
News India Live, Digital Desk: देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व ‘महाशिवरात्रि’ इस साल 15 फरवरी 2026 को मनाया जा रहा है। भक्त इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं। लेकिन कई बार बीमारी, अनजाने में कुछ खा लेने या शरीर की कमजोरी के कारण व्रत बीच में ही टूट जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों और पुराणों में ऐसे संकट के समय के लिए विशेष नियम बताए गए हैं, जिससे व्रत टूटने का दोष मिटाया जा सकता है।व्रत टूटने पर सबसे पहले क्या करें?अगर आपसे अनजाने में कोई भूल हो गई है, तो घबराएं नहीं। भगवान शिव अत्यंत दयालु और ‘आशुतोष’ हैं, जो सच्ची श्रद्धा देखते ही प्रसन्न हो जाते हैं। व्रत खंडित होने पर ये कदम उठाएं:क्षमा याचना मंत्र का जाप: सबसे पहले हाथ में जल लेकर शिवजी के सम्मुख अपनी भूल स्वीकार करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।स्नान और शुद्धिकरण: यदि कुछ खा लिया है, तो पुनः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और मंदिर की साफ-सफाई करें।पंचामृत से अभिषेक: शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) चढ़ाएं। माना जाता है कि पंचामृत के अभिषेक से अशुद्धि दूर होती है।दान-पुण्य है अनिवार्य: व्रत टूटने के दोष से मुक्ति के लिए सामर्थ्य अनुसार सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, चीनी या सफेद वस्त्र) का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।हवन और दीपदान: घर में या मंदिर में कपूर या गाय के घी का दीपक जलाएं। संभव हो तो महादेव के नाम का एक छोटा हवन करें।धर्म शास्त्रों की राय: क्या व्रत दोबारा शुरू करें?शास्त्रों के अनुसार, यदि सूर्यास्त से पहले व्रत टूटा है और आप शारीरिक रूप से सक्षम हैं, तो शुद्धिकरण के बाद शेष समय के लिए व्रत को जारी रख सकते हैं। हालांकि, मानसिक रूप से पछतावा और महादेव से प्रार्थना करना सबसे बड़ा प्रायश्चित माना गया है।इन बातों का रखें विशेष ध्यान (महाशिवरात्रि नियम)महाशिवरात्रि के दिन तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस) से पूरी तरह दूर रहें।क्रोध करने या किसी का अपमान करने से भी व्रत का फल कम हो जाता है।बीमार और बुजुर्गों के लिए शास्त्रों में ‘छूट’ का प्रावधान है, वे मानसिक व्रत भी रख सकते हैं।
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