
वैश्विक वित्तीय बाजारों से आ रहे आर्थिक संकेतों के बीच बहुमूल्य धातुओं यानी सोने और चांदी की कीमतों में सुस्ती और मुनाफावसूली का दौर देखा जा रहा है। विदेशी वायदा बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर सोने और चांदी के भाव ऊपरी स्तरों से फिसलकर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी साफ देखने को मिल रहा है। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई और जयपुर जैसे प्रमुख सर्राफा बाजारों में त्योहारी खरीदारी की तैयारी कर रहे उपभोक्ताओं और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह नरमी चर्चा का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में आई मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के नीतिगत रुख को लेकर बने सतर्क माहौल के चलते विदेशी ट्रेडर्स ने गोल्ड और सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट्स में हल्की बिकवाली की है, जिससे बुलियन कीमतों में यह तकनीकी सुधार (Correction) दर्ज हुआ है।
आखिर विदेशी बाजारों में क्यों सस्ता हुआ सोना और चांदी?
विदेशी बाजारों में कीमती धातुओं के टूटने और दाम नीचे आने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
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मजबूत डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के स्थिर और मजबूत होने से अन्य विदेशी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी तात्कालिक मांग पर दबाव पड़ता है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त भी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों (Non-Yielding Assets) जैसे सोने के प्रति आकर्षण को थोड़ा सीमित करती है।
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फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर नजर: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के भविष्य के पथ और आर्थिक आंकड़ों को लेकर आ रहे बयानों ने सटोरियों को अपनी लॉन्ग पोजीशंस हल्की करने पर मजबूर किया है। जब तक ब्याज दरों में कटौती का स्पष्ट और आक्रामक रोडमैप सामने नहीं आता, तब तक बड़े संस्थागत निवेशक ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली करते दिख रहे हैं।
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तकनीकी मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले सत्रों में सोने और चांदी द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड स्तरों के बाद ट्रेडर्स ने सुरक्षित मुनाफा बांधने के लिए बिकवाली की। विशेष रूप से चांदी में, जहां औद्योगिक मांग के साथ-साथ भारी उतार-चढ़ाव रहता है, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की तरफ से मुनाफावसूली ज्यादा तेज देखी गई।
घरेलू सर्राफा और एमसीएक्स पर क्या है मौजूदा रुझान?
विदेशी बाजारों में आई इस नरमी का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजारों पर पड़ा है। एमसीएक्स (MCX) पर सोने और चांदी के वायदा अनुबंधों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खुदरा बाजारों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दामों में कुछ सौ रुपयों की राहत देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में भी प्रति किलोग्राम स्तर पर तकनीकी गिरावट आई है। हालांकि, भारतीय बाजार में रुपये और डॉलर (USD/INR) की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और आयात शुल्क के गणित के कारण अंतरराष्ट्रीय गिरावट का पूरा लाभ कभी-कभी घरेलू खरीदारों को सीधे नहीं मिल पाता, फिर भी मौजूदा स्तरों को त्योहारी सीजन से ठीक पहले एक राहत भरा तकनीकी सुधार माना जा रहा है।
मौजूदा गिरावट में निवेशकों को किन 5 अहम बातों पर रखना चाहिए फोकस?
यदि आप सोने या चांदी में नया निवेश करने की सोच रहे हैं या पहले से निवेशक हैं, तो बाजार विश्लेषकों के अनुसार इन पांच बुनियादी बिंदुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है:
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एकमुश्त खरीदारी के बजाय 'बाय ऑन डिप्स' (Buy on Dips): कमोडिटी बाजार में कभी भी सारा पैसा एक ही झटके में न लगाएं। विदेशी बाजारों में आई इस तरह की 1% से 2% की हर गिरावट पर चरणबद्ध तरीके से (Staggered Manner) छोटी-छोटी किस्तों में खरीदारी करें। यह रणनीति आपकी औसत खरीद लागत को संतुलित रखती है।
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फिजिकल गोल्ड बनाम डिजिटल/ईटीएफ विकल्प: आभूषण खरीदने पर 10% से 25% तक मेकिंग चार्ज और 3% जीएसटी लगता है, जिससे रीसेल वैल्यू घटती है। यदि आपका उद्देश्य केवल विशुद्ध निवेश और वेल्थ क्रिएशन है, तो गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या गोल्ड म्यूचुअल फंड्स का विकल्प चुनें, जहां न तो शुद्धता का कोई झंझट होता है और न ही स्टोरेज व मेकिंग चार्ज का नुकसान।
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चांदी में उतार-चढ़ाव (Volatility) के लिए तैयार रहें: सोना एक पारंपरिक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, जबकि चांदी एक हाइब्रिड धातु है जिसकी लगभग 50% से अधिक खपत सौर ऊर्जा (Solar PV Cells), इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में होती है। इसलिए वैश्विक मंदी या औद्योगिक सुस्ती के दौर में चांदी सोने की तुलना में ज्यादा तेजी से गिरती या चढ़ती है। चांदी में निवेश करते समय कम से कम 3 से 5 साल का लंबी अवधि का नजरिया रखें।
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भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर सतर्क नजर: पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण सोने को हमेशा एक मजबूत अंडरलाइंग सपोर्ट हासिल रहता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई अप्रत्याशित संकट गहराता है, निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोने की ओर दौड़ते हैं, जिससे कीमतें दोबारा उछल सकती हैं। इसलिए किसी भी अचानक गिरावट को घबराहट की बिक्री में न बदलें।
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पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का नियम (10-15% आवंटन): वित्तीय योजनाकारों का स्पष्ट नियम है कि अपने कुल वित्तीय पोर्टफोलियो का 10% से अधिकतम 15% हिस्सा ही सोने-चांदी में रखना चाहिए। इसे महंगाई से बचाव (Hedge against Inflation) और शेयर बाजार की मंदी के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में देखें, न कि रातों-रात अमीर बनने वाले सट्टा साधन के रूप में।
त्योहारी सीजन और शादियों की मांग से कीमतों को मिलेगा सहारा
अक्टूबर का महीना भारत में नवरात्रि, करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों का समय होता है, जिसके तुरंत बाद देश भर में शादियों का सघन सीजन शुरू हो जाता है। ऐतिहासिक रूप से भारतीय घरेलू बाजार में त्योहारी मांग के चलते अक्टूबर और नवंबर के महीनों में फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की खपत चरम पर रहती है। सर्राफा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों में आई यह नरमी घरेलू खरीदारों के लिए एडवांस बुकिंग और ज्वेलरी खरीदारी का बेहतर मौका दे रही है। जैसे ही त्योहारी सीजन की फिजिकल लिवाली रफ्तार पकड़ेगी, स्थानीय प्रीमियम के चलते घरेलू कीमतों को निचली सतह से मजबूत सपोर्ट मिलने की पूरी संभावना है।
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