रा के हिसाब से कैलोरी और फैट का मिलान करें।
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एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और शिकायत: प्रत्येक खाद्य उत्पाद पर 14 अंकों का FSSAI लाइसेंस नंबर अनिवार्य होता है। यदि उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध लगे, तो उपभोक्ता FSSAI के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' (Food Safety Connect) मोबाइल ऐप या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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