News India Live, Digital Desk: देश की रसोई गैस सप्लाई चेन में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने फैसला लिया है कि भविष्य में एलपीजी (LPG) का ट्रांसपोर्टेशन सड़क मार्ग से टैंकरों के जरिए नहीं, बल्कि सुरक्षित पाइपलाइनों के जरिए किया जाएगा। इस बड़े मिशन के लिए 9 नए एलपीजी पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स की पहचान की गई है, जिस पर करीब 12,500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक थोक एलपीजी की सड़क मार्ग से ढुलाई को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए।होरमुज संकट ने बदली सोचहाल ही में अमेरिका-ईरान तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत में एलपीजी का गंभीर संकट पैदा हुआ था।आयात पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का करीब 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा होरमुज के रास्ते आता है।पीएनजी (PNG) को बढ़ावा: सप्लाई चेन टूटने पर सरकार ने पीएनजी पर फोकस किया और लगभग 8 लाख नए कनेक्शन जारी किए, लेकिन अब एलपीजी के वितरण को भी पाइपलाइन मोड में लाकर इसे अधिक सुरक्षित और सस्ता बनाने की तैयारी है।इन 4 प्रमुख पाइपलाइनों के लिए अंतिम चरण में ‘बोली’ (Bidding)PNGRB ने 4 मुख्य पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स की बोली प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है:चेरलपल्ली-नागपुर पाइपलाइनशिक्रापुर-हुबली-गोवा पाइपलाइनपारादीप-रायपुर पाइपलाइनझांसी-सितारगंज पाइपलाइन ये पाइपलाइनें रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों को सीधे बॉटलिंग प्लांट से जोड़ेंगी, जिससे गैस की आपूर्ति बिना किसी बाधा के हो सकेगी।पाइपलाइन मोड के 5 बड़े फायदेसुरक्षा में इजाफा: सड़क पर गैस टैंकरों के पलटने या उनमें आग लगने जैसे भीषण हादसों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।पर्यावरण संरक्षण: टैंकरों के बंद होने से ईंधन की खपत कम होगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कटौती होगी।सस्ता और तेज: पाइपलाइन से गैस भेजना सड़क के मुकाबले काफी किफायती और तेज होता है, जिसका लाभ भविष्य में उपभोक्ताओं को मिल सकता है।ऊर्जा सुरक्षा: पाइपलाइनें केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय ‘स्टोरेज’ (भंडारण) का काम भी करेंगी, जिससे अचानक आने वाले सप्लाई संकट से निपटा जा सकेगा।क्षेत्रीय विकास: 2500 किमी लंबे इस नेटवर्क से नए रोजगार पैदा होंगे और संबंधित राज्यों के विकास को गति मिलेगी।’रोड टू पाइपलाइन’ ट्रांसफर का लक्ष्यPNGRB के अनुसार, आने वाले समय में पाइपलाइन ही भविष्य है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 2030 तक बल्क एलपीजी की रोड ट्रांसपोर्टेशन को पूरी तरह ‘जीरो’ करने का टारगेट रखा गया है। जानकारों का मानना है कि इस आधुनिक नेटवर्क से देश का एनर्जी सप्लाई सिस्टम न केवल विश्वसनीय बनेगा, बल्कि वैश्विक झटकों से भी सुरक्षित रहेगा।
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