News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र के पुणे शहर की शान कहा जाने वाला ‘शनिवार वाड़ा’ किला एक बार फिर से सुर्खियों में है. लेकिन इस बार वजह कोई ऐतिहासिक कहानी नहीं, बल्कि एक नया विवाद है. यहां कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा नमाज़ पढ़े जाने के बाद एक बीजेपी सांसद ने पूरे परिसर का ‘गोमूत्र’ से शुद्धिकरण कराया, जिसके बाद से देश भर में एक नई बहस छिड़ गई है.
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह शनिवार वाड़ा है क्या, इसका इतिहास क्या है, और यह पूरा विवाद क्यों खड़ा हुआ? चलिए, आज हम आपको इसी ऐतिहासिक किले की कहानी और इससे जुड़े ताजा विवाद के बारे में सब कुछ बताते हैं.
क्या है शनिवार वाड़ा का गौरवशाली इतिहास?
शनिवार वाड़ा सिर्फ एक किला नहीं, बल्कि मराठा साम्राज्य के गौरव, शौर्य और उत्थान-पतन का गवाह है. इसका निर्माण 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य के महान पेशवा, बाजीराव प्रथम (बाजीराव-मस्तानी वाले) ने करवाया था.
- क्यों पड़ा ‘शनिवार’ नाम? इस किले की नींव 10 जनवरी, 1730 को शनिवार के दिन रखी गई थी और इसका गृह प्रवेश भी शनिवार के दिन ही हुआ था. इसी वजह से इसका नाम ‘शनिवार वाड़ा’ पड़ा. ‘वाड़ा’ मराठी में एक बड़ी हवेली या किले को कहते हैं.
- पेशवाओं का शक्ति केंद्र: बनने के बाद यह किला करीब 60 सालों तक मराठा पेशवाओं का मुख्य सत्ता केंद्र रहा. यहीं से पूरे मराठा साम्राज्य का राज-काज चलता था. बाजीराव के बाद उनके वंशजों ने यहीं से शासन किया.
- अद्भुत वास्तुकला: यह किला मराठा और मुगल वास्तुकला का एक खूबसूरत मिश्रण था. कहा जाता है कि जब यह बनकर तैयार हुआ था, तब इसकी दीवारें रामायण और महाभारत के दृश्यों से सजी हुई थीं.
आग और तबाही का शिकार हुआ किला
इस किले ने जितना गौरव देखा, उतनी ही तबाही भी झेली.
- 1828 की भीषण आग: 1828 में किले के अंदर एक बहुत ही भीषण आग लगी, जो सात दिनों तक जलती रही. इस आग में किले का लगभग पूरा लकड़ी का हिस्सा और ऊपरी मंजिलें जलकर खाक हो गईं. अब यहां केवल पत्थर की मजबूत बाहरी दीवारें, नींव, और शानदार दिल्ली दरवाज़ा ही बचा है.
- सबसे भूतिया जगह? शनिवार वाड़ा को भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक भी माना जाता है. ऐसी कहानियां प्रचलित हैं कि यहां आज भी 18 वर्षीय पेशवा नारायण राव की आत्मा भटकती है, जिनकी इसी किले में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.
क्या है ताजा विवाद?
हाल ही में, किले के परिसर में कुछ मुस्लिम महिलाओं के नमाज़ अदा करने का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो के सामने आते ही हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई. इसके बाद, बीजेपी के स्थानीय सांसद ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर पूरे परिसर में गोमूत्र छिड़ककर और हनुमान चालीसा का पाठ करके उसका ‘शुद्धिकरण’ किया.
- क्या कहते हैं नियम? शनिवार वाड़ा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत एक संरक्षित स्मारक है. ASI के नियमों के अनुसार, किसी भी संरक्षित स्मारक में, जब तक कि वह पूजा स्थल के रूप में पहले से प्रचलित न हो, किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की इजाजत नहीं है.
इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. एक तरफ लोग इसे ऐतिहासिक धरोहर पर धार्मिक राजनीति का आरोप लगा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे अपनी आस्था और संस्कृति की रक्षा का प्रतीक बता रहे हैं.
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