
News India Live, Digital Desk: इजराइल की खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ (Mossad) के एक बेहद खतरनाक और चर्चित एजेंट एरेज़ शिमोनी (M. Erez Shimoni) की मौत की खबर ने पूरी दुनिया के रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है। शिमोनी वही शख्स था जिसने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों की नाक में दम कर रखा था। ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) का नायक माना जाने वाला यह जासूस अपनी बहादुरी और चालाकी के लिए मोसाद के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। अब उनकी मौत को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिसने ईरान और इजराइल के बीच जारी ‘शैडो वॉर’ को फिर से चर्चा में ला दिया है।कौन था एरेज़ शिमोनी और क्या था उसका मिशन?एरेज़ शिमोनी को मोसाद के सबसे घातक ‘किडोन’ यूनिट का हिस्सा माना जाता था। वह केवल एक जासूस नहीं, बल्कि वेश बदलने और दुश्मन के इलाके में घुसकर गुप्त जानकारी निकालने का उस्ताद था। शिमोनी को खास पहचान तब मिली जब उसने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ का नेतृत्व किया। इस मिशन के तहत ईरान के भीतर घुसकर उन महत्वपूर्ण फाइलों और सूचनाओं को चुराया गया था, जो ईरान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम का पर्दाफाश करती थीं। वह सालों तक तेहरान की गलियों में एक आम नागरिक की तरह रहा और किसी को कानो-कान खबर तक नहीं हुई।ईरान के लिए बना था ‘दुस्वप्न’ईरान की खुफिया एजेंसी ‘इतेलात’ सालों से शिमोनी की तलाश में थी। उसे ईरान के कई शीर्ष वैज्ञानिकों की हत्या और मिसाइल ठिकानों पर हुए रहस्यमयी धमाकों का मास्टरमाइंड माना जाता था। शिमोनी की कार्यशैली इतनी सटीक थी कि वह कोई सबूत पीछे नहीं छोड़ता था। यही कारण है कि उसकी मौत की खबर आने के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री और सुरक्षा प्रमुखों ने उसे ‘राष्ट्र का रक्षक’ बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।कैसे हुई मौत? सस्पेंस बरकरारशिमोनी की मौत की परिस्थितियों को लेकर अभी भी रहस्य बना हुआ है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि वह एक सक्रिय मिशन के दौरान मारा गया, जबकि इजराइली सूत्रों का कहना है कि उनकी मृत्यु स्वास्थ्य कारणों से हुई है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मोसाद के इतने बड़े एजेंट की मौत की टाइमिंग काफी कुछ इशारा कर रही है। क्या यह ईरान का जवाबी हमला था या फिर कोई हादसा? इस सवाल का जवाब फिलहाल इजराइली सुरक्षा एजेंसियां गुप्त रख रही हैं।मोसाद और ईरान के बीच बढ़ेगा तनाव?एरेज़ शिमोनी की मौत के बाद इजराइल में बदला लेने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मोसाद के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि शिमोनी जैसे एजेंट बार-बार पैदा नहीं होते। उसकी कमी को पूरा करना इजराइल के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। दूसरी ओर, तेहरान में इस खबर को अपनी बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे खुफिया युद्ध को एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है।
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