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नई दिल्ली: भारत में रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी प्रणाली को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। अब इंडेन (Indane), एचपी (HP) और भारत गैस (Bharat Gas) के ग्राहकों को सिलेंडर लेते समय अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया वन-टाइम पासवर्ड डिलीवरी बॉय को बताना होगा। इस नए नियम के लागू होने से गैस सिलेंडरों की चोरी और सब्सिडी में होने वाली धांधली पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।क्या है नई डिलीवरी व्यवस्था और कैसे करेगी काम?सरकार की इस नई व्यवस्था के तहत, जैसे ही आप गैस सिलेंडर बुक करेंगे, आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक विशिष्ट कोड (OTP) भेजा जाएगा। जब डिलीवरी कर्मचारी आपके घर पर सिलेंडर लेकर पहुँचेगा, तो आपको वह कोड उसे दिखाना या बताना होगा। कर्मचारी अपने पास मौजूद स्मार्ट डिवाइस में इस कोड को दर्ज करेगा, जिसके बाद ही आपकी डिलीवरी को ‘सफल’ माना जाएगा। बिना इस प्रक्रिया के, आपका कोटा कम नहीं होगा और न ही डिलीवरी रिकॉर्ड में दर्ज होगी।कालाबाजारी और फर्जी डिलीवरी पर कड़ा प्रहारअक्सर शिकायतें आती थीं कि गैस एजेंसियां ग्राहकों के नाम पर फर्जी डिलीवरी दिखा देती थीं और सब्सिडी का पैसा डकार जाती थीं। नई डिजिटल प्रणाली में हेराफेरी की कोई गुंजाइश नहीं है। अब कोई भी व्यक्ति आपके नाम पर सिलेंडर नहीं उठा सकेगा। यह कदम न केवल सरकारी खजाने को बचाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि रसोई गैस केवल उन्हीं तक पहुँचे जिन्हें इसकी असल जरूरत है।मोबाइल नंबर अपडेट रखना है सबसे जरूरीइस नई प्रणाली का लाभ उठाने के लिए सबसे अनिवार्य शर्त यह है कि आपका सही मोबाइल नंबर गैस एजेंसी के रिकॉर्ड में दर्ज हो। यदि आपका नंबर बदल गया है या अभी तक लिंक नहीं है, तो आपको तुरंत अपनी गैस एजेंसी जाकर या संबंधित कंपनी के मोबाइल ऐप (IndianOil One, HP Pay, या BPCL SmartDrive) के जरिए इसे अपडेट करवाना चाहिए। बिना सक्रिय नंबर के आपको ओटीपी नहीं मिलेगा, जिससे डिलीवरी में देरी हो सकती है।बिना स्मार्टफोन वालों के लिए भी है आसान समाधानसरकार ने उन बुजुर्गों और ग्रामीण उपभोक्ताओं का भी ख्याल रखा है जो स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करते। ओटीपी एक सामान्य एसएमएस (SMS) के रूप में आता है, जिसे किसी भी साधारण कीपैड वाले फोन पर देखा जा सकता है। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, वहां के लिए आईवीआरएस (IVRS) की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की वजह से किसी भी गरीब या जरूरतमंद को असुविधा न हो।सुरक्षा के लिए बरतें ये विशेष सावधानीडिजिटल युग में सुरक्षा सबसे अहम है। उपभोक्ताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि ओटीपी एक गोपनीय जानकारी है। इसे केवल उसी समय डिलीवरी बॉय को दें जब वह आपके घर पर भौतिक रूप से सिलेंडर लेकर मौजूद हो। सावधान रहें: फोन पर कॉल करके या किसी लिंक के जरिए ओटीपी मांगने वालों को कोई जानकारी न दें, यह साइबर ठगी का प्रयास हो सकता है।
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