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Heavy Rain Alert: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और भूस्खलन ने मचाई भारी तबाही

विशेष राज्य एवं मौसम रिपोर्टर, शिमला: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में आफत की बारिश का दौर लगातार जारी है। मानसूनी हवाओं की सक्रियता और कई जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में बादल फटने, चट्टानें खिसकने और लैंडस्लाइड (Landslide) की घटनाओं से भारी नुकसान दर्ज किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शिमला, मंडी, कुल्लू, चंबा और सिरमौर जिलों में 150 से अधिक सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह ठप हो गई हैं। इनमें से कई मुख्य राज्य मार्ग (State Highways) और ग्रामीण संपर्क मार्ग शामिल हैं, जिससे दर्जनों दूरदराज के गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें जेसीबी मशीनों के साथ मलबे को हटाने और मार्ग बहाल करने के काम में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों और बारिश के चलते राहत एवं बचाव कार्यों में भारी व्यवधान आ रहा है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (IMD Shimla) ने राज्य में जारी बारिश के रौद्र रूप को देखते हुए 10 अगस्त 2026 तक पूरे प्रदेश में 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी रखा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी दिनों में शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और बिलासपुर जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। इसके साथ ही, निचली पहाड़ियों और मैदानी इलाकों में तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने और अचानक फ्लैश फ्लड (Flash Flood) आने की कड़ा चेतावनी दी गई है। राज्य की प्रमुख नदियां—व्यास, सतलुज, रावी और गिरि—उफान पर हैं। पंडोह और नथापा झाकड़ी डैम के जलग्रहण क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के कारण जलाशयों से पानी छोड़ने की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है।

भूस्खलन से कई एनएच बाधित, नदियां उफान पर और पर्यटकों के लिए प्रशासन की सख्त हिदायत

बारिश के इस कहर के कारण केवल सड़कें ही बंद नहीं हुई हैं, बल्कि जल आपूर्ति योजनाओं (Water Supply Schemes) और बिजली के दर्जनों ट्रांसफार्मर ठप हो जाने से स्थानीय निवासियों को पीने के पानी और बिजली की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइनें मलबे में दब गई हैं, जिससे जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित हुई है। कुल्लू और मनाली जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21) पर भी जगह-जगह पत्थर और मलबा गिर रहा है, जिससे गाड़ियां घंटों फंसी रहीं। चंडीगढ़-शिमला नेशनल हाईवे (NH-5) पर सोलन और परवाणू के पास भूस्खलन का खतरा लगातार मंडरा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अति आवश्यक कार्य न होने पर इन संवेदनशील रास्तों पर यात्रा न करने की अपील की है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शिमला के उपायुक्त और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने नदियों, खड्डों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे लैंडस्लाइड प्रोन जोन में रुकने से बचें और नदी-नालों के किनारे फोटोग्राफी या रील बनाने की गलती न करें। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम विभाग ने आगाह किया है कि 10 अगस्त तक मौसम खराब रहेगा, इसलिए पहाड़ियों की यात्रा करने से पहले ट्रैफिक और वेदर अपडेट जरूर चेक कर लें।