News India Live, Digital Desk: पहले माना जाता था कि डायबिटीज (मधुमेह) 50 या 60 की उम्र के बाद होने वाली बीमारी है, लेकिन अब 30 साल के युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हमारे ‘जंक फूड कल्चर’ और सुस्त जीवनशैली ने युवाओं के शरीर में इंसुलिन के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। यदि आप भी बर्गर, पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक्स के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है।जंक फूड और डायबिटीज का सीधा कनेक्शन: एंडोक्राइनोलॉजी का खुलासाजब आप अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फूड खाते हैं, तो शरीर में क्या होता है?इंसुलिन रेजिस्टेंस: जंक फूड में मौजूद ‘रिफाइंड शुगर’ और ‘मैदा’ खून में शुगर के लेवल को अचानक बढ़ा देते हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए पेनक्रियाज (Pancreas) को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील (Resistant) हो जाता है।बैली फैट (पेट की चर्बी): जंक फूड में ‘ट्रांस फैट’ की मात्रा अधिक होती है, जो विशेष रूप से पेट के आसपास जमा होता है। यह चर्बी ऐसे केमिकल्स रिलीज करती है जो इंसुलिन के काम में बाधा डालते हैं।मेटाबॉलिक डिसऑर्डर: 30 की उम्र में मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। ऐसे में हाई-कैलोरी फूड शरीर के लिए जहर के समान हो जाता है।30 की उम्र में दिखने वाले 5 शुरुआती ‘रेड फ्लैग्स’ (संकेत):यदि आपको ये लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत अपना HbA1c टेस्ट करवाएं:अत्यधिक थकान: भरपूर नींद के बाद भी दिन भर थका हुआ महसूस करना।बार-बार भूख और प्यास: खाना खाने के तुरंत बाद फिर से कुछ मीठा खाने की इच्छा होना।धुंधली दृष्टि: आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव या धुंधलापन।जल्दी घाव न भरना: छोटी सी खरोंच या चोट को ठीक होने में लंबा समय लगना।अचानक वजन कम होना: बिना किसी एक्सरसाइज के वजन का तेजी से गिरना।डॉक्टरों की सलाह: कैसे बचें ‘शुगर’ के जाल से?80/20 का नियम: अपनी डाइट में 80% घर का बना पौष्टिक खाना रखें और जंक फूड को केवल 20% या उससे भी कम (महीने में 1-2 बार) तक सीमित करें।फाइबर को दोस्त बनाएं: मैदा की जगह ‘होल ग्रेन’ (साबुत अनाज), हरी सब्जियां और फलों को शामिल करें। फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करता है।30 मिनट की वॉक: एंडोक्राइनोलॉजिस्ट का मानना है कि रोजाना सिर्फ 30 मिनट की तेज सैर डायबिटीज के खतरे को 40% तक कम कर सकती है।
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