
हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव के साथ-साथ श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए भी अत्यंत पवित्र माना गया है [1.2.3, 1.2.5]। सावन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को 'कामिका एकादशी' (Kamika Ekadashi) के नाम से जाना जाता है [1.2.1, 1.2.3]। मान्यता है कि कामिका एकादशी का व्रत रखने से साधक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे हजारों तीर्थ यात्राओं तथा यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है [1.2.3, 1.2.5]। इस वर्ष कामिका एकादशी की तिथि को लेकर बन रहे भ्रम के बीच उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा [1.2.1, 1.2.5]। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ-साथ सावन मास के कारण भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का भी अद्भुत संयोग बन रहा है [1.2.3, 1.2.5]।
कामिका एकादशी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 8 अगस्त 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है [1.2.1, 1.2.2]। वहीं, इस एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा [1.2.1, 1.2.2]। शास्त्रों में सूर्योदय व्यापिनी उदयातिथि का विशेष महत्व माना गया है, इसलिए कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त को ही रखा जाएगा [1.2.1, 1.2.2]। इस दिन सुबह 07 बजकर 34 मिनट से सुबह 11 बजकर 13 मिनट तक 'द्विपुष्कर योग' का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है, जिसमें पूजा-अर्चना करने से दो गुना फल प्राप्त होता है [1.2.5]।
एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए द्वादशी तिथि में पारण करना अनिवार्य होता है। कामिका एकादशी व्रत के पारण का शुभ समय 10 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 05 बजकर 47 मिनट से सुबह 08:00 बजे के बीच रहेगा [1.2.1, 1.2.5]। साधकों को इसी समय अवधि के भीतर सात्विक भोजन या फल ग्रहण करके अपने व्रत का पारण कर लेना चाहिए [1.2.1, 1.2.4]।
कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि और तुलसी पूजन का विशेष महत्व
कामिका एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से पीले वस्त्र) धारण करें [1.2.2, 1.2.4]। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें [1.2.2]। घर के मंदिर में एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें [1.2.4]। इसके बाद भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं और पीला चंदन, गोपी चंदन, रोली, अक्षत, पीले फूल और धूप-दीप अर्पित करें [1.2.2, 1.2.4]।
इस दिन पूजा में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) का प्रयोग सबसे महत्वपूर्ण माना गया है [1.2.4]। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी दल के बिना कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते हैं [1.2.4]। इसलिए उन्हें पंजीरी, फल, पंचामृत और मिठाई का भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता अवश्य रखें [1.2.2, 1.2.4]। पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें [1.2.3, 1.2.4]। अंत में आरती उतारकर शाम के समय मंदिर या घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं [1.2.4]।
कामिका एकादशी पर ध्यान रखने योग्य नियम और महाउपाय
कामिका एकादशी के दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है [1.2.4]। इस दिन क्रोध, असत्य बोलने, निंदा करने और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) के सेवन से बचना चाहिए [1.1.3, 1.2.3]। एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। रात्रि के समय सोए बिना भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना विशेष फलदायी होता है [1.1.3]। जो श्रद्धालु इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या फलों का दान करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है [1.1.3, 1.2.4]।
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